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April 28 2026 11:21 pm

दुनिया में बजा भारत का डंका सेना पर खर्च में बना 5वां सबसे बड़ा देश, चीन-पाकिस्तान रह गए दंग

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News India Live, Digital Desk: वैश्विक सैन्य शक्ति के मामले में भारत ने एक बार फिर दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया का 5वां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आधुनिकीकरण पर जोर देते हुए भारत का कुल सैन्य खर्च 92.1 अरब डॉलर (लगभग 7.6 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है।

'ऑपरेशन सिंदूर' और रक्षा बजट में भारी उछाल भारत के सैन्य खर्च में आई 8.9% की इस बढ़ोतरी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल पाकिस्तान सीमा पर चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' ने इस वृद्धि में बड़ी भूमिका निभाई। इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना को युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रखने हेतु आपातकालीन आधार पर हथियारों और घातक साजो-सामान की बड़े पैमाने पर खरीद की गई। सरकार ने भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए बजट 2026-27 में भी रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम फंड आवंटित किया है।

चीन और पाकिस्तान की स्थिति: कहां ठहरते हैं पड़ोसी? सैन्य खर्च की इस दौड़ में भारत के पड़ोसियों ने भी हाथ खोले हैं, लेकिन फासला बहुत ज्यादा है:

चीन (China): दुनिया में दूसरे नंबर पर मौजूद चीन ने अपना सैन्य बजट 7.4% बढ़ाकर 336 अरब डॉलर कर लिया है।

पाकिस्तान (Pakistan): कंगाली की हालत में भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। उसने अपने सैन्य खर्च में 11% की वृद्धि की है, लेकिन 11.9 अरब डॉलर के कुल खर्च के साथ वह सूची में काफी नीचे 31वें स्थान पर है।

हथियारों के आयात में रूस पर घटी निर्भरता सिपरी की रिपोर्ट में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। भारत अब धीरे-धीरे हथियारों के लिए रूस पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है। कभी भारत के कुल आयात में 70% हिस्सेदारी रखने वाला रूस अब 40% पर सिमट गया है। भारत अब फ्रांस, इजरायल और अमेरिका जैसे देशों से आधुनिक तकनीक और लड़ाकू विमान खरीद रहा है, जिससे भारतीय सेना पहले से कहीं अधिक घातक और आधुनिक हो गई है।

वैश्विक सैन्य खर्च ने तोड़े सारे रिकॉर्ड साल 2025 में पूरी दुनिया का कुल सैन्य खर्च 2,887 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका, चीन और रूस मिलकर कुल वैश्विक खर्च का 51% हिस्सा कवर करते हैं। यूक्रेन-रूस युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को फिर से हथियारों की होड़ में धकेल दिया है।