India's Stance : जंग की आग में भारत की शांति की पुकार,UN में फिर गूंजा- यह युद्ध का युग नहीं है

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News India Live, Digital Desk: India's Stance :  जब दुनिया के बड़े-बड़े देश यूक्रेन और रूस के मसले पर खेमों में बंटे हुए हैं, तब भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच से शांति का झंडा बुलंद किया है।भारत ने साफ और सीधे शब्दों में अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस मशहूर वाक्य को दोहराया है, जिसे आज पूरी दुनिया सुन रही है- "यह युद्ध का युग नहीं है"। यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि भारत की उस सोच को दिखाता है जो मानती है कि आज के जमाने में किसी भी मसले का हल बंदूक और बम से नहीं, बल्कि बातचीत से निकलना चाहिए।

लड़ाई के मैदान में समाधान नहीं

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वह यूक्रेन के मौजूदा हालात से बहुत चिंतित है। भारत का मानना है कि इस लड़ाई में बेगुनाह लोगों की जान जा रही है, जो किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।भारत ने यह भी साफ कर दिया कि किसी भी समस्या का समाधान जंग के मैदान में नहीं खोजा जा सकता भारत का कहना है कि रास्ता चाहे कितना भी मुश्किल क्यों न लगे, लेकिन बातचीत और कूटनीति ही शांति की ओर ले जाने वाला एकमात्र जरिया है।

सिर्फ़ यूक्रेन नहीं, पूरी दुनिया पर पड़ रहा असर

भारत ने इस मुद्दे के वैश्विक असर पर भी दुनिया का ध्यान खींचा। इस जंग की वजह से पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ रहे हैं। इसका सबसे बुरा असर 'ग्लोबल साउथ' यानी दुनिया के विकासशील और गरीब देशों पर पड़ रहा है, जिन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। भारत ने कहा कि यह जरूरी है कि इन देशों की आवाज भी सुनी जाए और उनकी चिंताओं को समझा जाए। भारत का दृष्टिकोण हमेशा से ही लोगों पर केंद्रित रहा है, यही वजह है कि भारत ने यूक्रेन को मानवीय सहायता भेजी है और अपने पड़ोसी देशों समेत 'ग्लोबल साउथ' के कई सहयोगियों को आर्थिक मदद भी दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस मामले पर रूस के राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ-साथ यूरोप के कई नेताओं से लगातार संपर्क में हैं। भारत का रुख एकदम स्पष्ट है - किसी गुट में शामिल होने के बजाय शांति के गुट में रहना और दुनिया को यह याद दिलाना कि आपसी सम्मान और बातचीत से ही मानवता का भला हो सकता है।