होर्मुज में बढ़ा तनाव: अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिनों का समझौता हुआ फेल, ओमान को ट्रंप की बमबारी की धमकी
खाड़ी देशों और वैश्विक राजनीति में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) की 60 दिनों की अवधि सोमवार को समाप्त हो गई, लेकिन शांति के बजाय तनाव और गहरा गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर उपजे विवाद और ओमान के बीच में आने से डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी दी है।
समझौता क्यों हुआ विफल
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सैन्य कार्रवाई को स्थायी रूप से रोकना, ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था। समझौते के तहत अमेरिका को 300 अरब डॉलर का पैकेज तैयार करना था, जबकि ईरान को परमाणु हथियारों की होड़ से हटना था। लेकिन विवाद की जड़ बना 'होर्मुज का समुद्री मार्ग'। ओमान द्वारा अमेरिका के समर्थन से एक नया समुद्री रूट तैयार करने पर ईरान ने आपत्ति जताई, जिसके बाद क्षेत्र में फिर से हमलों का दौर शुरू हो गया।
ट्रंप की ओमान को खुली चेतावनी
तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब ईरान ने ओमान के साथ होर्मुज मार्ग के नक्शे को लेकर बातचीत के संकेत दिए। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भड़क गए। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि यदि ओमान ईरान के साथ किसी भी ऐसी व्यवस्था में बाधा डालता है जो अमेरिका के हितों के खिलाफ है, तो वह उस पर बमबारी करने से पीछे नहीं हटेंगे। ट्रंप के इस बयान ने क्षेत्रीय समीकरणों को हिलाकर रख दिया है।
लेबनान और आर्थिक पैकेज का पेंच
समझौते में लेबनान की संप्रभुता का मुद्दा भी शामिल था, लेकिन इसमें इजरायल का स्पष्ट उल्लेख न होने के कारण स्थिति अस्पष्ट बनी रही। ईरान लगातार इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान में हमलों को रोकने की मांग कर रहा था, जिसे इजरायल ने मानने से इनकार कर दिया। इसके अलावा, 300 अरब डॉलर का आर्थिक पैकेज कौन देगा और इसे कैसे खर्च किया जाएगा, इस पर भी कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई, जिससे यह ऐतिहासिक समझौता पूरी तरह विफल हो गया है।