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महाडील के 48 घंटे के भीतर ही फूटा परमाणु वार्ता का बम, जेडी वेंस का दौरा अचानक रद्द होने से मची खलबली

पश्चिम एशिया और वैश्विक कूटनीति के मंच से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली सनसनीखेज खबर आ रही है। अभी दो दिन पहले ही ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई द्वारा अमेरिका से सीधी बातचीत को मंजूरी देने के बाद जिस महाडील की उम्मीद जगी थी, उस पर महज 48 घंटे के भीतर ही ब्रेक लग गया है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित पहली परमाणु वार्ता (Nuclear Talks) को अचानक और अप्रत्याशित रूप से रद्द कर दिया गया है। इस बड़े कूटनीतिक झटके के तुरंत बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) का इस क्षेत्र का प्रस्तावित दौरा भी आनन-फानन में रद्द कर दिया गया है, जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिकारों को सकते में डाल दिया है।

आखिरकार 48 घंटे में ऐसा क्या हुआ कि रद्द करनी पड़ी परमाणु वार्ता?

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, बातचीत की मेज पर बैठने से ठीक पहले दोनों देशों के बीच कुछ बेहद संवेदनशील मुद्दों पर गहरी असहमति बन गई। ईरान जहां बातचीत शुरू होने के साथ ही अपने तेल निर्यात और बैंकिंग सेक्टर पर लगे सभी प्रतिबंधों को तुरंत हटाने की जिद पर अड़ा था, वहीं अमेरिकी खेमा पहले ईरान के परमाणु सेंट्रीफ्यूज और यूरेनियम संवर्धन की क्षमता को पूरी तरह सीमित करने की गारंटी मांग रहा था। इस शुरुआती गतिरोध के अलावा, पर्दे के पीछे इजरायल की खुफिया लॉबिंग और अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के भीतर इस डील को लेकर हो रहे भारी विरोध को भी वार्ता रद्द होने की एक मुख्य इनसाइड वजह माना जा रहा है।

जेडी वेंस का दौरा रद्द होने से बढ़े गहरे संशय के बादल

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का यह दौरा इस संभावित परमाणु समझौते को अंतिम रूप देने और क्षेत्रीय सहयोगियों को भरोसे में लेने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा था। व्हाइट हाउस द्वारा इस दौरे को अचानक टाल दिए जाने से साफ संकेत मिलते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच का संकट अनुमान से कहीं ज्यादा गहरा हो चुका है। रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडी वेंस के दौरे का रद्द होना केवल एक तकनीकी खराबी या शिड्यूल में बदलाव नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि पश्चिम एशिया में बैकचैनल डिप्लोमेसी (पर्दे के पीछे की बातचीत) इस समय पूरी तरह से फेल हो चुकी है।

वैश्विक तेल बाजार और भारत की रणनीतिक चिंताओं पर पड़ेगा असर

इस महाडील पर अचानक ब्रेक लगने का सबसे सीधा और तुरंत असर ग्लोबल कमोडिटी मार्केट और कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। ईरान की नाकेबंदी खत्म होने की उम्मीद में जो वैश्विक बाजार कल तक राहत की सांस ले रहा था, वहां अब दोबारा अनिश्चितता और कच्चे तेल के दामों में उछाल आने का खतरा मंडराने लगा है। भारत के लिहाज से भी यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि नई दिल्ली इस बातचीत के सफल होने पर ईरान से दोबारा सीधे तेल आयात शुरू करने और चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट को नई रफ्तार देने की उम्मीद लगाए बैठा था। अब भारत को इस क्षेत्र में अपनी ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी होगी।

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