IAEA को ईरान का दो-टूक जवाब: 'परमाणु स्थलों का निरीक्षण केवल अंतिम समझौते के बाद ही संभव'
ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बीच परमाणु स्थलों के निरीक्षण को लेकर तनातनी फिर से बढ़ गई है। आईएईए प्रमुख राफेल मारियानो ग्रासी द्वारा परमाणु स्थलों के निरीक्षण के संकेत दिए जाने के बाद, ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण की अनुमति तभी दी जाएगी, जब अमेरिका और ईरान के बीच किसी अंतिम समझौते पर मुहर लग जाएगी।
ग्रासी के दावों पर ईरान का कड़ा रुख
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आईएईए प्रमुख के दावों का कोई आधार नहीं है। उन्होंने साफ किया कि स्विट्जरलैंड में ग्रासी के किसी भी अनुरोध के बावजूद उनसे कोई मुलाकात नहीं हुई है और न ही ईरान उन परमाणु स्थलों या सामग्री तक पहुंच देने की योजना बना रहा है, जिन्हें लेकर चर्चाएं चल रही हैं। गरीबाबादी के अनुसार, ईरान का रुख स्पष्ट है—निरीक्षण का प्रश्न केवल अंतिम समझौते के तहत और सभी प्रतिबंधों के हटने के बाद ही विचारणीय होगा।
निरीक्षण के लिए ईरान की शर्तें
ईरान ने अपनी नीति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि परमाणु स्थलों तक आईएईए की पहुंच तभी सुनिश्चित होगी जब दूसरे पक्ष (अमेरिका) की ओर से लगाए गए सभी प्रतिबंधों को हटाने के लिए ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए जाएंगे। आईएईए प्रमुख ग्रासी ने हाल ही में टोक्यो में संकेत दिया था कि एजेंसी के निरीक्षक ईरान के परमाणु संवर्धन स्थलों का दौरा कर सकते हैं, जो अमेरिका और ईरान के बीच हुए कथित अंतरिम समझौते का मुख्य हिस्सा माना जा रहा था। हालांकि, ईरान के ताजा बयान ने इस प्रक्रिया पर फिर से संशय पैदा कर दिया है।
क्या परमाणु संकट और गहराएगा
ईरान का यह कड़ा स्टैंड बताता है कि वह परमाणु मामले में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी के मूड में नहीं है। अमेरिका के साथ जारी अंतरिम वार्ता और उसके बाद के परिणामों के बीच ईरान का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि वह अपनी परमाणु सामग्री और स्थलों पर पूर्ण नियंत्रण चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निरीक्षण पर सहमति नहीं बनती है, तो आईएईए और ईरान के बीच का गतिरोध और गहरा सकता है, जो सीधे तौर पर मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वाशिंगटन और तेहरान के बीच कोई मध्य मार्ग निकल पाता है या परमाणु निरीक्षण का यह विवाद और लंबा खिंचेगा।