कंगाल पाकिस्तान के लिए मसीहा बना ड्रैगन! डॉलर संकट के बीच चीन ने थमाई संजीवनी बूटी
गंभीर आर्थिक तंगहाली और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) की भारी किल्लत से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। डॉलर-डॉलर के लिए तड़प रहे और डिफॉल्ट होने की कगार पर पहुंचे अपने सदाबहार दोस्त (All-Weather Ally) पाकिस्तान को बचाने के लिए चीन एक बार फिर आगे आया है। अंतरराष्ट्रीय भुगतानों और डूबती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए चीन ने पाकिस्तान को एक बड़ा वित्तीय लाइफलाइन पैकेज जारी किया है। इस वित्तीय संजीवनी के मिलने से पाकिस्तानी हुक्मरानों ने बड़ी राहत की सांस ली है, क्योंकि इससे देश पर मंडरा रहा तात्कालिक आर्थिक संकट कुछ समय के लिए टल गया है।
बीजिंग से इस्लामाबाद पहुंची मदद और सऊदी-यूएई का रुख
इस्लामाबाद के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, चीन ने इस वित्तीय सहायता के तहत अपने पुराने कर्जों के रोलओवर (Rollover) को मंजूरी दे दी है और साथ ही नए विदेशी मुद्रा फंड की व्यवस्था की है। पाकिस्तान पिछले काफी समय से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कड़ी शर्तों और मित्र देशों जैसे सऊदी अरब और यूएई से मिलने वाली किश्तों में हो रही देरी के कारण बेहद दबाव में था। ऐसे नाजुक वक्त में चीन द्वारा दिए गए इस बड़े डिपॉजिट से पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक (State Bank of Pakistan) को अपने विदेशी मुद्रा भंडार को दोबारा एक सुरक्षित स्तर पर लाने में मदद मिलेगी।
कर्ज के जाल (Debt Trap) में और उलझा पाकिस्तान
भले ही चीन की इस वित्तीय मदद को पाकिस्तान में एक बड़ी कामयाबी और संजीवनी बूटी की तरह देखा जा रहा हो, लेकिन वैश्विक आर्थिक विशेषज्ञ इसे एक अलग नजरिए से देख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह मदद पाकिस्तान को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के बजाय उसे चीन के और गहरे 'कर्ज जाल' में धकेल देगी। पाकिस्तान पर पहले से ही चीन का अरबों डॉलर का कर्ज बकाया है, जिसमें सीपीईसी (CPEC) परियोजनाओं से जुड़े वाणिज्यिक लोन भी शामिल हैं। इस नए वित्तीय तालमेल के बाद पाकिस्तान की बीजिंग पर रणनीतिक और आर्थिक निर्भरता पूरी तरह बढ़ जाएगी।
पाकिस्तानी आवाम को महंगाई से राहत या सिर्फ दिखावा
इस चीनी मदद का पाकिस्तान के स्थानीय बाजारों और आम जनता पर क्या असर होगा, इसे लेकर भी कयासों का दौर शुरू हो गया है। आर्थिक जानकारों के मुताबिक, इस डॉलर इन्फ्यूजन से पाकिस्तानी रुपये (PKR) में आ रही रिकॉर्ड गिरावट पर कुछ समय के लिए ब्रेक जरूर लगेगा, जिससे आयातित वस्तुओं (Imported Goods) जैसे पेट्रोल, डीजल और खाद्य पदार्थों की कीमतों को स्थिर रखने में थोड़ी मदद मिल सकती है। हालांकि, जब तक पाकिस्तान अपने आंतरिक कर ढांचे और बुनियादी आर्थिक नीतियों में कड़े सुधार नहीं करता, तब तक आम जनता को महंगाई की मार से स्थायी मुक्ति मिलना नामुमकिन नजर आता है।