झारखंड में साइंस विषय से तेजी से मोहभंग! फिजिक्स की 120 सीटों पर आए मात्र 3 आवेदन

झारखंड में साइंस विषय से तेजी से मोहभंग! फिजिक्स की 120 सीटों पर आए मात्र 3 आवेदन

झारखंड के उच्च शिक्षा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और शिक्षाविदों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। जहाँ एक समय में देश और राज्य के होनहार छात्र विज्ञान (Science) खासकर भौतिकी यानी फिजिक्स (Physics) जैसे गंभीर विषयों को पढ़ने के लिए अपनी जी-जान लगा देते थे, वहीं आज का दौर पूरी तरह बदल चुका है। राज्य के कालेजों और विश्वविद्यालयों से मिल रही रिपोर्ट के मुताबिक, साइंस के प्रति छात्रों का रुझान तेजी से कम हो रहा है, जिसका ताजा उदाहरण फिजिक्स विषय की 120 सीटों पर मात्र 3 आवेदन आना है। इसके विपरीत, छात्र अब तेजी से कॉमर्स (Commerce) और अन्य व्यावहारिक विषयों की तरफ रुख कर रहे हैं, जिससे उच्च शिक्षा के ट्रेडिशनल पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

भौतिकी जैसे कोर साइंस विषयों से छात्रों ने क्यों मोड़ा मुंह?

विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर दाखिला प्रक्रिया के दौरान यह हैरान करने वाला आंकड़ा सामने आया है। भौतिकी जैसे बुनियादी और महत्वपूर्ण विज्ञान विषय की 120 उपलब्ध सीटों के मुकाबले सिर्फ 3 विद्यार्थियों द्वारा आवेदन किया जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि युवा अब कोर साइंस की पढ़ाई से दूर हो रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई बड़े कारण हैं, जिनमें कठिन पाठ्यक्रम, लैब की लचर व्यवस्था, उच्च शिक्षा के बाद तुरंत रोजगार मिलने की अनिश्चितता और पारंपरिक साइंस विषयों के प्रति घटता आकर्षण मुख्य रूप से शामिल हैं। छात्र अब ऐसे विषयों में दाखिला लेना पसंद कर रहे हैं जो उन्हें कम समय में बेहतर करियर या जॉब ओरिएंटेड विकल्प मुहैया करा सकें।

कॉमर्स बना छात्रों का नया पसंदीदा ठिकाना, बदल रहा है एजुकेशन ट्रेंड

एक तरफ जहाँ फिजिक्स और केमेस्ट्री जैसे विज्ञान के मुख्य विषयों में सन्नाटा पसरा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ कॉमर्स (Commerce) स्ट्रीम के प्रति छात्रों का क्रेज आसमान छू रहा है। अकाउंटेंसी, फाइनेंस, बैंकिंग और मैनेजमेंट जैसे विषयों से जुड़े कोर्सेस में दाखिला लेने के लिए छात्रों में भारी मारामारी देखने को मिल रही है। जानकारों का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी उन क्षेत्रों को चुनना चाहती है जहाँ कॉर्पोरेट सेक्टर में आसानी से नौकरियां मिल सकें। कॉमर्स और प्रोफेशनल कोर्सेस में प्रैक्टिकल अप्रोच और त्वरित रोजगार की संभावनाओं ने छात्रों को साइंस की तुलना में इस तरफ आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाई है।

शिक्षा विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय, भविष्य की रणनीतियों पर उठ रहे सवाल

साइंस स्ट्रीम के प्रति छात्रों की इस घटती रुचि ने राज्य के शिक्षाविदों और विश्वविद्यालय प्रशासन की नींद उड़ा दी है। यदि बुनियादी विज्ञान के विषयों में ही छात्र नहीं पहुंचेंगे, तो आने वाले समय में देश और राज्य को अच्छे वैज्ञानिक, शोधकर्ता और प्रोफेसर कैसे मिल पाएंगे? शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और विश्वविद्यालयों को मिलकर शिक्षा प्रणाली में बदलाव करने की जरूरत है। पाठ्यक्रम को अधिक रोचक बनाने, लैब्स को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और साइंस की पढ़ाई के बाद रोजगार की संभावनाओं को स्पष्ट करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, वरना आने वाले दिनों में पारंपरिक विज्ञान के ये महत्वपूर्ण विभाग खाली होने की कगार पर पहुंच जाएंगे।

 

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