350 किमी/घंटा की रफ्तार और 90% रास्ता सुरंगों में: चीन ने किनलिंग पहाड़ों को चीरकर दौड़ाई नई बुलेट ट्रेन
दुनिया के सबसे बड़े और एडवांस रेलवे नेटवर्क वाले देश चीन ने इंजीनियरिंग की दुनिया में एक और हैरतअंगेज कारनामा कर दिखाया है. चीन ने अपने देश के सेंट्रल (मध्य) और वेस्टर्न (पश्चिमी) हिस्सों को आपस में जोड़ने के लिए 350 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाली एक बेहद आधुनिक हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन सर्विस की शुरुआत कर दी है. मंगलवार सुबह जैसे ही चमचमाती नई G3966 बुलेट ट्रेन शिआन ईस्ट रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई, वैसे ही शिआन-शियान हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक पर आधिकारिक तौर पर परिचालन शुरू हो गया. इस नए रूट के शुरू होने से चीन के दो बड़े औद्योगिक और सांस्कृतिक हब के बीच की दूरी अब चंद घंटों में सिमट गई है.
6 घंटे का सफर अब सिर्फ मिनटों में, वुहान तक का रास्ता हुआ बेहद आसान
257 किलोमीटर लंबी इस नई हाई-स्पीड रेल लाइन ने शिआन (Shaanxi प्रांत) और शियान (Hubei प्रांत) के बीच यात्रा करने के समय में 6 घंटे से अधिक की भारी कटौती कर दी है. यानी जो सफर पहले पूरा दिन खा जाता था, वह अब मिनटों में पूरा हो रहा है. सबसे खास बात यह है कि यह नई रेल लाइन पहले से चल रही वुहान-शियान हाई-स्पीड रेलवे से भी जाकर कनेक्ट होती है. इस बेहतरीन कनेक्टिविटी का नतीजा यह हुआ है कि अब शिआन से लेकर वुहान तक का एक बहुत लंबा सफर यात्री केवल 2 घंटे 41 मिनट में बेहद आराम से पूरा कर सकेंगे.
'प्राकृतिक भूवैज्ञानिक संग्रहालय' को चीरकर बनी रेल लाइन, 90% रास्ता पुल और सुरंगों में
यह प्रोजेक्ट चीन के रेल इतिहास के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है. यह रेलवे लाइन सीधे 'किनलिंग पर्वतों' (Qinling Mountains) के सीने को चीरकर गुजरती है, जिन्हें उत्तरी और दक्षिणी चीन के बीच की एक बेहद दुर्गम प्राकृतिक सीमा माना जाता है. इसके साथ ही यह ट्रेन हानजियांग नदी को भी पार करती है, जो चीन की मशहूर यांग्त्ज़ी नदी की सबसे प्रमुख सहायक नदी है.
इस ऐतिहासिक परियोजना के मुख्य डिजाइनर माओ लेई के मुताबिक, यह रेलवे जिस इलाके से गुजरती है, उसे अपनी बेहद जटिल बनावट के कारण 'प्राकृतिक भूवैज्ञानिक संग्रहालय' (Natural Geological Museum) कहा जाता है. इस खतरनाक और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र के कारण पूरी रेल लाइन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा जमीन पर नहीं, बल्कि हवा में तैरते पुलों और पहाड़ों के पेट को काटकर बनाई गई बेहद लंबी सुरंगों (Tunnels) के अंदर बनाया गया है.
47 अरब युआन का भारी-भरकम खर्च और 2021 से चल रही थी मेहनत
इस पूरे इलाके की कठिन भौगोलिक और पथरीली परिस्थितियों के कारण यहां लंबे समय से हैवी ट्रांसपोर्टेशन और बड़ी आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप या बेहद सीमित थीं. इसी बड़ी चुनौती को मात देने के लिए चीन सरकार ने साल 2021 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया था. इस बेहद आधुनिक और सुरक्षित ट्रैक को तैयार करने में चीन ने कुल 47.68 अरब युआन (यानी करीब 7 अरब अमेरिकी डॉलर) का भारी-भरकम बजट पानी की तरह बहाया है, जिसका असर अब साफ दिखने लगा है.
5G और BeiDou सैटेलाइट से लैस है नया शिआन ईस्ट रेलवे स्टेशन
इस नई बुलेट ट्रेन सेवा के स्वागत के लिए चीन ने शिआन ईस्ट रेलवे स्टेशन को एक नए जमाने के डिजिटल हब के रूप में तैयार किया है. उत्तर-पश्चिम चीन का यह सबसे बड़ा परिवहन केंद्र (Transport Hub) 1 लाख वर्ग मीटर से भी अधिक के विशालकाय क्षेत्र में फैला हुआ है. इस स्टेशन के निर्माण में अत्याधुनिक 5G कनेक्टिविटी, चीन के अपने 'BeiDou नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम' पर आधारित हाई-प्रिसिजन पोजिशनिंग और इंटेलिजेंट रोबोटिक कंस्ट्रक्शन तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है.
ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए स्टेशन की विशाल छत पर 30,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में हाई-एफिशिएंसी सोलर पैनल लगाए गए हैं. इन सोलर पैनल्स से हर साल लगभग 70 लाख kWh स्वच्छ और हरित बिजली (Green Electricity) पैदा होगी, जिससे पूरे स्टेशन की बिजली की जरूरतें खुद-ब-खुद पूरी हो जाएंगी.
15वीं पंचवर्षीय योजना: चीन का महा-विस्तार प्लान
चीन ने अपनी नई 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) के तहत देशभर के परिवहन इन्फ्रास्ट्रक्चर को और ज्यादा हाईटेक करने तथा आधुनिक हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को देश के आखिरी कोने तक ले जाने का एक बहुत बड़ा लक्ष्य रखा है. रक्षा और आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यह नई शिआन-शियान हाई-स्पीड रेलवे चीन की इसी दूरगामी रणनीतिक और आर्थिक मजबूती का एक बेहद अहम हिस्सा है.