पाकिस्तान के सामने बड़ा खतरा, सिंधु संधि पर शहबाज के मंत्री का डर, बोले- भारत दक्षिण एशिया में सबसे अहम
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति के मोर्चे पर पाकिस्तान की मुश्किलें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं, और अब खुद पाकिस्तानी हुक्मरानों को इस बात का गहरा डर सताने लगा है कि उनकी नीतियां देश को किस गहरी खाई में धकेल रही हैं। ताजा घटनाक्रम में पाकिस्तान के एक वरिष्ठ मंत्री ने सिंधु जल संधि और क्षेत्रीय भू-राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिससे इस्लामाबाद के भीतर मचे हड़कंप का साफ अंदाजा लगाया जा सकता है। पाकिस्तानी मंत्री ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि आज की वैश्विक और क्षेत्रीय वास्तविकता यह है कि भारत दक्षिण एशिया का सबसे महत्वपूर्ण, शक्तिशाली और अपरिहार्य देश बन चुका है। दशकों तक भारत के खिलाफ जहर उगलने और हर मंच पर टकराव की स्थिति पैदा करने वाले पाकिस्तान के नीति निर्माताओं के सुर अब बदलने लगे हैं, क्योंकि उन्हें यह अहसास हो चुका है कि भारत को नजरअंदाज करके क्षेत्रीय स्थिरता या पाकिस्तान का अपना आर्थिक वजूद बचाए रखना असंभव है। आइए इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं कि किस तरह सिंधु जल संधि के भविष्य को लेकर पाकिस्तान के भीतर डर का माहौल है और क्यों वहां के मंत्री को यह सच्चाई स्वीकार करनी पड़ी है।
सिंधु जल संधि और पाकिस्तान की बढ़ती रणनीतिक चिंताएं
भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुरानी 'सिंधु जल संधि' (Indus Waters Treaty) को लेकर इस्लामाबाद में इन दिनों गहरी चिंता और खलबली मची हुई है। पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था और जल सुरक्षा पूरी तरह से इसी संधि पर टिकी हुई है, क्योंकि उसके पंजाब और सिंध प्रांत के बड़े हिस्से इन्हीं नदियों के पानी से सिंचित होते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से भारत द्वारा इस संधि की समीक्षा करने और इसमें आधुनिक समय की जरूरतों के हिसाब से बदलाव करने की मांग ने पाकिस्तानी हुक्मरानों की नींद उड़ा दी है। पाकिस्तानी मंत्रियों और रणनीतिकारों को इस बात का डर सता रहा है कि यदि भारत ने सिंधु नदी के पानी के प्रवाह या इसके प्रबंधन पर कोई सख्त रुख अपनाया, तो पाकिस्तान का कृषि ढांचा पूरी तरह चरमरा जाएगा। पानी की कमी के इसी आसन्न खतरे ने पाकिस्तान के हुक्मरानों को अंदर से डरा दिया है, और उन्हें अब यह समझ आने लगा है कि जल सुरक्षा के मामले में वे पूरी तरह से भारत की रणनीतिक स्थिति पर निर्भर हैं।
पाकिस्तानी मंत्री का बड़ा बयान: भारत है दक्षिण एशिया की धुरी
पाकिस्तान के भीतर से आए इस नए बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जिसमें एक वरिष्ठ मंत्री ने माना है कि दक्षिण एशिया की भू-राजनीतिक और आर्थिक धुरी अब पूरी तरह से भारत के इर्द-गिर्द घूमती है। मंत्री ने स्वीकार किया कि भारत न केवल आर्थिक रूप से दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई ताकत है, बल्कि इस पूरे क्षेत्र में स्थिरता और विकास का मुख्य केंद्र भी वही है। जो देश लंबे समय तक भारत को क्षेत्रीय स्तर पर घेरने और अलग-थलग करने की कूटनीतिक चालें चलता रहा था, उसी देश के मंत्री के मुंह से यह स्वीकारोक्ति आना इस बात का बड़ा सबूत है कि पाकिस्तान अपनी बदहाली और कूटनीतिक विफलता के दौर से गुजर रहा है। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान के पास अब यह स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है कि दक्षिण एशिया में भारत के प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता और इस क्षेत्र के भविष्य का निर्धारण नई दिल्ली के रुख से ही तय होगा।
आर्थिक बदहाली और कूटनीतिक मोर्चे पर घिरा इस्लामाबाद
वर्तमान समय में पाकिस्तान जिस गंभीर आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और महंगाई के दौर से गुजर रहा है, उसने उसकी विदेश नीति की पोल खोल दी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्ज और अन्य देशों की मदद के सहारे सांस ले रहे पाकिस्तान को अब यह समझ आ रहा है कि उसकी पुरानी आक्रामक और शत्रुतापूर्ण नीतियां उसके नागरिकों के लिए किसी काम की नहीं हैं। एक तरफ देश में बुनियादी जरूरतों के लाले पड़े हैं, और दूसरी तरफ कूटनीतिक रूप से पाकिस्तान दुनिया भर में अलग-थलग पड़ता जा रहा है। कूटनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि पाकिस्तान के मंत्रियों द्वारा दिए जा रहे ऐसे बयान केवल मजबूरी का नतीजा हैं, ताकि वे पश्चिमी देशों और वैश्विक मंचों पर यह दिखा सकें कि वे क्षेत्रीय शांति के पक्षधर हैं, जबकि असलियत में उनकी आंतरिक व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमराई हुई हैं।
भारत की मजबूत स्थिति और क्षेत्रीय कूटनीति पर असर
दूसरी ओर, भारत ने हमेशा से कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभाई है, जो अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से कभी समझौता नहीं करता। भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत, अंतरिक्ष अभियानों, और मजबूत रक्षा तंत्र ने दुनिया भर में यह साबित कर दिया है कि नई दिल्ली किसी भी दबाव में आने वाली नहीं है। पाकिस्तान के मंत्रियों के इन बयानों से यह साफ जाहिर होता है कि भारत की सख्त और स्पष्ट विदेश नीति का ही असर है कि अब पड़ोसी मुल्क के हुक्मरानों को हकीकत का सामना करना पड़ रहा है। सिंधु जल संधि जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी भारत अपने कानूनी और राष्ट्रीय अधिकारों के तहत ही कदम उठा रहा है, जिससे पाकिस्तान पर मनोवैज्ञानिक और कूटनीतिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। आने वाले समय में दक्षिण एशिया की राजनीति में भारत का यह दबदबा और अधिक मजबूत होने की पूरी संभावना है।