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वफादार साथी फिर भी पाबंदी: दुनिया का वो इकलौता देश जहां कुत्ता पालने पर हो सकती है जेल, पर्यटकों के लिए भी कड़े नियम

कुत्तों को सदियों से इंसानों का सबसे वफादार साथी माना गया है। घर की रखवाली करनी हो या अकेलेपन को दूर करना, डॉग्स हमेशा अव्वल रहते हैं। मेडिकल साइंस और 'अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन' की रिसर्च भी मानती है कि कुत्तों के साथ थोड़ा वक्त बिताने या उन्हें थपथपाने से हमारे शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन (कोर्टिसोल) का लेवल बहुत तेजी से कम होता है। इसके साथ ही ऑक्सीटोसिन, सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे हैप्पी न्यूरोट्रांसमीटर का स्तर बढ़ता है, जो डिप्रेशन और मानसिक तनाव को दूर करने में मददगार होते हैं।

लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि इन तमाम खूबियों के बावजूद दुनिया में एक ऐसा देश भी है, जहाँ इस प्यारे और वफादार जानवर को पालने, रखने या यहाँ तक कि विदेश से अपने साथ लाने पर भी पूरी तरह बैन (Ban) है? जी हां, हम बात कर रहे हैं सैलानियों के पसंदीदा द्वीप मालदीव (Maldives) की।

मालदीव में कुत्तों पर क्यों है मुकम्मल पाबंदी?

मालदीव के कानून के मुताबिक, देश की सीमा के भीतर कोई भी स्थानीय नागरिक या बाहर से आने वाला विदेशी पर्यटक कुत्ता नहीं पाल सकता। अगर कोई इस नियम को तोड़ने की कोशिश करता है, तो उसे भारी कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। मालदीव ने अपने 'पशु कल्याण अधिनियम' (Animal Welfare Act) के तहत इस कानून को बेहद कड़ा कर दिया है, जिसके तहत प्रतिबंधित जानवरों को देश में लाने पर भारी-भरकम जुर्माना तय किया गया है।

पर्यटकों के कुत्ते देखते ही जब्त कर लेते हैं अधिकारी

अगर कोई विदेशी टूरिस्ट अनजाने में या जानकारी न होने के कारण अपने पालतू कुत्ते को फ्लाइट से मालदीव ले आता है, तो एयरपोर्ट पर तैनात कस्टम ऑफिसर्स उसे तुरंत अपनी कस्टडी में ले लेते हैं। इसके बाद सुरक्षा नियमों के तहत दो ही रास्ते अपनाए जाते हैं:

  • या तो उस कुत्ते को तुरंत अगली फ्लाइट से उसके मूल देश वापस भेज दिया जाता है।

  • या फिर जब तक वह विदेशी पर्यटक मालदीव में अपनी छुट्टियां बिता रहा है, तब तक कुत्ते को कस्टम की विशेष निगरानी (कस्टम बॉन्ड सुविधा) में रखा जाता है। पर्यटक के वापस लौटते समय ही उसे उसका पालतू जानवर सौंपा जाता है।

 सिर्फ इन्हें मिली है देश में रहने की इजाजत

मालदीव में आम लोगों के लिए कुत्ता देखना लगभग असंभव है। पूरे देश में सिर्फ वही कुत्ते दिखाई देते हैं जिनका इस्तेमाल वहां की पुलिस या कस्टम विभाग की स्पेशल स्निफर यूनिट्स (Sniffer Units) करती है। इन ट्रेंड कुत्तों का इस्तेमाल केवल सुरक्षा अभियानों, ड्रग्स और नशीले पदार्थों की चेकिंग और कानून व्यवस्था बनाए रखने जैसी जरूरी सरकारी ड्यूटी के लिए ही किया जाता है।

आखिर क्यों लगाया गया है यह सख्त बैन?

मालदीव सरकार की ओर से कुत्तों पर लगाए गए इस प्रतिबंध के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं— पहला वहां के स्वच्छता नियम और दूसरा धार्मिक मान्यताएं।

मालदीव एक पूर्ण इस्लामिक राष्ट्र है और वहां शरिया कानून के नियमों का पालन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुत्तों को 'अपवित्र' या 'नापाक' श्रेणी में रखा गया है, जिसके कारण घरेलू तौर पर इन्हें पालतू जानवर के रूप में रखने की मनाही है। हालांकि, मालदीव के लोगों को जानवरों से कोई नफरत नहीं है। वहां बिल्लियां पालने की पूरी आजादी है। इसके अलावा वहां के लोग रंग-बिरंगे पक्षी और खरगोश भी बड़े चाव से अपने घरों में रखते हैं।

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