स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर ज्यादा वसूले गए पैसे लौटाने में कोताही क्यों? यूपीपीसीएल पर भड़का नियामक आयोग, MD तलब

स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर ज्यादा वसूले गए पैसे लौटाने में कोताही क्यों? यूपीपीसीएल पर भड़का नियामक आयोग, MD तलब

उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े एक बड़े मामले में राज्य विद्युत नियामक आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। नए बिजली कनेक्शनों के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं से अधिक वसूली गई धनराशि को वापस करने में बरती जा रही लापरवाही पर आयोग ने कड़ी नाराजगी जताई है। इस मामले में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) को जमकर फटकार लगाई गई है और सभी बिजली वितरण कंपनियों के प्रबंध निदेशकों (MD) को आगामी 20 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया है।

उपभोक्ताओं के पैसे वापसी में देरी पर आयोग की सख्त नाराजगी

प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं से स्मार्ट प्रीपेड मीटर की वास्तविक लागत से अधिक पैसे वसूले जाने के मामले को लेकर मंगलवार को राज्य विद्युत नियामक आयोग में बेहद अहम सुनवाई हुई। आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार, सदस्य संजय कुमार सिंह और गिरीश कुमार वैश्य की बेंच ने बिजली कंपनियों की सुस्त कार्यप्रणाली और पावर कॉरपोरेशन की भूमिका पर कड़े सवाल खड़े किए।

उल्लेखनीय है कि उपभोक्ताओं से वसूली गई अतिरिक्त रकम की वापसी को लेकर 'राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद' ने आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद आयोग ने गत 6 मार्च को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सिंगल फेस मीटर के लिए निर्धारित लागत 2,800 रुपये और थ्री फेस मीटर के लिए 4,100 रुपये से अधिक जितनी भी राशि वसूली गई है, उसे अप्रैल महीने की पहली बिलिंग साइकिल में ही उपभोक्ताओं के खातों या बिलों में वापस किया जाए। सभी कंपनियों को 31 जुलाई तक इस पूरी प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ।

पावर कॉरपोरेशन ने दिए आंकड़े, अभी करोड़ों रुपये लौटाए जाने बाकी

मंगलवार को हुई इस सुनवाई में पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) प्रशांत वर्मा और मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के कुछ चुनिंदा अधिकारी आयोग के समक्ष पेश हुए। पावर कॉरपोरेशन की तरफ से लिखित जवाब देते हुए बताया गया कि जुलाई और अगस्त के दौरान कुल 93,138 बिजली उपभोक्ताओं को यह अतिरिक्त राशि लौटाई जानी थी, जिसमें 85,458 सिंगल फेस और 7,680 थ्री फेस उपभोक्ता शामिल थे।

कॉरपोरेशन के मुताबिक, कुल 33 करोड़ 22 लाख रुपये की इस धनवापसी के मुकाबले अब तक लगभग 30 करोड़ 86 लाख रुपये उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में वापस एडजस्ट किए जा चुके हैं, जबकि अभी भी करीब 2 करोड़ 36 लाख रुपये की धनराशि वापस किया जाना शेष बचा हुआ है।

उपभोक्ता परिषद ने उठाया बड़ा सवाल, पौने चार लाख उपभोक्ताओं का हो हिसाब

इस पूरी सुनवाई के दौरान विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बिजली कंपनियों के आंकड़ों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियां केवल 93,138 उपभोक्ताओं की धनवापसी का दावा कर रही हैं, जबकि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 10 सितंबर 2025 से लेकर 31 दिसंबर 2025 तक (जब तक नई कॉस्ट बुक लागू हुई थी) प्रदेश की तमाम बिजली कंपनियों ने कुल 3,73,509 नए बिजली कनेक्शन जारी किए थे।

परिषद का तर्क है कि इन सभी उपभोक्ताओं से स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर सिंगल फेस के लिए 6,016 रुपये और थ्री फेस के लिए 11,341 रुपये की भारी-भरकम दर से वसूली की गई थी। इसलिए केवल चुनिंदा लोगों के बजाय सभी पौने चार लाख उपभोक्ताओं के मामलों की नए सिरे से जांच होनी चाहिए और उनसे वसूले गए अतिरिक्त पैसों को वापस किया जाना चाहिए। अब आयोग के सख्त रुख और 20 अगस्त को होने वाली MDs की पेशी पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

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