राम मंदिर दान विवाद: कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने तोड़ी चुप्पी, पर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते ही भड़के अयोध्या के संत
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Donation Scam) के आरोपों को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद गिरी महाराज ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी है. ज़ी न्यूज़ द्वारा उनकी जवाबदेही पर सवाल उठाए जाने के बाद उन्होंने एक हस्ताक्षरित पत्र जारी कर अपनी सफाई पेश की. गोविंद गिरी ने इस पूरे विवाद में अपनी भूमिका और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वे कथाओं के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते हैं और महीने-डेढ़ महीने में ही अयोध्या आते हैं, इसलिए ज्यादातर जिम्मेदारियां उनकी नहीं थीं. उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही सत्य सामने आएगा और संदेह के बादल छंटेंगे.
अयोध्या के साधु-संतों में भारी आक्रोश, उठाए गंभीर सवाल
कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी के इस स्पष्टीकरण के बाद अयोध्या के संतों और आम जनमानस में नाराजगी और बढ़ गई है. हनुमान गढ़ी के महंतों और पुजारियों समेत अयोध्या के प्रमुख संतों डॉ. दिवेशाचार्य, शशिकांत दास, गुंजन दास, सीताराम दास और डॉ. चंद्रांशु महाराज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गोविंद गिरी को कटघरे में खड़ा किया. संतों का कहना है कि जब वे ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं, तो दान की सुरक्षा और हिसाब-किताब की पूरी जवाबदेही उन्हीं की बनती है. संतों ने चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि वे दशकों से रामलला की निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं, जबकि असली जिम्मेदार व्यक्ति सामने आने से बच रहा है.
आलंदी आश्रम में मौजूद हैं महाराज, पुणे में है करोड़ों का बंगला
ज़ी न्यूज़ की टीम ने जब कोषाध्यक्ष की लोकेशन का पता लगाया, तो सामने आया कि वे इस समय महाराष्ट्र के आलंदी स्थित वेदश्री तपोवन आश्रम में हैं, जहां धार्मिक अनुष्ठान और ट्रस्टियों के साथ उनकी बैठकें चल रही हैं. सुरक्षा कारणों से आम लोगों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई और उनके दिल्ली रवाना होने की चर्चा है. इसके अलावा पुणे की प्राइम लोकेशन मॉडर्न कॉलोनी में उनका एक विशाल और आलीशान बंगला भी है, जिसकी कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है.