Gorakhpur-Siliguri Expressway: अब दिल्ली से पटना का सफर महज 8 घंटे में! बिहार के 8 जिलों से होकर गुजरेगा 519 किमी लंबा गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे, जानें रूट और बड़े फायदे

Gorakhpur-Siliguri Expressway: अब दिल्ली से पटना का सफर महज 8 घंटे में! बिहार के 8 जिलों से होकर गुजरेगा 519 किमी लंबा गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे, जानें रूट और बड़े फायदे

विशेष रिपोर्टर, पटना/गोरखपुर: पूर्वांचल और उत्तर-पूर्व (North-East) भारत के बीच आधारभूत ढांचे (Infrastructure) के क्षेत्र में एक नई और ऐतिहासिक क्रांति की शुरुआत होने जा रही है। भारत सरकार के राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा प्रस्तावित 'गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे' (Gorakhpur-Siliguri Expressway) की कागजी और तकनीकी प्रक्रियाएं अब धरातल पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। लगभग 519 किलोमीटर लंबा यह 4-लेन (भविष्य में 6-लेन विस्तार योग्य) ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से शुरू होकर बिहार के 8 प्रमुख जिलों से गुजरते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक जाएगा।

इस एक्सप्रेसवे के बनने से सबसे बड़ा चमत्कार यह होगा कि देश की राजधानी दिल्ली से बिहार की राजधानी पटना तक का सफर, जो फिलहाल 14 से 16 घंटे में पूरा होता है, वह घटकर महज 8 घंटे रह जाएगा। इसके अलावा, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे का नेटवर्क आपस में जुड़ जाने से दिल्ली से सिलीगुड़ी और पूर्वोत्तर भारत (Assam, Meghalaya, etc.) तक आवाजाही का समय आधा हो जाएगा।

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे: एक नज़र में परियोजना की मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को एक नया आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर लाइफलाइन देने वाली इस परियोजना के मुख्य आंकड़े और विशेषताएं इस प्रकार हैं:

मुख्य बिंदु विस्तृत विवरण
कुल लंबाई (Total Length) लगभग 519 किलोमीटर
ग्रीनफील्ड एलाइनमेंट नया 4-लेन एक्सप्रेसवे (6-लेन तक विस्तार योग्य)
अनुमानित लागत (Estimated Budget) ₹32,000 करोड़ से अधिक
लाभान्वित राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल
बिहार में एक्सप्रेसवे की लंबाई लगभग 416 किलोमीटर
प्रस्तावित समय सीमा भारतमाला परियोजना (Phase-2) के तहत निर्माण

बिहार के इन 8 जिलों से होकर गुजरेगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा बिहार राज्य से होकर गुजरता है। राज्य में यह लगभग 416 किलोमीटर लंबा होगा और उत्तर बिहार के 8 प्रमुख जिलों को एक सूत्र में पिरोएगा।

बिहार के वे 8 जिले जहां से एक्सप्रेसवे गुजरेगा:

  1. पश्चिमी चंपारण (West Champaran): उत्तर प्रदेश के देवरिया से बिहार की सीमा में प्रवेश करते हुए एक्सप्रेसवे सबसे पहले पश्चिमी चंपारण पहुंचेगा।

  2. पूर्वी चंपारण (East Champaran): मोतिहारी क्षेत्र से गुजरते हुए यह एक्सप्रेसवे स्थानीय कृषि और व्यापार को गति देगा।

  3. शिवहर (Sheohar): राज्य का छोटा जिला होने के बावजूद इस एक्सप्रेसवे के बनने से शिवहर को पहली बार हाई-स्पीड कॉरिडोर से सीधा जुड़ाव मिलेगा।

  4. सीतामढ़ी (Sitamarhi): भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित सीतामढ़ी से गुजरने के कारण नेपाल के साथ सीमापार व्यापार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

  5. मधुबनी (Madhubani): मिथिलांचल का यह प्रमुख जिला एक्सप्रेसवे के माध्यम से सीधे पटना और दिल्ली नेटवर्क से जुड़ जाएगा।

  6. सुपौल (Supaul): कोसी क्षेत्र के इस जिले को बाढ़ राहत, लॉजिस्टिक्स और सुगम परिवहन में ऐतिहासिक फायदा मिलेगा।

  7. अररिया (Araria): एक्सप्रेसवे अररिया के मैदानी इलाकों से होकर गुजरेगा।

  8. किशनगंज (Kishanganj): पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा किशनगंज इसका बिहार में अंतिम पड़ाव होगा, जहां से यह सीधे सिलीगुड़ी (सिलीगुड़ी कॉरिडोर/चिकन नेक) में प्रवेश करेगा।

विशेष नोट: इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का एलाइनमेंट इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह किसी भी घनी आबादी वाले शहर के अंदर से न गुजरकर बाईपास (Bypass) रास्ते से गुजरे। इसके लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को भी तेज कर दिया गया है।

दिल्ली से पटना का सफर केवल 8 घंटे में कैसे संभव होगा?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे तो उत्तर बिहार और सिलिगुड़ी को जोड़ता है, फिर इससे दिल्ली से पटना का सफर 8 घंटे में कैसे पूरा होगा?

इसका उत्तर एक्सप्रेसवे के आपस में जुड़े 'कनेक्टिविटी ग्रिड' में छिपा है:

  1. दिल्ली से लखनऊ: दिल्ली से यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के जरिए 5.5 से 6 घंटे में लखनऊ पहुंचा जा सकता है।

  2. लखनऊ से गोरखपुर: पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए लखनऊ से गोरखपुर का सफर 3 घंटे में तय होता है।

  3. गोरखपुर से पटना लिंक: गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे जब बिहार के चंपारण और गोपालगंज/मुजफ्फरपुर क्षेत्र से गुजरेगा, तो वहां से इसे 'मुजफ्फरपुर-पटना स्पर् (Spur/Link Road)' और नए जेपी गंगा पथ/दीघा-एम्‍स एलिवेटेड रोड के जरिए सीधे पटना से जोड़ दिया जाएगा।

  4. सुपरफास्ट स्पीड: चूंकि पूरा मार्ग नियंत्रित-प्रवेश (Access-Controlled) वाला एक्सप्रेसवे होगा, जहां वाहनों की गति सीमा 100 से 120 किमी/घंटा रहेगी, इसलिए दिल्ली से पटना की दूरी बिना किसी ट्रैफिक जाम के महज 8 से 9 घंटे में पूरी हो सकेगी।

पूर्वांचल और बिहार के लिए गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के 5 बड़े फायदे

यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह उत्तर-पूर्वी भारत की अर्थव्यवस्था का पासा पलटने वाला साबित होगा:

  • चिकन नेक (Siliguri Corridor) की सुरक्षा और सामरिक महत्व: सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत को उसके उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है। सेना और रक्षा बलों के वाहनों की त्वरित आवाजाही के लिए यह एक्सप्रेसवे बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक रोल निभाएगा।

  • नेपाल से व्यापार में बढ़ोतरी: सीतामढ़ी और मधुबनी जैसे जिलों से गुजरने के कारण रक्सौल, जोगबनी और भीठामोड़ जैसे भारत-नेपाल व्यापारिक नाकों (Trade Checkposts) को सीधी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मिलेगी।

  • सब्जी, मखाना और आम किसानों की आय में इजाफा: उत्तर बिहार और मिथिलांचल का क्षेत्र मखाना, शाही लीची, आम और मक्के के उत्पादन के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। एक्सप्रेसवे बनने के बाद किसान अपनी जल्द खराब होने वाली फसलों को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता की बड़ी मंडियों तक कुछ ही घंटों में पहुंचा सकेंगे।

  • औद्योगिक गलियारा (Industrial Corridor) का विकास: एनएचएआई इस एक्सप्रेसवे के दोनों ओर लॉजिस्टिक्स पार्क, इंडस्ट्रियल हब, नए वेयरहाउस और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने की योजना बना रहा है।

  • पर्यटन को पंख: बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए कुशीनगर, वैशाली, सीतामढ़ी और फिर आगे दार्जिलिंग व सिक्किम तक यात्रा करना अब बेहद सुगम और समय बचाने वाला हो जाएगा।

परियोजना की वर्तमान स्थिति और आगे का रोडमैप

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अनुसार, गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा चुकी है और एलाइनमेंट सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों राज्यों में भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) के लिए आवश्यक 3A और 3D गजट अधिसूचनाएं जारी की जा रही हैं।

निर्माण कार्य को गति देने के लिए पूरे 519 किलोमीटर के पैकेज को कई अलग-अलग सिविल ठेकों (Civil Packages) में विभाजित किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद अगले 30 से 36 महीनों के भीतर यह एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो जाएगा, जिसके बाद उत्तर भारत से पूर्वोत्तर भारत की दूरी का एक नया इतिहास लिखा जाएगा।

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