राम मंदिर ट्रस्ट की कुंडली में शनि-राहु का 'विवादित' कनेक्शन: आखिर जून के महीने में ही क्यों लगते हैं आरोप

राम मंदिर ट्रस्ट की कुंडली में शनि-राहु का 'विवादित' कनेक्शन: आखिर जून के महीने में ही क्यों लगते हैं आरोप

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक बार फिर सुर्खियों में है। दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह है कि ट्रस्ट पर उठने वाले विवादों का 'जून' के महीने से गहरा नाता नजर आता है। साल 2021 के जून में जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़े आरोपों ने देशभर में हलचल मचा दी थी, और अब जून 2026 में चढ़ावे की रकम में कथित हेरफेर के आरोपों ने ट्रस्ट की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन विवादों ने न केवल ट्रस्ट, बल्कि भाजपा, संघ और विश्व हिंदू परिषद जैसे शीर्ष संगठनों के नेतृत्व की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।

जून का महीना और विवादों का चक्र

वर्ष 2021 में जून के दूसरे सप्ताह में जब ट्रस्ट पर जमीन के अधिक दाम में खरीद का आरोप लगा, तो अयोध्या से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई थी। उस वक्त ट्रस्टियों को एकजुट होकर सफाई देनी पड़ी थी। कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी ने तब साफ किया था कि सभी लेनदेन पारदर्शी हैं। मामला शांत हुआ ही था कि ठीक पांच साल बाद जून 2026 में चढ़ावे की रकम में हेरफेर का नया प्रकरण सामने आया। मामला इतना गंभीर है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी (SIT) गठित कर जांच शुरू कर दी है और कुछ गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं।

क्या कहती है ट्रस्ट की कुंडली: शनि-राहु का खेल?

इस पूरे विवाद को ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखते हुए ज्योतिषाचार्य पंडित आलोक दीक्षित ने चौंकाने वाले दावे किए हैं। उनके अनुसार, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति 'धनक्षरण' (धन की हानि) का संकेत दे रही है, जबकि ट्रस्ट के आय भाव पर शनि की सीधी दृष्टि पड़ रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में ट्रस्ट पर राहु की महादशा का प्रभाव है, जो 12 अक्टूबर 2026 तक रहेगा। राहु का यह अंतर 'पाप बुद्धि' को प्रेरित करने वाला माना जाता है, जो कथित तौर पर ट्रस्ट के अंदर वित्तीय अनियमितताओं का कारण बन रहा है।

शनि की साढ़े साती और विश्वसनीयता का संकट

ज्योतिषाचार्य का मानना है कि वर्तमान में ट्रस्ट शनि की साढ़े साती और राहु-केतु की युति के प्रभाव से गुजर रहा है। यही कारण है कि ट्रस्ट को बार-बार विश्वसनीयता और वित्तीय पारदर्शिता जैसे कठिन सवालों का सामना करना पड़ रहा है। पंडित दीक्षित के अनुसार, इन ग्रहों की स्थिति के कारण ही ट्रस्ट के कर्मचारियों और व्यवस्था में 'पाप बुद्धि' का योग बन रहा है, जिससे न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है बल्कि संस्था की गरिमा पर भी दाग लग रहे हैं।

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