धरी रह जाएगी अखिलेश-मायावती की सारी प्लानिंग! दलितों को बीजेपी से जोड़े रखने के लिए मैदान में उतरे नितिन नवीन

धरी रह जाएगी अखिलेश-मायावती की सारी प्लानिंग! दलितों को बीजेपी से जोड़े रखने के लिए मैदान में उतरे नितिन नवीन

उत्तर प्रदेश की राजनीति (UP Politics) हमेशा से देश की सत्ता का मुख्य केंद्र और सियासी प्रयोगशाला मानी जाती रही है। जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मी तेज हो रही है, राज्य के राजनीतिक गलियारों में विपक्षी दलों और सत्ताधारी पार्टी के बीच खींचतान चरम पर पहुंच चुकी है। एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती अपने पुराने समीकरणों को साधने और दलित-पिछड़ा वोट बैंक को अपने पाले में करने के लिए नए सिरे से रणनीति बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष की इस पूरी प्लानिंग को धाराशायी करने के लिए एक अचूक और बड़ा दांव चल दिया है। दलित समाज और शोषित वर्गों को बीजेपी के साथ मजबूती से जोड़े रखने के लिए पार्टी के दिग्गज नेता और रणनीतिकार नितिन नवीन को मैदान में उतार दिया गया है, जिसके बाद सूबे की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

अखिलेश और मायावती के राजनीतिक समीकरणों को चुनौती

उत्तर प्रदेश के सियासी समीकरणों में हमेशा से दलित और पिछड़ा वर्ग एक निर्णायक भूमिका निभाता आया है। मायावती का परंपरागत दलित वोट बैंक और अखिलेश यादव का 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला इन दिनों विपक्षी दलों के सबसे बड़े हथियार बने हुए हैं। विपक्षी दल लगातार यह दावा कर रहे हैं कि वे इस बार के चुनावों में सत्ता परिवर्तन करने में कामयाब रहेंगे। लेकिन बीजेपी आलाकमान ने विपक्ष के इस किले को भेदने के लिए जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने का फैसला लिया है। नितिन नवीन की एंट्री इसी रणनीति का एक अहम हिस्सा है, जो जमीनी स्तर पर जाकर दलित समुदायों के बीच पार्टी की पकड़ को और अधिक धारदार बनाने का काम कर रहे हैं।

 

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