12 महीने घूमने के 12 शानदार बहाने! कब कहां जाएं एक्सप्लोर करने भारत की बेमिसाल खूबसूरती?
भारत एक ऐसा विविधतापूर्ण देश है जहां हर सौ किलोमीटर पर न केवल भाषा और खान-पान बदल जाता है, बल्कि मौसम का मिजाज भी नए रंग दिखाता है। उत्तर के बर्फीले पहाड़ों से लेकर दक्षिण के नीले समंदर तक और पश्चिम के थार रेगिस्तान से लेकर पूर्वोत्तर की हरी-भरी वादियों तक, भारत में हर मौसम का अपना एक अलग जादू है। अक्सर लोग छुट्टी प्लान करते समय इस उलझन में फंस जाते हैं कि आखिर किस महीने में देश के किस कोने की सैर की जाए। गलत मौसम में गलत जगह जाने पर न केवल बजट बिगड़ता है बल्कि घूमना भी बेमजा हो जाता है। घुमक्कड़ी के शौकीनों की इसी समस्या का समाधान करने के लिए हमने तैयार किया है '12 महीने घूमने के 12 बहाने' का एक संपूर्ण ट्रैवल कैलेंडर। यह गाइड आपको बताएगी कि साल के किस महीने में मौसम, कुदरत का नजारा और स्थानीय संस्कृति आपके स्वागत के लिए सबसे बेहतरीन स्थिति में होते हैं।
जनवरी: जैसलमेर की सुनहरी रेत और सांस्कृतिक उत्सव (राजस्थान)
साल की शुरुआत यानी जनवरी का कड़ाके की ठंड वाला महीना राजस्थान के थार रेगिस्तान को एक्सप्लोर करने के लिए सबसे मुफीद माना जाता है। जैसलमेर का 'गोल्डन सिटी' इस मौसम में बेहद सुहावना हो जाता है। दिन में हल्की धूप और रात में थार रेगिस्तान की ठंडी हवाएं एक अद्भुत अनुभव देती हैं। जनवरी-फरवरी के दौरान यहां विश्व प्रसिद्ध 'जैसलमेर डेजर्ट फेस्टिवल' का आयोजन होता है, जहां आप ऊंट की सवारी, कालबेलिया नृत्य, पारंपरिक कठपुतली शो और रात में रेगिस्तान में टेंट कैंपिंग के साथ तारों भरे आसमान का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा जैसलमेर का विशाल किला और पटवों की हवेली देखने लायक होती है।
फरवरी: गुलमर्ग की बर्फीली वादियां और स्नो स्पोर्ट्स (जम्मू-कश्मीर)
अगर आप कड़ाके की बर्फबारी, स्नोबोर्डिंग और स्कीइंग के शौकीन हैं, तो फरवरी के महीने में धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर के 'गुलमर्ग' का रुख करें। फरवरी में गुलमर्ग पूरी तरह से सफेद बर्फ की मोटी चादर से ढका रहता है। दुनिया की सबसे ऊंची केबल कार सफारी में शामिल 'गोंडोला राइड' (Gondola Ride) का रोमांच फरवरी में दोगुना हो जाता है। यहां से अफरवात चोटी का नजारा किसी सपने जैसा लगता है। गुलमर्ग उन लोगों के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है जो बर्फ के साथ खेलना और रोमांचक स्नो स्पोर्ट्स का मजा लेना चाहते हैं।
मार्च: मथुरा-वृंदावन का पावन रंगोत्सव और वसंत ऋतु (उत्तर प्रदेश)
मार्च का महीना वसंत ऋतु के आगमन का संदेश लाता है। इस महीने में न तो ज्यादा ठंड होती है और न ही भीषण गर्मी। मार्च में भारत के सबसे जीवंत सांस्कृतिक अनुभव के लिए उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन और बरसाना की यात्रा करनी चाहिए। ब्रज की होली दुनिया भर में मशहूर है। बरसाना की 'लठमार होली', वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की 'फूलों वाली होली' और 'छड़ीमार होली' का गवाह बनना हर किसी के जीवन का यादगार पल होता है। होली के भक्तिमय माहौल में डूबे ब्रज के घाट और मंदिर मार्च में आध्यात्मिकता का अनोखा अहसास कराते हैं।
अप्रैल: दार्जिलिंग का सुहावना मौसम और कंचनजंगा के नजारे (पश्चिम बंगाल)
अप्रैल के आते ही मैदानी इलाकों में गर्मी की शुरुआत हो जाती है, ऐसे में पूर्वोत्तर भारत का मशहूर हिल स्टेशन 'दार्जिलिंग' घूमने के लिए सबसे मुफीद जगह बन जाता है। अप्रैल में यहां का मौसम बिल्कुल साफ और सुहावना रहता है। सुबह-सुबह टाइगर हिल से दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा पर पड़ती सूरज की पहली किरण का नजारा मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है। यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल 'दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे' यानी टॉय ट्रेन की सवारी, चाय के हरे-भरे बागान और बतासिया लूप अप्रैल में आपकी यात्रा को यादगार बना देंगे।
मई: लेह-लद्दाख का एडवेंचर और पैंगोंग झील (लद्दाख)
मई के महीने में जब भारत के अधिकांश हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में होते हैं, तब लद्दाख के रास्ते पर्यटकों के लिए खुलते हैं। मई में मनाली-लेह और श्रीनगर-लेह राजमार्ग से बर्फ हटाई जा चुकी होती है। बाइक राइडर्स और एडवेंचर लवर्स के लिए मई का समय लद्दाख की सैर का सबसे बेहतरीन समय माना जाता है। नीले रंग के बदलते शेड्स के लिए मशहूर 'पैंगोंग त्सो झील', नुब्रा वैली के दो कुबड़ वाले ऊंट, और दुनिया के सबसे ऊंचे मोटर योग्य पास जैसे खारदुंग ला को मई की सुखद ठंड में एक्सप्लोर करने का अनुभव ही अलग होता है।
जून: मेघालय की बारिशी वादियां और लिविंग रूट ब्रिज (पूर्वोत्तर भारत)
जून के महीने में देश में मानसून का आगमन होने लगता है और पूर्वोत्तर का खूबसूरत राज्य मेघालय बादलों की ओट में छिप जाता है। 'मेघालय' का अर्थ ही है 'बादलों का घर'। जून में चेरापूंजी और शिलॉन्ग के झरने अपने पूरे शबाब पर होते हैं। नोहकालिकाई फॉल्स और एलिफेंट फॉल्स का नजारा देखते ही बनता है। इसके अलावा मवल्यान्नोंग गांव (एशिया का सबसे स्वच्छ गांव) और खासी जनजाति द्वारा बरगद के पेड़ों की जड़ों से बनाए गए प्राकृतिक 'लिविंग रूट ब्रिज' (Living Root Bridge) को जून के शुरुआती मानसून में देखना एक अविश्वसनीय अहसास कराता है।
जुलाई: उत्तराखंड की रहस्यमयी 'वैली ऑफ फ्लावर्स' (उत्तराखंड)
जुलाई के महीने में पूरी तरह से मानसून छा जाता है और ऐसे समय में उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित 'वैली ऑफ फ्लावर्स' (फूलों की घाटी) अपने सबसे खूबसूरत रूप में खिल उठती है। यूनेस्को की यह विश्व धरोहर जुलाई से सितंबर के बीच ही आम जनता के लिए खुलती है। इस दौरान घाटी में लगभग 500 से अधिक दुर्लभ प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूल प्राकृतिक रूप से कालीन की तरह बिछ जाते हैं। प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफर्स और ट्रेकर्स के लिए जुलाई में फूलों की घाटी की ट्रैकिंग करना किसी जन्नत से कम नहीं होता।
अगस्त: मुन्नार के चाय बागान और पश्चिमी घाट की हरियाली (केरल)
अगस्त में मानसून के ढलते और रुक-रुक कर बरसते दौर में दक्षिण भारत का 'गॉड्स ओन कंट्री' यानी केरल बेहद खूबसूरत हो जाता है। पश्चिमी घाट की पहाड़ियों पर बसा 'मुन्नार' अगस्त में हरियाली की नई चादर ओढ़ लेता है। चाय के बागानों पर जमी ओस की बूंदें, धुंध से ढकी पहाड़ियां और अट्टुकड़ जैसे शानदार झरने अगस्त में मुन्नार को बेहद रोमांटिक बना देते हैं। इस महीने में केरल में आयुर्वेदिक स्पा और कयाकिंग का आनंद लेना भी काफी आरामदायक माना जाता है।
सितंबर: कूर्ग की सुगंधित हवाएं और झरने (कर्नाटक)
सितंबर के महीने में मानसून विदा ले रहा होता है और मौसम में एक हल्की सी सुखद रंगत आ जाती है। कर्नाटक का 'कूर्ग' जिसे 'भारत का स्कॉटलैंड' भी कहा जाता है, सितंबर में घूमने के लिए सबसे मुफीद जगह है। बारिश के बाद कूर्ग के कॉफी के बागान भीनी-भीनी सुगंध से महक उठते हैं। एब्बे फॉल्स और इरुप्पु फॉल्स अपने पूरे वेग से बहते हैं। राजा की सीट (Raja's Seat) से सूर्यास्त का दृश्य देखना और दक्षिण भारत के इस शांत हिल स्टेशन पर विश्राम करना आपके दिमाग को नई ताजगी से भर देता है।
अक्टूबर: वाराणसी के आध्यात्मिक घाट और गंगा आरती (उत्तर प्रदेश)
अक्टूबर में शरद ऋतु के आगमन के साथ ही भारत की सांस्कृतिक राजधानी 'वाराणसी' (बनारस) का मौसम बेहद खुशनुमा हो जाता है। अक्टूबर में उमस और गर्मी खत्म हो जाती है और रातें हल्की ठंडी होने लगती हैं। शाम के समय दशाश्वमेध घाट पर होने वाली भव्य महाआरती, अल सुबह गंगा नदी में बोट राइड (नौकायन) और बनारस की तंग गलियों में कचौड़ी-जलेबी व लस्सी का स्वाद अक्टूबर में दोगुना आनंद देता है। अक्टूबर से ही वाराणसी में देव दीपावली और सांस्कृतिक उत्सवों की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं।
नवंबर: कच्छ का सफेद रण और भव्य 'रण उत्सव' (गुजरात)
नवंबर का महीना आते ही गुजरात के पश्चिम में स्थित 'कच्छ के रण' में रंग-बिरंगे सांस्कृतिक उत्सव की शुरुआत हो जाती है। नमक का यह विशाल सफेद रेगिस्तान (White Desert) नवंबर में देखने लायक होता है। पूर्णिमा की रात में चांदनी की रोशनी में चमकता हुआ सफेद रण किसी जादुई दुनिया जैसा प्रतीत होता है। नवंबर से फरवरी तक चलने वाले 'रण उत्सव' में हस्तशिल्प, कच्छी लोक संगीत, लोक नृत्य और गुजराती व्यंजनों का संगम देखने को मिलता है। इस मौसम में कच्छ का तापमान बेहद आरामदायक रहता है।
दिसंबर: अंडमान का नीला समंदर और न्यू ईयर सेलिब्रेशन (अंडमान-निकारद्वीप)
साल के आखिरी महीने यानी दिसंबर में अगर आप कड़ाके की ठंड से बचकर धूप और समंदर की लहरों का मजा लेना चाहते हैं, तो 'अंडमान और निकोबार द्वीप समूह' सबसे बेस्ट ऑप्शन है। दिसंबर में अंडमान का मौसम बहुत ही सुहावना और नीला आसमान साफ रहता है। हैवलॉक आइलैंड (स्वराज द्वीप) का राधानगर बीच, जिसे एशिया के सबसे खूबसूरत बीचेस में गिना जाता है, दिसंबर में वॉटर स्पोर्ट्स के लिए बिल्कुल सही होता है। यहां आप स्कूबा डाइविंग, स्नोर्कलिंग और सी-वॉक के जरिए समंदर के अंदर की रंगीन दुनिया को करीब से देख सकते हैं और नए साल का जश्न मना सकते हैं।
स्मार्ट ट्रैवलर बनने के लिए ये 3 बातें हमेशा ध्यान रखें
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एडवांस बुकिंग: जिस महीने जो जगह सबसे ज्यादा लोकप्रिय होती है, वहां होटलों और फ्लाइट्स/ट्रेन की मांग बढ़ जाती है। इसलिए कम से कम 2 से 3 महीने पहले बुकिंग कराएं।
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स्थानीय खान-पान: किसी भी जगह जाएं तो वहां के लोकल फूड और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद जरूर लें, इससे यात्रा का अनुभव दोगुना हो जाता है।
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मौसम के अनुसार पैकिंग: पहाड़ी इलाकों के लिए गरम कपड़े और तटीय/रेगिस्तानी इलाकों के लिए हल्के सूती कपड़े और सनस्क्रीन साथ रखना कभी न भूलें।