आषाढ़ मासिक शिवरात्रि पर भद्रा का साया, जानें सही तारीख और पूजा का महामुहूर्त
सनातन धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व है, जो हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में आषाढ़ मास की शिवरात्रि जुलाई के महीने में पड़ रही है। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित यह व्रत मनोकामना पूर्ति के लिए अचूक माना जाता है। इस बार की शिवरात्रि बेहद खास होने वाली है क्योंकि इस दिन दो अत्यंत दुर्लभ और शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। हालांकि, व्रतियों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि इस रात भद्रा का साया भी रहने वाला है, इसलिए पूजा के समय को लेकर सावधानी बरतनी होगी।
आषाढ़ मासिक शिवरात्रि 2026 की सही तारीख और शुभ संयोग
पंचांग गणना के अनुसार, जुलाई 2026 में आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी तिथि की शुरुआत और समापन के समय को देखते हुए व्रत की सही तारीख निर्धारित की गई है। इस पावन अवसर पर शिव भक्तों को महादेव की कृपा प्राप्त करने के लिए दो विशेष शुभ योगों का साथ मिलेगा। इन शुभ योगों में की गई पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का फल कई गुना बढ़ जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार, यह संयोग कई राशि के जातकों के लिए जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आने वाला है।
रात में लगेगी भद्रा, जानें निशिता काल पूजा का सटीक मुहूर्त
मासिक शिवरात्रि की मुख्य पूजा हमेशा आधी रात को यानी 'निशिता काल' में की जाती है। इस बार भक्तों को पूजा के समय का विशेष ध्यान रखना होगा क्योंकि रात के समय भद्रा का साया शुरू हो जाएगा। शास्त्रों में भद्रा काल के दौरान मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन भगवान शिव की पूजा पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। फिर भी, शुद्धता और नियमों के पालन के लिए निशिता काल पूजा का सटीक मुहूर्त जानना जरूरी है। मध्यरात्रि का वह विशेष समय जब महादेव की विशेष आरती और अभिषेक किया जाएगा, वह इस व्रत का सबसे शक्तिशाली पल होगा।
मासिक शिवरात्रि व्रत की पूजा विधि और लोकल महत्व
भारत के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान के शिवालयों में आषाढ़ शिवरात्रि पर सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार, व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह जल्दी स्नान कर पास के मंदिर में जाकर शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित करते हैं। दिनभर उपवास रखने के बाद रात के समय चारों प्रहर की पूजा या निशिता काल की मुख्य पूजा का विधान पूरा किया जाता है। माना जाता है कि आषाढ़ के महीने में शिव आराधना करने से मानसून की शुरुआत के साथ जीवन में आ रहे सभी कष्टों का अंत होता है।