साढ़ेसाती के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 काम, वरना शनिदेव होंगे नाराज और शुरू हो जाएगा बुरा वक्त
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को कर्मफलदाता और न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है। हर व्यक्ति के जीवन में शनि की महादशा, ढैय्या या साढ़ेसाती का प्रभाव कभी न कभी अवश्य आता है। जब किसी जातक पर शनि की साढ़ेसाती शुरू होती है, तो उसके जीवन में कई तरह के उतार-चढ़ाव, मानसिक तनाव और आर्थिक बाधाएं आने लगती हैं। ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का मानना है कि यदि इस विशेष अवधि के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन न किया जाए और अनजाने में भी कुछ गलत आदतें अपना ली जाएं, तो शनिदेव बेहद नाराज हो जाते हैं। इससे जीवन में परेशानियों का दौर और अधिक लंबा और कष्टदायक हो सकता है। आइए जानते हैं कि साढ़ेसाती के प्रभाव से बचने के लिए किन 7 कामों से पूरी तरह तौबा कर लेनी चाहिए।
1. गरीबों, लाचारों और असहायों का अपमान करना
शनिदेव हमेशा न्याय और कर्म के प्रदाता हैं। वे समाज के कमजोर वर्ग, मजदूरों, गरीबों और सफाई कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यदि आपके जीवन में शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा है, तो भूलकर भी किसी गरीब, कमजोर या श्रमिक वर्ग के व्यक्ति का अपमान न करें और न ही उनका हक मारें। ऐसा करने से शनिदेव की कुदृष्टि का सामना करना पड़ सकता है और आपका अच्छा समय भी बुरे वक्त में बदल सकता है।
2. झूठ बोलना और दूसरों को धोखा देना
जो लोग छल-कपट का सहारा लेते हैं और दूसरों को आर्थिक या मानसिक रूप से धोखा देते हैं, उन पर शनिदेव की पैनी नजर रहती है। साढ़ेसाती के समय विशेष रूप से यह ध्यान रखना चाहिए कि आपके व्यापार या बोलचाल में ईमानदारी बनी रहे। किसी के साथ भी विश्वासघात करना या झूठ बोलकर अपना उल्लू सीधा करना आपके लिए शनि के प्रकोप का मुख्य कारण बन सकता है।
3. नशे की बुरी आदतों और व्यसनों में पड़ना
शनिदेव अनुशासित और सात्विक जीवनशैली पसंद करते हैं। साढ़ेसाती या ढैय्या के प्रभाव काल में मांस, मदिरा या किसी भी प्रकार के नशे की लत में पड़ना आपके भाग्य को पूरी तरह अंधकार में धकेल सकता है। नशे से जुड़े कार्य या तामसी वृत्तियां शनि के नकारात्मक प्रभावों को कई गुना बढ़ा देती हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न होने लगती हैं।
4. बड़े बुजुर्गों और माता-पिता का अनादर करना
ज्योतिष में शनि को वृद्धजनों और पितातुल्य लोगों का कारक माना जाता है। घर के बुजुर्गों, माता-पिता या गुरुजनों का अपमान करना कुंडली में शनि की स्थिति को बेहद कमजोर और दूषित कर देता है। जिन घरों में बड़े-बुजुर्गों को प्रताड़ित किया जाता है या उनकी अनदेखी होती है, वहाँ शनि की साढ़ेसाती और अधिक कष्टकारी साबित होती है।
5. बिना वजह जानवरों और पक्षियों को सताना
बेजुबान जीवों को कष्ट देना या उन्हें परेशान करना महापाप माना जाता है। विशेष रूप से काले कुत्ते, काले कौवे और चींटियों को सताने से शनि की भयंकर नाराजगी झेलनी पड़ती है। इसके विपरीत, इन बेजुबान जीवों की सेवा करने और उन्हें भोजन कराने से शनि के अशुभ प्रभावों में भारी कमी आती है और जीवन के रास्ते सुगम होने लगते हैं।
6. आलस और काम टालने की बुरी आदत
शनिदेव कर्म प्रधान हैं और उन्हें कर्मठ लोग अत्यंत प्रिय हैं। यदि आप साढ़ेसाती के दौर में अत्यधिक आलस्य दिखाते हैं, अपने जरूरी कामों को लगातार टालते रहते हैं या अपनी जिम्मेदारियों से भागते हैं, तो मान लीजिए कि आप खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। आलसी प्रवृत्ति के जातकों पर शनि का नकारात्मक प्रभाव सबसे तेजी से हावी होता है, जिससे करियर में असफलता मिलने लगती है।
7. गंदे और अव्यवस्थित रहना व धन का दुरुपयोग
साढ़ेसाती के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। अपने आसपास गंदगी फैलाना, गंदे कपड़े पहनना या अपने कार्यक्षेत्र को अस्त-व्यस्त रखना भी शनि को अप्रिय लगता है। इसके साथ ही, अपनी कमाई का गलत कार्यों में अपव्यय करना या पैसों का घमंड करना आपके लिए बर्बादी का द्वार खोल सकता है। इसलिए सादगी भरा और अनुशासित जीवन जीते हुए अपने कर्मों को शुद्ध रखना ही इस कालखंड से पार पाने का एकमात्र अचूक उपाय है।