सावन की पहली एकादशी पर बन रहा बेहद दुर्लभ महासंयोग, जानें सही तिथि, महत्व, क्या करें और क्या न करें

सावन की पहली एकादशी पर बन रहा बेहद दुर्लभ महासंयोग, जानें सही तिथि, महत्व, क्या करें और क्या न करें

पवित्र सावन का महीना चल रहा है और चारों तरफ भगवान शिव की आराधना की धूम मची हुई है। इसी बीच सनातन धर्म में अत्यधिक धार्मिक महत्व रखने वाली सावन मास की पहली एकादशी तिथि आ गई है। सावन के महीने में एकादशी का व्रत पड़ना सोने पर सुहागा जैसा माना जाता है, क्योंकि इस दिन देवों के देव महादेव के साथ-साथ जगत के पालनहार भगवान विष्णु की भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस बार सावन की पहली एकादशी पर एक बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है, जिससे इस व्रत का पुण्य कई गुना अधिक बढ़ गया है। आइए जानते हैं इस पावन व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और इस दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

सावन एकादशी का पौराणिक और धार्मिक महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को बहुत ही पवित्र माना गया है। ऐसा विश्वास है कि सावन की एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु और भोलेनाथ दोनों का एक साथ आशीर्वाद प्राप्त होता है। चतुर्मास के दौरान पड़ने के कारण इस एकादशी का आध्यात्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। जो जातक सच्चे मन से इस दिन व्रत रखते हैं, उनके जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

एकादशी के दिन क्या करें (What to do)

सावन की इस पहली एकादशी पर व्रत रखने वाले जातकों को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान शिव का विधिवत पूजन करें। पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम या शिव चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या जरूरतमंदों को दान अवश्य देना चाहिए। शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जलाकर उसकी परिक्रमा करना बेहद शुभ माना जाता है।

एकादशी के दिन क्या न करें (What not to do)

पावन एकादशी के दिन कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना जरूरी होता है। इस दिन भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी पर चावल खाने से शरीर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इसके अलावा इस दिन किसी पर भी क्रोध न करें, अपशब्द न बोलें और पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करें। तामसिक भोजन, लहसुन, प्याज और मांस-मदिरा से पूरी तरह दूरी बनाए रखें। घर में शांति का माहौल रखें और किसी का भी अपमान करने से बचें।

 

Latest Posts