राजस्थान में OBC की 92 जातियों में किसका किसका है दबदबा? नए सर्वे ने खोल दी सियासत की पूरी तस्वीर

राजस्थान में OBC की 92 जातियों में किसका किसका है दबदबा? नए सर्वे ने खोल दी सियासत की पूरी तस्वीर

राजस्थान की सियासत के गलियारों में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी आरक्षण और जातियों के राजनीतिक वर्चस्व को लेकर हमेशा से ही जबरदस्त खींचतान देखने को मिलती रही है। हाल ही में राज्य के भीतर ओबीसी श्रेणी में आने वाली कुल 92 जातियों को लेकर एक विस्तृत और चौंकाने वाला सर्वे सामने आया है, जिसने सूबे के राजनीतिक समीकरणों की पूरी तस्वीर खुलकर सामने रख दी है। इस ताजा सर्वे रिपोर्ट के आने के बाद से राजनीतिक दलों के रणनीतिकारों की नींद उड़ गई है, क्योंकि इसमें साफ तौर पर यह उजागर हुआ है कि किस जाति का प्रशासनिक पकड़, सामाजिक प्रभाव और चुनावी राजनीति में कितना दबदबा कायम है। आगामी चुनावों और राजनीतिक उठापटक के लिहाज से इस सर्वे को बेहद अहम माना जा रहा है।

ओबीसी की 92 जातियों का जातीय समीकरण और सियासी रसूख

राजस्थान के सामाजिक ताने-बाने में ओबीसी वर्ग को एक बहुत बड़ा और निर्णायक वोटर बैंक माना जाता है, जिसमें कुल 92 छोटी-बड़ी जातियां शामिल हैं। इस नए सर्वे में यह गहराई से विश्लेषण किया गया है कि इन सभी 92 जातियों में से किन चुनिंदा जातियों के पास सियासी ताकत, टिकटों में हिस्सेदारी और सत्ता की चाबी का सबसे बड़ा हिस्सा है। जानकारों का कहना है कि संख्याबल के लिहाज से भले ही कई जातियां इस वर्ग का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीतिक और आर्थिक रूप से कुछ खास जातियों का प्रभाव ही पूरे प्रदेश के चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है, जिससे राजनीतिक दलों को अपनी टिकट वितरण नीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ रहा है।

सर्वे के खुलासे से राजनीतिक दलों की बढ़ी मुश्किलें और नए समीकरण

जैसे-जैसे यह सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है, वैसे-वैसे राजस्थान के राजनीतिक दलों में अंदरखाने सुगबुगाहट तेज हो गई है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दल इस बात का आकलन करने में जुट गए हैं कि किस जाति के कितने मतदाता किस विधानसभा क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। इस रिपोर्ट ने उन जातियों के भीतर भी अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर सुगबुगाहट बढ़ा दी है, जो लंबे समय से खुद को हाशिए पर महसूस कर रही थीं। आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति का यह जातीय गणित राज्य के राजनीतिक दलों की रणनीति और टिकट बंटवारे के फॉर्मूले को पूरी तरह से तय करने वाला सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

 

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