वंदे मातरम’ के अपमान पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का फूटा गुस्सा, बोले- देश कभी माफ नहीं करेगा, विपक्ष पर साधा तीखा निशाना
भारतीय राजनीति में राष्ट्रगीत और राष्ट्रवाद का मुद्दा एक बार फिर से गर्माता हुआ नजर आ रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से ‘वंदे मातरम’ के अपमान को लेकर देश विरोधी ताकतों और विपक्षी दलों पर जमकर अपनी भड़ास निकाली है। अमित शाह ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि हमारे राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रगीत का अपमान करने वालों को देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। राजस्थान के दौरे पर पहुंचे गृह मंत्री ने एक भव्य कार्यक्रम के दौरान देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा का अनावरण करते हुए यह तीखा बयान दिया है। उनके इस आक्रामक तेवर और बयान के बाद देश की सियासत में एक बार फिर से भूचाल आ गया है और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। आइए जानते हैं अमित शाह के इस पूरे भाषण, राष्ट्रगीत के अपमान के मामले और राजस्थान के इस बड़े राजनीतिक कार्यक्रम की पूरी inside story विस्तार से।
राजस्थान में पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा का भव्य अनावरण और अमित शाह का दौरा
राजस्थान की धरा पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में देश की कई दिग्गज राजनीतिक हस्तियों ने शिरकत की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यहां पहुंचकर देश के पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा का अनावरण किया। इस कार्यक्रम को लेकर राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में पहले से ही काफी गहमागहमी बनी हुई थी। प्रतिमा अनावरण के बाद एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने देश के इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि हमारे देश के महान नेताओं और पूर्व प्रधानमंत्रियों का सम्मान करना हर भारतवासी का कर्तव्य है, और जिन लोगों ने देश के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, उनकी स्मृतियों को संजोकर रखना हमारी वैचारिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। इस दौरान राजस्थान के स्थानीय नेताओं और बड़ी संख्या में उपस्थित आम जनता ने गृह मंत्री का जोरदार स्वागत किया।
‘वंदे मातरम’ के अपमान पर क्यों भड़के गृह मंत्री अमित शाह
अपने संबोधन के दौरान गृह मंत्री अमित शाह का गुस्सा उस वक्त सातवें आसमान पर पहुंच गया जब उन्होंने देश में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के कथित अपमान का मुद्दा उठाया। शाह ने कहा कि कुछ लोग और राजनीतिक दल अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान जैसी पवित्र चीजों का अनादर करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि ‘वंदे मातरम’ सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि यह करोड़ों देशवासियों की देशभक्ति, त्याग और बलिदान का प्रतीक है, जिससे भारत माता की वंदना की जाती है। इस पवित्र गीत का अपमान सीधे तौर पर देश की संप्रभुता और उन स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है जिन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। शाह ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रवाद के इस मुद्दे पर किसी भी तरह की कोताही या बर्दाश्त करने की नीति नहीं अपनाई जाएगी और देश की जनता ऐसे अपमान करने वालों को कभी माफ नहीं करेगी।
विपक्ष पर तीखा हमला और राष्ट्रवाद की सियासत
अमित शाह के इस बयान को सीधे तौर पर विपक्षी दलों पर एक बड़ा राजनीतिक हमला माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से देश के अलग-अलग हिस्सों में राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर सामने आए विवादों के संदर्भ में गृह मंत्री ने यह बात कही। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले लोग हमेशा से राष्ट्र विरोधी तत्वों को बढ़ावा देते आए हैं और अपने राजनीतिक फायदों के लिए देश की संस्कृति को ठेस पहुंचाते हैं। शाह ने जनता से आह्वान किया कि वे ऐसे चेहरों को पहचानें जो देश की एकता और अखंडता के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रवाद को सर्वोपरि रखती है और किसी भी कीमत पर देश के सम्मान पर आंच नहीं आने दी जाएगी।
जनता और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया
गृह मंत्री अमित शाह के इस बयान के बाद पूरे देश की राजनीति में एक बार फिर से उबाल आ गया है। सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट्स तक ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रवाद का मुद्दा सबसे ऊपर ट्रेंड करने लगा है। जहां एक तरफ सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और समर्थक अमित शाह के इस बयान का समर्थन करते हुए विपक्ष पर हमलावर हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों के नेता भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में देश के विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनावों और राजनीतिक गतिविधियों में राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों का यह मुद्दा एक बार फिर से सबसे बड़ा चुनावी हथियार बनने वाला है। राजस्थान की धरती से दिया गया यह संदेश दूर-दूर तक राजनीतिक गलियारों में गूंज रहा है और हर तरफ इसी बात की चर्चा हो रही है कि देश के सम्मान से समझौता करने वालों के खिलाफ अब सरकार और भी ज्यादा सख्त रुख अपनाने जा रही है।