हथियार वाले नक्सल अब दब चुके हैं, खतरा सिर्फ दिमागी नक्सलियों से है': पीएम मोदी के बयान पर खुलकर बोले जीतन राम मांझी
देश की राजनीति में एक बार फिर से नक्सलवाद और वैचारिक कट्टरता को लेकर एक बहुत बड़ी बहस छिड़ गई है। केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस हालिया बयान का पुरजोर समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश में अब हथियार उठाने वाले नक्सली पूरी तरह से दब चुके हैं, लेकिन असली और बड़ा खतरा उन लोगों से है जो वैचारिक या 'दिमागी नक्सलवाद' का समर्थन करते हैं। जीतन राम मांझी के इस बेबाक बयान के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है। उन्होंने विस्तार से समझाया कि कैसे आज के समय में शहरी नक्सल और वैचारिक स्तर पर देश को तोड़ने की साजिश रचने वाले लोग अधिक खतरनाक साबित हो रहे हैं। आइए जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान के क्या मायने हैं और जीतन राम मांझी ने इस पर अपनी क्या प्रतिक्रिया दी है।
पीएम मोदी के उस बयान के मायने जिसे मांझी ने बताया सच
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आंतरिक सुरक्षा और उग्रवाद के खात्मे को लेकर हमेशा से कड़े कदम उठाए हैं। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षाबलों की संयुक्त और आक्रामक कार्रवाई के कारण छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों के घने जंगलों में सक्रिय रहने वाले हिंसक नक्सलियों और उनके ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई बड़े माओवादी कमांडरों ने या तो आत्मसमर्पण कर दिया है या फिर सुरक्षा बलों की गोलियों का शिकार हुए हैं। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात कही थी कि अब जमीन पर बंदूक और हथियार लेकर घूमने वाले नक्सली कमजोर पड़ चुके हैं और उनका दायरा काफी सिमट गया है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों और सुरक्षा एजेंसियों को आगाह किया था कि अब खतरा उन लोगों से है जो पर्दे के पीछे रहकर वैचारिक रूप से युवाओं के दिमाग में जहर घोल रहे हैं और देश के खिलाफ माहौल बना रहे हैं।
जीतन राम मांझी ने की प्रधानमंत्री की बात की सराहना
प्रधानमंत्री मोदी के इस दूरदर्शी बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बिल्कुल सौ प्रतिशत सही बात कही है। मांझी ने अपने राजनीतिक और सामाजिक अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने खुद ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में नक्सलवाद के भयानक दौर को बहुत करीब से देखा है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब गरीब और भोले-भाले आदिवासियों को बंदूक का डर दिखाकर गुमराह किया जाता था और देश के विकास कार्यों को बाधित किया जाता था। लेकिन अब केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत सुरक्षा नीतियों की वजह से उन हथियारबंद नक्सलियों की रीढ़ टूट चुकी है। मांझी ने जोर देकर कहा कि अब जो लोग समाज में वैचारिक मतभेद पैदा कर रहे हैं, देश विरोधी एजेंडा चला रहे हैं और बौद्धिक स्तर पर देश को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, उनसे निपटने की सबसे ज्यादा जरूरत है।
क्या होता है 'दिमागी नक्सलवाद' या अर्बन नक्सल का खतरा
'दिमागी नक्सलवाद' या जिसे आम बोलचाल में 'अर्बन नक्सल' (Urban Naxals) भी कहा जाता है, आज के समय में सुरक्षा एजेंसियों और सरकारों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ये वे लोग होते हैं जो दिखने में सभ्य और पढ़े-लिखे समाज का हिस्सा लगते हैं, लेकिन गुप्त रूप से देश विरोधी ताकतों, हिंसक विचारधाराओं और अलगाववादी ताकतों को वैचारिक, नैतिक और वित्तीय समर्थन प्रदान करते हैं। ये लोग विश्वविद्यालयों, मीडिया, सिविल सोसाइटी और विभिन्न संस्थाओं के भीतर बैठकर देश के संविधान, न्यायपालिका और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ युवाओं के मन में नफरत पैदा करने का काम करते हैं। जीतन राम मांझी ने इसी बात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ये लोग समाज के भीतर दीमक की तरह काम कर रहे हैं, जो देश की आंतरिक शांति के लिए बंदूकधारी नक्सलियों से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं।
देश के विकास और युवाओं को बचाने के लिए वैचारिक लड़ाई जरूरी
जीतन राम मांझी ने आगे कहा कि आज के समय में केवल जमीन पर सुरक्षा बलों को मजबूत रखना ही काफी नहीं है, बल्कि इस वैचारिक और मानसिक आतंकवाद के खिलाफ भी एक लंबी और निर्णायक लड़ाई लड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने देश के युवाओं से अपील की कि वे ऐसे बुद्धिजीवियों और संगठनों के झांसे में बिल्कुल न आएं जो देश की प्रगति को देखकर दुखी होते हैं और हमेशा नकारात्मकता फैलाते हैं। मांझी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, और यही बात उन ताकतों को पच नहीं रही है जो भारत को आगे बढ़ता हुआ नहीं देखना चाहती हैं। ऐसे में जरूरी है कि समाज का हर वर्ग सतर्क रहे और राष्ट्रहित के मुद्दों पर एकजुट होकर इन वैचारिक साजिशों का डटकर मुकाबला करे।