जोधपुर के अस्पताल में घोर लापरवाही! प्रसूता का ब्लड ग्रुप था O पॉजिटिव, चढ़ा दिया B पॉजिटिव खून

जोधपुर के अस्पताल में घोर लापरवाही! प्रसूता का ब्लड ग्रुप था O पॉजिटिव, चढ़ा दिया B पॉजिटिव खून

राजस्थान की न्यायिक और सांस्कृतिक राजधानी जोधपुर (Jodhpur) से एक बेहद विचलित करने वाली और चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली खबर सामने आई है। जोधपुर के एक नामी सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की बड़ी लापरवाही के कारण एक प्रसूता (नवनिर्मित मां) की जान आफत में पड़ गई है। प्रसूता का असली ब्लड ग्रुप 'O पॉजिटिव' (O+) था, लेकिन अस्पताल के स्टाफ ने घोर लापरवाही बरतते हुए उसे 'B पॉजिटिव' (B+) ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा दिया। गलत खून शरीर में जाते ही महिला की तबीयत बिगड़ने लगी और उनके कई महत्वपूर्ण अंगों ने काम करना बंद कर दिया। इस समय महिला की किडनी बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे उनकी जान बचाने के लिए अब लगातार डायलिसिस करना पड़ रहा है। इस दर्दनाक घटना के बाद से ही पूरे राजस्थान और जोधपुर संभाग में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।

डिलीवरी के बाद खून की कमी होने पर चढ़ा दिया गलत ब्लड ग्रुप

यह गंभीर मामला जोधपुर के उम्मेद अस्पताल या एमडीएम अस्पताल से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां प्रसूता को प्रसव (डिलीवरी) के लिए भर्ती कराया गया था। प्रसव के बाद महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन की भारी कमी पाई गई थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने तुरंत रक्त चढ़ाने (Blood Transfusion) की सलाह दी। परिजनों का आरोप है कि ब्लड बैंक से खून लाने और उसे प्रसूता को चढ़ाने के दौरान ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग कर्मियों ने मरीज की फाइल और ब्लड बैग की डिटेल्स का मिलान करने की जहमत तक नहीं उठाई। O पॉजिटिव वाली महिला को धड़ल्ले से B पॉजिटिव खून चढ़ा दिया गया। खून चढ़ने के कुछ ही समय बाद महिला को तेज ठंड लगने लगी, सांस लेने में तकलीफ हुई और वह बेहोश हो गई।

किडनी ने काम करना किया बंद, वेंटिलेटर और डायलिसिस पर जिंदगी की जंग

गलत खून चढ़ने के कारण प्रसूता के शरीर में 'एक्यूट रीनल फेल्योर' (Acute Renal Failure) यानी अचानक किडनी फेल होने की स्थिति पैदा हो गई। डॉक्टरों के अनुसार, जब शरीर में बेमेल खून (Incompatible Blood) प्रवेश करता है, तो लाल रक्त कोशिकाएं (RBCs) तेजी से नष्ट होने लगती हैं, जिससे गुर्दे (Kidneys) पूरी तरह ब्लॉक हो जाते हैं। महिला की हालत नाजुक होने के बाद उन्हें तुरंत आईसीयू (ICU) में शिफ्ट किया गया। फिलहाल प्रसूता की दोनों किडनी काम नहीं कर रही हैं, जिसके कारण उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली (Ventilator) पर रखा गया है और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने के लिए आपातकालीन डायलिसिस (Dialysis) की जा रही है। पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और वे अपनी लाडली की जिंदगी के लिए दुआएं मांग रहे हैं।

जोधपुर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप, जांच कमेटी गठित

इस दिल दहला देने वाली लापरवाही की खबर जैसे ही सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया के जरिए फैली, प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। जोधपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और अस्पताल अधीक्षक ने आनन-फानन में मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। कमेटी को 24 से 48 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि ब्लड बैंक की पर्ची, नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी चार्ट और वार्ड में मौजूद फाइलों की सघन जांच की जा रही है। इस घटना में जो भी डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन या नर्स दोषी पाई जाएगी, उसे तुरंत निलंबित कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मरीज के अधिकारों और मेडिकल प्रोटोकॉल की उड़ी धज्जियां

इस घटना ने अस्पतालों में सुरक्षा मानकों (Patient Safety Protocols) की पोल खोल कर रख दी है। किसी भी मरीज को रक्त चढ़ाने से पहले 'डबल-चेक' करने का सख्त नियम है, जिसमें दो अलग-अलग नर्सिंग कर्मी मरीज के नाम, बेड नंबर और ब्लड ग्रुप का मिलान करते हैं। जोधपुर के इस मामले में इन सभी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवार ने दोषी स्टाफ के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करने की मांग की है। अब देखना होगा कि गहलोत सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस बड़ी लापरवाही पर क्या कड़ा संदेश देता है ताकि भविष्य में किसी अन्य मासूम की जान इस तरह जोखिम में न पड़े।

 

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