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अशोक गहलोत के इस एक बयान से राजस्थान में फिर भड़का सियासी तूफान! सचिन पायलट के साथ पुराना विवाद दोबारा सुर्खियों में

राजस्थान की राजनीति में शह और मात का खेल कभी थमता नजर नहीं आता। विधानसभा चुनावों के बाद जहां लग रहा था कि कांग्रेस के भीतर का अंदरूनी घमासान अब शांत हो चुका है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के एक नए और विस्फोटक बयान ने सूबे के सियासी गलियारों में एक बार फिर आग लगा दी है। इस बयान के बाद पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ उनका सालों पुराना विवाद दोबारा से देश भर की मीडिया की सुर्खियों में आ गया है। एक राजनीतिक रिपोर्टर की नजर से देखें तो गहलोत के इस बयान ने न केवल कांग्रेस आलाकमान की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि राज्य की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (BJP) को भी विपक्ष पर चौतरफा हमला करने का एक सुनहरा मौका दे दिया है। जयपुर से लेकर दिल्ली तक इस ताजा बयानबाजी को लेकर राजनीतिक पंडितों ने अपने-अपने समीकरण बैठाना शुरू कर दिया है।

गहलोत के किस इशारे ने पायलट समर्थकों को फिर से कर दिया लामबंद यह पूरा विवाद अशोक गहलोत के उस हालिया इंटरव्यू और बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने इशारों-इशारों में पार्टी के भीतर के कुछ फैसलों और अतीत की रणनीतियों पर अपनी बेबाक राय रखी। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके तल्ख तेवर और शब्दों के चयन को राजनीतिक विश्लेषकों ने सीधे तौर पर सचिन पायलट गुट पर किए गए हमले के रूप में देखा। गहलोत के इस रुख के सामने आते ही सोशल मीडिया पर पायलट समर्थक सक्रिय हो गए हैं और दोनों नेताओं के पुराने बयानों के वीडियो क्लिप्स एक बार फिर तैरने लगे हैं। कांग्रेस पार्टी के भीतर की यह सुलगती हुई चिंगारी एक बार फिर दावानल बनने की राह पर अग्रसर दिखाई दे रही है।

बीजेपी का तीखा पलटवार: 'कुर्सी की इस लड़ाई का खामियाजा भुगत रही है राज्य की जनता' विपक्ष के इस अंदरूनी घमासान को देखकर बीजेपी ने भी मोर्चा संभालने में बिल्कुल देर नहीं की। बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व और कैबिनेट मंत्रियों ने अशोक गहलोत के बयान को लपकते हुए कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है। बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि कांग्रेस कभी भी जनता के हितों के लिए एकजुट नहीं रही, बल्कि इनके नेता हमेशा सिर्फ अपनी कुर्सी और वर्चस्व की लड़ाई लड़ते आए हैं। सत्ता पक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि आज जब कांग्रेस सत्ता से बाहर है, तब भी इनके बड़े नेताओं के अहंकार और आपसी मतभेद खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं, जिससे यह साफ होता है कि यह पार्टी पूरी तरह से बिखर चुकी है।

कांग्रेस आलाकमान के सामने खड़ी हुई डैमेज कंट्रोल की बड़ी चुनौती इस ताजा विवाद ने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व की मुश्किलों को भी काफी बढ़ा दिया है। आगामी रणनीतियों और राज्य में होने वाले संगठनात्मक बदलावों के बीच इस तरह की बयानबाजी पार्टी की छवि को भारी नुकसान पहुंचा रही है। सूत्रों की मानें तो दिल्ली दरबार ने राजस्थान कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से संपर्क साधा है और उन्हें सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की बयानबाजी से पूरी तरह बचने की सख्त हिदायत दी है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी भी दोनों गुटों के बीच संतुलन बनाने और इस नए विवाद को शांत करने के लिए पर्दे के पीछे से डैमेज कंट्रोल की कवायद में जुट गए हैं।

मरुधरा के सियासी भविष्य पर क्या होगा इस अंदरूनी जंग का असर राजनीति के जानकारों का मानना है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच का यह वैचारिक और राजनीतिक मतभेद इतना गहरा है कि इसे पूरी तरह खत्म करना नामुमकिन जैसा है। आगामी लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए कांग्रेस के लिए यह अंदरूनी जंग आत्मघाती साबित हो सकती है। यदि दोनों गुटों के नेता इसी तरह एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते रहे, तो जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह टूट जाएगा, जिसका सीधा फायदा आने वाले समय में एक बार फिर बीजेपी को मिलना तय है। अब देखना यह बेहद दिलचस्प होगा कि सचिन पायलट इस पूरे घटनाक्रम पर खुद क्या रुख अख्तियार करते हैं।

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