राजस्थान : CJP आंदोलन और स्कूलों की बदहाली पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, हंगामे के बीच केवल 66 मिनट चली कार्यवाही

राजस्थान : CJP आंदोलन और स्कूलों की बदहाली पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, हंगामे के बीच केवल 66 मिनट चली कार्यवाही

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त राजनीतिक टकराव देखने को मिला। सत्र के शुरुआती दिनों में ही सदन के भीतर और बाहर का माहौल काफी गर्म रहा। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और मीडिया कवरेज पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामी और स्कूलों की खस्ताहाल तस्वीर को छिपाने के लिए तानाशाही रवैया अपना रही है।

CJP कार्यकर्ताओं पर हमले और सदन में गूंजा विवाद

इस पूरे विवाद की जड़ में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का 'स्कूल ठीक करो' अभियान रहा, जिसके तहत कार्यकर्ताओं द्वारा जर्जर स्कूलों का निरीक्षण किया जा रहा था। जयपुर के बगरू क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान सीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ हुई कथित मारपीट और विरोध के बाद राजनीतिक पारा और चढ़ गया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा के पटल पर इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया और सरकार से कड़े सवाल किए कि आखिर निरीक्षण करने वालों पर हमले क्यों हो रहे हैं और प्रशासन इस पर चुप क्यों है।

विधानसभा के गेट पर हंगामा और विधायकों का प्रदर्शन

सत्र के दौरान उस वक्त नाटकीय स्थिति पैदा हो गई जब कांग्रेस विधायकों ने पारंपरिक गेट पर रोके जाने का दावा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी आवाज दबाने के लिए सुनियोजित तरीके से रोका गया। इस दौरान पुलिस और विधायकों के बीच तीखी झड़प और बैरिकेड्स पर चढ़ने की तस्वीरें भी सामने आईं। सत्ता पक्ष के मंत्रियों ने पलटवार करते हुए कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों और अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा कदम उठाए गए थे।

हंगामे के बीच यूसीसी बिल पेश और कार्यवाही स्थगित

भारी विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी के बीच विधानसभा की कार्यवाही पर भी इसका गहरा असर पड़ा। गतिरोध और हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही बमुश्किल कुछ ही मिनटों तक चल सकी। इसी शोरगुल और विपक्ष के वॉकआउट के बीच सरकार ने सदन में राजस्थान समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026 समेत अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव और विधेयक प्रस्तुत किए। अंततः लगातार जारी हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

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