पंजाब में बेअदबी कानून पर घमासान, गनीव कौर के गंभीर आरोपों पर स्पीकर ने किया पलटवार
पंजाब की राजनीति में बेअदबी कानून (Beadbi Law) को लेकर इन दिनों सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। राज्य विधानसभा के भीतर और बाहर इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त तकरार देखने को मिल रही है। हाल ही में आम आदमी पार्टी की नेता और विधायक गनीव कौर ने सरकार के रुख पर कड़े सवाल उठाते हुए बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर यह आरोप लगाया है कि सरकार ने श्री अकाल तख्त साहिब को चुनौती दी है। गनीव कौर के इस तीखे बयान के बाद राजनीतिक हलकों में भूचाल आ गया है, जिस पर अब विधानसभा स्पीकर ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट जवाब दिया है और आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
गनीव कौर के गंभीर आरोप, सरकार पर साधा निशाना
विधानसभा सत्र के दौरान चर्चा में हिस्सा लेते हुए गनीव कौर ने बेअदबी कानून के प्रावधानों और सरकार की कार्यप्रणाली पर जमकर निशाना साधा। उनका कहना था कि पंथक परंपराओं और सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों और निर्देशों के विपरीत जाकर सरकार ने जो कदम उठाया है, वह सीधे तौर पर अकाल तख्त साहिब को चुनौती देने के समान है। इस बयान के सामने आने के बाद राज्य के राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि पंजाब में धार्मिक भावनाओं और पंथक मुद्दों से जुड़े मामलों पर जनता की भावनाएं बेहद संवेदनशील होती हैं।
स्पीकर का कड़ा पलटवार, कहा- किसी की हिम्मत नहीं
गनीव कौर के इस सनसनीखेज आरोप पर विधानसभा स्पीकर ने तुरंत कड़ा संज्ञान लिया और सदन के माध्यम से स्पष्टीकरण जारी किया। स्पीकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस देश या सदन में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है, जिसकी इतनी हिम्मत हो सके कि वह श्री अकाल तख्त साहिब जैसी सर्वोच्च और पवित्र संस्था को चुनौती दे सके। उन्होंने कहा कि सरकार हमेशा धार्मिक भावनाओं और पंथक मर्यादाओं का पूरा सम्मान करती है तथा किसी भी फैसले का उद्देश्य सिख पंथ या उसकी परंपराओं को ठेש पहुंचाना नहीं है, बल्कि समाज में शांति और न्याय स्थापित करना है।
पंजाब की सियासत में गरमाया बेअदबी का मुद्दा
धार्मिक और राजनीतिक रूप से अतिसंवेदनशील माने जाने वाले बेअदबी के इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच छिड़ी इस जंग ने आने वाले दिनों के लिए राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। एक तरफ जहां विपक्षी दल सरकार को घेरने के लिए लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार हर मोर्चे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने में जुटी हुई है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पंजाब की राजनीति में धार्मिक आस्था और कानून का यह समीकरण कितना संवेदनशील और विस्फोटक है।