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जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने SIT के सामने लिया सुखबीर बादल का नाम, शिरोमणि अकाली दल का तीखा पलटवार

पंजाब के बहुचर्चित बहबल कलां गोलीकांड मामले में एक बार फिर से बहुत बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। इस संवेदनशील और सालों पुराने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के सामने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह के ताजा बयानों ने राज्य की राजनीति में खलबली मचा दी है। सूत्रों के मुताबिक, जत्थेदार ने पूछताछ के दौरान सीधे तौर पर शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल का नाम लिया है, जिसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म हो गया है। इस बड़े खुलासे के बाद अकाली दल बैकफुट पर आने के बजाय आक्रामक मुद्रा में आ गया है और सुखबीर सिंह बादल सहित पूरी पार्टी ने इन आरोपों पर बहुत ही तीखा पलटवार किया है।

जत्थेदार के बयानों से जांच में आया नया मोड़, अकाली दल की बढ़ीं मुश्किलें

बहबल कलां और बरगाड़ी बेअदबी कांड से जुड़े मामलों की जांच कर रही एसआईटी लगातार इस साजिश की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। इसी सिलसिले में जब जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह से पूछताछ की गई, तो उन्होंने उस समय की अकाली सरकार और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनके इस बयान को जांच एजेंसी एक बड़े और पुख्ता सबूत के तौर पर देख रही है, जिससे आने वाले दिनों में सुखबीर सिंह बादल की कानूनी और राजनीतिक मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ सकती हैं। जत्थेदार के इस कदम को सिख पंथ के भीतर भी एक बेहद कड़ा संदेश माना जा रहा है, क्योंकि अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है।

सुखबीर बादल का करारा जवाब: राजनीतिक प्रतिशोध और स्क्रिप्टेड कहानी का लगाया आरोप

जत्थेदार के बयानों के बाद मचे सियासी घमासान पर चुप्पी तोड़ते हुए सुखबीर सिंह बादल और शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं ने इसे पूरी तरह से एक सोची-समझझी साजिश करार दिया है। बादल ने पलटवार करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए धार्मिक संस्थाओं और उनके प्रमुखों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। अकाली दल का आरोप है कि यह पूरी कहानी पहले से स्क्रिप्टेड है और एसआईटी का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ अकाली दल की छवि को खराब करने और राजनीतिक प्रतिशोध लेने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि वे जांच से भागने वाले नहीं हैं और कानून के सामने सच की जीत होकर रहेगी।

सालों पुराना है बेअदबी और फायरिंग का यह विवाद, पंजाब की सत्ता बदलने में रही है बड़ी भूमिका

साल 2015 में हुए बरगाड़ी बेअदबी कांड और उसके बाद बहबल कलां व कोटकपूरा में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस फायरिंग का मामला पंजाब की सियासत का सबसे संवेदनशील मुद्दा रहा है। इस घटना में दो सिख प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी, जिसके बाद तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार को चौतरफा विरोध का सामना करना पड़ा था। पंजाब की राजनीति के विशेषज्ञ मानते हैं कि इसी एक मुद्दे के कारण साल 2017 के विधानसभा चुनावों में अकाली दल को सत्ता से हाथ धोना पड़ा था और तब से लेकर आज तक हर चुनाव में यह मुद्दा घूम-फिरकर सामने आ ही जाता है। अब एसआईटी के सामने जत्थेदार द्वारा लिए गए नाम ने इस बुझती हुई आग में एक बार फिर घी डालने का काम कर दिया है।

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