पंजाब कांग्रेस में फिर मंचा भीषण घमासान, दिग्गज नेता भूपेश बघेल की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
भारतीय राजनीति में हमेशा चर्चा का केंद्र रहने वाली पंजाब कांग्रेस के भीतर एक बार फिर से गंभीर अंदरूनी घमासान (Internal Conflict) शुरू हो गया है। पार्टी आलाकमान द्वारा राज्य की स्थिति को संभालने और गुटबाजी को खत्म करने के लिए तैनात किए गए वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल की कार्यशैली अब खुद बड़े सवालों के घेरे में आ गई है। पंजाब कांग्रेस के स्थानीय और जमीनी नेताओं के एक बड़े धड़े ने बघेल के फैसलों और उनके काम करने के तौर-तरीकों पर खुलकर असंतोष जताना शुरू कर दिया है, जिससे सूबे की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है।
क्यों उठ रहे हैं भूपेश बघेल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल
पंजाब के स्थानीय नेताओं का आरोप है कि केंद्रीय पर्यवेक्षक और वरिष्ठ रणनीतिकार के रूप में भूपेश बघेल राज्य के जमीनी फीडबैक को समझने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। असंतुष्ट गुट का कहना है कि पार्टी के भीतर फैसले लेते समय वरिष्ठ और वफादार नेताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है और कुछ चुनिंदा चेहरों को ही जरूरत से ज्यादा तरजीह दी जा रही है। इस असंतोष ने तब और तूल पकड़ लिया जब हालिया बैठकों में स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय समीकरणों को दरकिनार कर दिया गया, जिससे पंजाब कांग्रेस के भीतर एक बार फिर पुरानी दरारें चौड़ी होने लगी हैं।
क्या अतीत की बड़ी और आत्मघाती गलतियां दोहराएगी कांग्रेस
इस ताजा विवाद ने राजनीतिक पंडितों और कांग्रेस के शुभचिंतकों को पुराने दौर की याद दिला दी है। इतिहास गवाह है कि पंजाब में कांग्रेस ने जब-जब अपनी अंदरूनी कलह को समय रहते नहीं सुलझाया, तब-तब उसे सत्ता से हाथ धोना पड़ा है। नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच का पुराना विवाद इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसने पार्टी को अर्श से फर्श पर ला खड़ा किया था। अब वर्तमान हालात को देखकर यह बड़ा यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया है कि क्या कांग्रेस आलाकमान अपने पुराने जख्मों से सबक लेने के बजाय एक बार फिर उसी आत्मघाती राह पर चल पड़ा है?
स्थानीय नेताओं की बगावत और दिल्ली दरबार की खामोशी
पंजाब कांग्रेस के कई विधायकों और पूर्व मंत्रियों ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दिल्ली में डेरा डालना शुरू कर दिया है। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, असंतुष्ट नेता इस मुद्दे को सीधे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने उठाने की तैयारी में हैं। वे राज्य में नेतृत्व और सांगठनिक स्तर पर तत्काल फेरबदल की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, दिल्ली दरबार यानी कांग्रेस आलाकमान की ओर से इस पूरे मामले पर फिलहाल रहस्यमयी खामोशी अख्तियार की गई है, जिससे राज्य इकाई में भ्रम और आक्रोश का माहौल और ज्यादा गहराता जा रहा है।
आगामी चुनावों और आम आदमी पार्टी के खिलाफ रणनीति पर असर
पंजाब में इस समय आम आदमी पार्टी (AAP) सत्ता में है और कांग्रेस वहां मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभा रही है। ऐसे में जब पार्टी को एकजुट होकर सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरना चाहिए था, तब नेता आपस में ही कुर्सी की जंग लड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि अगर इस अंदरूनी कलह को तुरंत नहीं दबाया गया, तो आगामी स्थानीय और लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है, जिसका सीधा राजनीतिक फायदा सत्ताधारी दल को मिलेगा।