'अकाल तख्त को चैलेंज कर रहे सीएम भगवंत मान', सुखबीर बादल का बड़ा हमला; कहा- 'मिलनी चाहिए 20 साल की सजा'
पंजाब की राजनीति में धार्मिक मुद्दों को लेकर घमासान तेज हो गया है। शिरोमणि अकाली दल की कोर कमेटी की आपातकालीन बैठक से पहले पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सीधा और तीखा हमला बोला है। सुखबीर बादल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा को चुनौती दे रहे हैं। बादल ने दावा किया कि सीएम मान द्वारा की गई कथित बेअदबी के लिए उन्हें मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
सुखबीर बादल की कड़ी चेतावनी
सुखबीर सिंह बादल ने सीएम मान के बयानों को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि पंजाब सरकार ने खुद बेअदबी के मामलों के लिए जो कड़े कानून बनाए हैं, उसी के तहत भगवंत मान को कम से कम 20 साल की सजा होनी चाहिए। अकाली दल का आरोप है कि मुख्यमंत्री का आचरण 'गुरु का दोषी' करार दिए जाने के बाद भी नहीं बदला है, जो सिख पंथ और अकाल तख्त के प्रति उनके अनादर को दर्शाता है।
'पंथ विरोधी' करार और सामाजिक बहिष्कार
गौरतलब है कि श्री अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक कथित आपत्तिजनक वीडियो की जांच के बाद उन्हें 'गुरु का दोषी' और 'पंथ का विरोधी' घोषित कर दिया था। इसके बाद सिखों से मुख्यमंत्री के सामाजिक बहिष्कार का आदेश भी जारी किया गया था। यह मामला पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बन गया है, जिससे पंजाब की राजनीतिक फिजा काफी गर्म हो गई है। आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच धार्मिक मुद्दों का यह टकराव चुनावी राजनीति को पूरी तरह प्रभावित करता दिख रहा है।
सीएम मान का पलटवार: 'सब राजनीति है'
विपक्ष के इन गंभीर आरोपों पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी पलटवार किया है। उन्होंने अकाल तख्त के फैसले को सीधे तौर पर 'राजनीति से प्रेरित' करार दिया है। सीएम मान का कहना है कि धार्मिक संस्थाओं के पदों पर बैठे लोग अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर उन्हें बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अकाल तख्त साहिब उनके लिए सर्वोपरि है, लेकिन वहां की नियुक्तियों को लेकर उन्होंने सवाल खड़े किए और कहा कि ये नियुक्तियां राजनीतिक दबाव में की जाती हैं।
क्या अकाल तख्त को चुनौती दे रहे मान
सुखबीर बादल ने मुख्यमंत्री के इसी बयान को अकाल तख्त के प्रति खुली चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि अकाल तख्त के आदेश को राजनीति से जोड़ना संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाना है। अब देखना यह होगा कि पंजाब की जनता इस धार्मिक और राजनीतिक रस्साकशी को किस तरह लेती है। एक तरफ जहां अकाली दल इसे 'पंथ की रक्षा' का मुद्दा बता रहा है, वहीं आम आदमी पार्टी इसे अपनी छवि को धूमिल करने की विपक्ष की एक सोची-समझी कोशिश बताकर खारिज कर रही है।