क्या पंजाब कांग्रेस में होगा कोई बदलाव? पार्टी में टूट के खतरे के बीच भूपेश बघेल का बयान
पंजाब कांग्रेस के भीतरी गलियारों में मची राजनीतिक हलचल और गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है, जिससे पार्टी के भीतर एक और बड़ी टूट का खतरा मंडराने लगा है। राज्य में जारी इस भीषण सियासी कलह को शांत करने के लिए पांच दिवसीय चंडीगढ़ दौरे पर पहुंचे पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ एक आपातकालीन मैराथन बैठक की। इस हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद बघेल ने पंजाब कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे में किसी भी तरह के बड़े फेरबदल की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से नेताओं को भरोसा दिलाया कि मौजूदा नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है, जिसने असंतुष्ट धड़े की उम्मीदों को करारा झटका दिया है।
प्रभारी द्वारा बुलाई गई इस रणनीतिक समीक्षा बैठक में पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, हाल ही में नियुक्त किए गए तीन कार्यकारी अध्यक्षों में से दो—राजकुमार वेरका और सुखविंदर सिंह डैनी—पार्टी के संगठन महासचिव, कोषाध्यक्ष और कई जिला अध्यक्ष मुख्य रूप से मौजूद रहे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के जमीनी संगठन को एकजुट और मजबूत करना था।
चन्नी और रंधावा गुट ने बनाई दूरी: बैठक से नदारद रहे कई दिग्गज नेता
भूपेश बघेल के कड़े बयानों के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बेहद करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ नेता संगत सिंह गिलजियां ने इस पूरी बैठक से दूरी बनाए रखी। इसके अतिरिक्त, दो प्रमुख जिला अध्यक्ष भी इस सांगठनिक चर्चा में शामिल नहीं हुए। पूर्व सीएम चन्नी और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के इस बैठक में न पहुंचने से कांग्रेस आलाकमान की चिंताएं बढ़ गई हैं।
हालांकि, बैठक समाप्त होने के बाद प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने इस सामूहिक अनुपस्थिति को ज्यादा तूल देने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने मीडिया को सफाई देते हुए कहा कि कुछ वरिष्ठ नेता अपने पहले से तय कार्यक्रमों और अनिवार्य निजी कारणों की वजह से हाजिर नहीं हो सके हैं। वडिंग ने दावा किया कि पंजाब कांग्रेस का पूरा कुनबा पूरी तरह एकजुट है और उनका एकमात्र लक्ष्य संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाना है।
प्रभारी पर लगे हाईकमान को गुमराह करने के आरोप: राजा वडिंग को हटाने की मांग पर अड़े विद्रोही
पंजाब कांग्रेस का असंतुष्ट चन्नी गुट वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को उनके पद से तत्काल हटाने की मांग पर अड़ा हुआ है। चन्नी समर्थकों का सीधा और गंभीर आरोप है कि राज्य प्रभारी भूपेश बघेल ने धरातल की वास्तविक राजनीतिक परिस्थितियों का सही फीडबैक न देकर दिल्ली में बैठे कांग्रेस हाईकमान को पूरी तरह गुमराह किया है।
विद्रोही धड़े का मानना है कि पिछले बुधवार को आलाकमान द्वारा पंजाब प्रमुख के तौर पर वडिंग के नाम को बरकरार रखना और आगामी 2027 के चुनावों के लिए बनाई गई विभिन्न समितियों की घोषणा एकतरफा थी। विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने के बजाय कांग्रेस के इन शीर्ष नेताओं के बीच सड़क पर आई इस सीधी बगावत ने विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा थमा दिया है।
मोहाली में चन्नी की गुप्त बैठक: सुलह की कोशिशों में जुटे बघेल के अगले कदम पर टिकी नजरें
पार्टी के भीतर बगावत की आग कितनी गहरी है, इसका अंदाजा सोमवार को मोहाली में हुई एक समानांतर बैठक से लगाया जा सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान लोकसभा सांसद चरणजीत सिंह चन्नी की मौजूदगी में कई मौजूदा और पूर्व कांग्रेसी विधायकों ने एक गुप्त बैठक की थी। इस बैठक में खुलकर मांग उठाई गई कि पंजाब कांग्रेस की कमान राजा वडिंग के बजाय दोबारा चन्नी को सौंपी जानी चाहिए।
दूसरी ओर, पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल अपनी तरफ से डैमेज कंट्रोल की कोशिशों में दिन-रात जुटे हुए हैं। उन्होंने असंतोष को दबाने के लिए खुद कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा और वरिष्ठ नेता राजकुमार वेरका के आवास पर जाकर उनसे व्यक्तिगत रूप से लंबी मुलाकात की। सोमवार को जब चंडीगढ़ आगमन पर पत्रकारों ने बघेल से चन्नी गुट की नाराजगी और प्रदेश अध्यक्ष के बदलाव पर सवाल दागा था, तो उन्होंने दो-तीन दिन का समय मांगते हुए जल्द ही स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी। अब देखना यह होगा कि क्या बघेल चन्नी और रंधावा को मनाने में कामयाब होते हैं, या पंजाब कांग्रेस एक बार फिर पुराने 'कैप्टन बनाम सिद्धू' वाले आत्मघाती इतिहास को दोहराने की राह पर चल पड़ी है।