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अब ममता बनर्जी के खिलाफ सायोनी घोष ने क्यों की बगावत...जानिए इनसाइड स्टोरी

पश्चिम बंगाल की सियासत और सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली राजनीतिक खबर सामने आ रही है। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की मुश्किलें अब कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के भीतर सुलग रही असंतोष की आग ने अब एक बेहद गंभीर और बड़े विद्रोह का रूप ले लिया है। बंगाली सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री से राजनेत्री बनीं और ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वाली युवा सांसद सायोनी घोष ने भी अब बागी तेवर अपना लिए हैं। सायोनी घोष ने टीएमसी के बागी सांसदों के गुट में शामिल होकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को अब तक का सबसे तगड़ा झटका दिया है, जिससे कोलकाता से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखने वाले 20 बागी सांसदों में जुड़ा सायोनी का नाम

पार्टी के अंदरूनी और बेहद विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद के भीतर टीएमसी से अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग करने वाले 20 बागी सांसदों की सूची में अब सायोनी घोष का नाम भी आधिकारिक तौर पर जुड़ गया है। तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के लिए यह घटना पूरी तरह से अप्रत्याशित और एक गहरे सदमे जैसी है। सायोनी घोष को पार्टी के भीतर भविष्य का सबसे मजबूत और उभरता हुआ युवा चेहरा माना जा रहा था। ऐसे में उनका अचानक ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद करना टीएमसी के राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

ग्लैमर की दुनिया से संसद तक का सफर: हार के बाद भी ममता ने बनाया था विंग अध्यक्ष

सायोनी घोष का राजनीतिक और व्यक्तिगत सफर बेहद दिलचस्प रहा है। वह पश्चिम बंगाल के फिल्म और संगीत जगत का एक बेहद जाना-माना नाम हैं। उन्होंने महज 17 साल की उम्र में साल 2010 में आई प्रसिद्ध टेलीफिल्म 'इच्छे दाना' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने कई सुपरहिट बंगाली फिल्मों और धारावाहिकों में काम किया और एक बेहतरीन गायिका के रूप में अपनी पहचान बनाई। साल 2021 में उन्होंने ग्लैमर की दुनिया छोड़ राजनीति में एंट्री की और ममता बनर्जी की प्रेरणा से टीएमसी में शामिल हुईं। हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव में वह आसनसोल सीट से हार गईं, लेकिन ममता बनर्जी ने उन पर भरोसा बनाए रखा और साल 2023 में उन्हें टीएमसी यूथ विंग की कमान सौंप दी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जादवपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट से बंपर जीत हासिल की और महज 31 साल की उम्र में संसद पहुंच गईं। हाल ही में उन्हें पार्टी की महिला शाखा की राष्ट्रीय अध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी भी दी गई थी।

आखिर क्यों नाराज हुईं सायोनी? अकेलेपन और समर्थन न मिलने के अहसास ने बनाया बागी

अब राजनीतिक विश्लेषकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस पार्टी ने सायोनी घोष को इतने कम समय में फर्श से अर्श पर पहुंचा दिया, आखिर वह उससे इतनी नाराज क्यों हो गईं? अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सायोनी पिछले काफी समय से पार्टी के भीतर अपने राजनीतिक भविष्य और फैसलों को लेकर पूरी तरह से उपेक्षित महसूस कर रही थीं। उनकी सबसे बड़ी शिकायत यह है कि पिछले चुनाव प्रचार के दौरान जब विपक्षी दलों ने उन पर तीखे व्यक्तिगत हमले किए और उन्हें निशाना बनाया, तब टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व ने खुलकर उनके पक्ष में स्टैंड नहीं लिया और न ही उनका बचाव किया। उस मुश्किल दौर में सायोनी ने खुद को बिल्कुल अकेला और असहाय पाया। इसके अलावा, पार्टी हाईकमान द्वारा उन्हें अपना चुनाव प्रचार समय से पहले ही अचानक खत्म करने का आदेश दिया गया था, जिसने जलती आग में घी का काम किया और उनकी नाराजगी को चरम पर पहुंचा दिया। हालांकि, इस पूरे बगावती घटनाक्रम पर अभी तक सायोनी घोष या टीएमसी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

लाखों की संपत्ति और कर्जदार हैं सायोनी: चुनाव आयोग के हलफनामे से हुआ बड़ा खुलासा

चुनाव आयोग को सौंपे गए सायोनी घोष के आधिकारिक संपत्ति हलफनामे के अनुसार, 12वीं पास सायोनी घोष कुल 91.89 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति की मालकिन हैं, जबकि उन पर लगभग 59 लाख रुपये का बैंक कर्ज भी बकाया है। उनकी चल संपत्ति की बात करें तो उनके पास 35,000 रुपये नकद हैं, जबकि एचडीएफसी, यूको बैंक और अलग-अलग रेकरिंग डिपॉजिट (RD) को मिलाकर बैंकों में 10.25 लाख रुपये जमा हैं। इसके साथ ही उन्होंने दो एलआईसी और दो एचडीएफसी लाइफ पॉलिसी के रूप में 11.03 लाख रुपये का बीमा निवेश किया हुआ है। उनके पास 8 ग्राम सोना और करीब 6 लाख रुपये की कीमत वाली एक होंडा जैज कार है। अचल संपत्ति के मामले में कोलकाता के बेहद पॉश और प्रतिष्ठित गोल्फ ग्रीन इलाके में उनका एक आलीशान आवासीय मकान है, जिसकी घोषित बाजार कीमत 62.64 लाख रुपये है। इसके अलावा उनके नाम पर कोई खेती की जमीन या कमर्शियल प्लॉट नहीं है।

काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में मजबूत हुआ बागी गुट, टूटने की कगार पर तृणमूल कांग्रेस!

सायोनी घोष का इस बागी खेमे में शामिल होना टीएमसी के भीतर पनप रहे व्यापक असंतोष की केवल एक बानगी है। पार्टी के भीतर आंतरिक कलह इस कदर बढ़ चुकी है कि इससे पहले वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी से पूरी तरह इस्तीफा दे दिया था और उनसे ठीक पहले दिग्गज नेता सुखेंदु शेखर रॉय भी ममता का साथ छोड़ चुके हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो वर्तमान में टीएमसी की वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाला यह बागी गुट संसद से लेकर बंगाल तक लगातार मजबूत होता जा रहा है। दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि कई अन्य लोकसभा सांसद और दिग्गज विधायक भी इस बागी गुट के सीधे संपर्क में हैं। सियासत के जानकारों का स्पष्ट मानना है कि अगर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने इस बढ़ते असंतोष को समय रहते काबू नहीं किया, तो तृणमूल कांग्रेस के बिखरने और उसकी राष्ट्रीय एकता के पूरी तरह टूटने का एक बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

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