बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में बड़ी लापरवाही: फोन पर बात कर रही नर्स ने मरीज को लगाया बेहोशी का गलत इंजेक्शन, 11 दिन बाद दर्दनाक मौत

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में बड़ी लापरवाही: फोन पर बात कर रही नर्स ने मरीज को लगाया बेहोशी का गलत इंजेक्शन, 11 दिन बाद दर्दनाक मौत

सागर/भोपाल: मध्य प्रदेश के सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल की कथित घोर लापरवाही के कारण एक मरीज की जान चली गई है। परिजनों का गंभीर आरोप है कि वार्ड में ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन और ब्लूटूथ इयरफोन पर बात करने में मशगूल एक नर्स ने टोकने के बावजूद मरीज को गलत और अत्यधिक खतरनाक इंजेक्शन लगा दिया। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद जहां एक तरफ पीड़ित परिवार में कोहराम मचा है, वहीं पूरे अस्पताल प्रशासन और प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।

छोटी सी गांठ की जांच कराने आए थे देवेंद्र, लापरवाही ने छीन ली जिंदगी

मृतक की पहचान सागर निवासी देवेंद्र पाठक के रूप में हुई है। देवेंद्र को बीती 12 जून को गले में एक छोटी सी गांठ की जांच और बायोप्सी (Biopsy) प्रक्रिया के लिए बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के ईएनटी (ENT) विभाग में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उनके अगले दिन होने वाले ऑपरेशन और जांच की तैयारी के तहत अस्पताल के मेडिकल स्टोर से 'एट्राक्यूरियम बेसीलेट' ($Atracurium\ Besylate$) नाम का एक विशेष इंजेक्शन मंगवाकर रखने को कहा था। डॉक्टरों की योजना इस दवा को ऑपरेशन थिएटर (OT) के भीतर इस्तेमाल करने की थी।

ब्लूटूथ कान में लगा था, मना करने पर भी नर्स ने दे दी 'हाई-रिस्क' दवा

देवेंद्र पाठक की पत्नी रीता पाठक ने पुलिस में दर्ज कराई अपनी शिकायत में बेहद चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। शिकायत के मुताबिक, ड्यूटी पर तैनात नर्स शिखा पटले के कानों में ब्लूटूथ इयरफोन लगे हुए थे और वह पूरी तरह फोन पर किसी से बातचीत करने में व्यस्त थी। इसी दौरान वह देवेंद्र को इंजेक्शन लगाने के लिए आगे बढ़ी। परिजनों ने जब देखा कि नर्स का ध्यान फोन पर है, तो उन्होंने उसे रोका और बात बंद करने को कहा, लेकिन नर्स ने उनकी बात को पूरी तरह अनसुना कर दिया। फोन पर बात करते-करते ही नर्स ने वह 'एट्राक्यूरियम बेसीलेट' इंजेक्शन देवेंद्र को वार्ड में ही लगा दिया, जिसे अगले दिन एनेस्थीसिया (बेहोशी) के समय दिया जाना था।

वेंटिलेटर पर 11 दिनों तक जिंदगी की जंग, आखिरकार थमी सांसें

चिकित्सा विज्ञान में 'एट्राक्यूरियम बेसीलेट' को एक 'हाई-अलर्ट' और बेहद संवेदनशील दवा माना जाता है। इसका मुख्य काम ऑपरेशन के दौरान मरीज की मांसपेशियों को पूरी तरह शिथिल (पैरालाइज) करना होता है। इसे केवल एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की सीधी निगरानी और वेंटिलेटर सपोर्ट की मौजूदगी में ही दिया जाता है।

बिना डॉक्टर की लिखित अनुमति और बिना किसी डबल-चेकिंग के जैसे ही यह दवा देवेंद्र के शरीर में गई, महज कुछ ही सेकंड में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें सांस लेने में भयंकर तकलीफ होने लगी और वे तड़पने लगे। डॉक्टरों को जब इसकी भनक लगी तो आनन-फानन में उन्हें बचाने का प्रयास शुरू हुआ। डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर (CPR) दिया, लेकिन हालत में सुधार न होते देख उन्हें तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर ले जाया गया। देवेंद्र करीब 11 दिनों तक वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे, लेकिन आखिरकार 23 जून की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।

आरोपी नर्स निलंबित, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सिस्टम पर उठाए 5 बड़े सवाल

मामला तूल पकड़ते ही अस्पताल प्रबंधन ने शुरुआती आंतरिक जांच के बाद आरोपी नर्स शिखा पटले को तुरंत प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने भी इस घटना को बेहद शर्मनाक बताते हुए उच्च अधिकारियों को मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं।

हालांकि, इस घटना ने अस्पताल की पूरी सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इसे सिर्फ एक नर्स की व्यक्तिगत गलती कहकर दबाया नहीं जा सकता। इसके पीछे पूरे मेडिकल कॉलेज के सिस्टम की नाकामी साफ दिखती है, जो कई गंभीर सवाल खड़े करती है:

  • इतनी संवेदनशील और हाई-अलर्ट श्रेणी की दवा बिना डॉक्टर या फार्मासिस्ट की मंजूरी के जनरल वार्ड तक कैसे पहुंच गई?

  • अस्पताल के भीतर 'हाई-रिस्क' दवाओं के रख-रखाव और इस्तेमाल के लिए तय अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं किया गया?

  • क्या वार्ड में मरीजों को दवा देने से पहले उसकी 'डबल-चेक' (दो बार मिलान करने) की कोई व्यवस्था लागू नहीं थी?

  • अगर दवा के नाम या इस्तेमाल को लेकर नर्स के मन में कोई संदेह था, तो उसने ऑन-ड्यूटी डॉक्टर से इसकी पुष्टि क्यों नहीं की?

फिलहाल, सागर पुलिस और मेडिकल कॉलेज प्रशासन दोनों ही अपने-अपने स्तर पर इस पूरे मामले की गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं। शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की फाइनल रिपोर्ट और मेडिकल बोर्ड की जांच के आधार पर आरोपी नर्स व प्रबंधन के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

Latest Posts