35 की उम्र के बाद बेबी प्लानिंग: एक्सपर्ट से जानिए क्या यह पूरी तरह सेफ है और किन बातों का रखना होगा खास ख्याल

35 की उम्र के बाद बेबी प्लानिंग: एक्सपर्ट से जानिए क्या यह पूरी तरह सेफ है और किन बातों का रखना होगा खास ख्याल

नई दिल्ली/हेल्थ डेस्क: आज के बदलते दौर में करियर, लाइफ सेटल करने और अन्य पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते देर से शादी और 30 की उम्र के बाद प्रेगनेंसी (Pregnancy) का फैसला लेना एक आम ट्रेंड बन चुका है। हालांकि, मेडिकल साइंस के मुताबिक महिलाओं के लिए 30 साल से पहले कंसीव करना सबसे बेस्ट माना जाता है। ऐसे में जब कोई महिला 35 की उम्र के पार बेबी प्लानिंग का मन बनाती है, तो उसके जहन में कई तरह के सवाल और डर पैदा होने लगते हैं। क्या 35 के बाद मां बनना सुरक्षित है? क्या बच्चे के स्वास्थ्य पर इसका कोई असर पड़ेगा? हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस उम्र में प्रेगनेंसी को 'एडवांस्ड मैटरनल एज' (Advanced Maternal Age) कहा जाता है। इसमें कुछ चुनौतियां जरूर होती हैं, लेकिन सही प्लानिंग और डॉक्टरी सलाह से एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देना पूरी तरह मुमकिन है।

क्या कहती हैं एक्सपर्ट? 35 के बाद प्रेगनेंसी कितनी सुरक्षित?

दिल्ली के कैलाश दीपक हॉस्पिटल की कंसलटेंट प्रेगनेंसी स्पेशलिस्ट और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रज्ञा कंसल के मुताबिक, बहुत सी महिलाओं के मन में यह डर रहता है कि 35 साल के बाद मां बनना सेफ है या नहीं। एक्सपर्ट का कहना है:

"हां, यह बिल्कुल सुरक्षित हो सकता है। आज के समय में भी इस उम्र में बहुत सी महिलाओं की प्रेगनेंसी बेहद नॉर्मल और अच्छी रहती है और वे पूरी तरह स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं। बस अंतर सिर्फ इतना आता है कि 35 साल के बाद हम प्रेगनेंसी को थोड़ा ज्यादा बारीकी और ध्यान से मॉनिटर करते हैं। इसका यह मतलब कतई नहीं है कि कोई समस्या होगी ही, बल्कि इसका उद्देश्य मां और आने वाले बच्चे दोनों को अतिरिक्त सुरक्षा देना होता है।"

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में क्या आते हैं बदलाव? जानिए क्या हैं रिस्क फैक्टर्स

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, महिलाओं के शरीर में अंडों (Eggs) की क्वालिटी और संख्या धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसी वजह से 35 की उम्र के बाद कंसीव करने (गर्भधारण) में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। इसके अलावा, इस उम्र में प्रेगनेंट होने पर कुछ मेडिकल रिस्क भी थोड़े बढ़ जाते हैं:

  • जेस्टेशनल डायबिटीज और हाई बीपी: प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड शुगर का अनियंत्रित होना और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है।

  • मिसकैरेज और प्रीमेच्योर डिलीवरी: छोटी उम्र की तुलना में गर्भपात होने या समय से पहले (नौ महीने से पहले) बच्चे के जन्म की संभावना थोड़ी अधिक होती है।

  • जेनेटिक समस्याएं: बच्चे में डाउन सिंड्रोम जैसी कुछ जेनेटिक या क्रोमोसोमल विसंगतियों का रिस्क पहले के मुकाबले बढ़ जाता है।

सबसे पहला और जरूरी कदम: प्री-प्रेगनेंसी हेल्थ चेकअप

डॉ. प्रज्ञा कंसल का मानना है कि इस उम्र में अचानक कंसीव करने के बजाय एक प्रॉपर प्लानिंग के तहत आगे बढ़ना चाहिए। जब भी आप बेबी प्लान करने का सोचें, तो कोशिश शुरू करने से पहले ही अपनी गायनेकोलॉजिस्ट से मिलकर 'प्री-प्रेगनेंसी चेकअप' (Pre-Pregnancy Checkup) जरूर करवा लें।

इस चेकअप के दौरान डॉक्टर आपकी ओवरऑल हेल्थ, आपकी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री, ली जा रही रूटीन दवाइयां और आपके जरूरी वैक्सीनेशन (टीकाकरण) की जांच करते हैं। इसके साथ ही, अगर आपको शुगर, बीपी या थायराइड जैसी कोई समस्या है, तो उसे प्रेगनेंसी से पहले ही दवाओं के जरिए कंट्रोल में लाया जाता है ताकि गर्भधारण के बाद कोई जटिलता न आए।

कंसीव करने की कोशिश से पहले ही शुरू कर दें यह जरूरी दवा

डॉक्टरों के मुताबिक, यदि आप 35 के बाद बेबी प्लान कर रही हैं, तो प्रेगनेंसी कंसीव करने की कोशिश शुरू करने से कम से कम एक से दो महीने पहले से ही फोलिक एसिड (Folic Acid) की गोलियां लेना शुरू कर देना चाहिए। फोलिक एसिड सप्लीमेंट लेने से गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में होने वाले जन्मजात दोषों (Neural Tube Defects) का खतरा बहुत हद तक कम हो जाता है।

एक सुरक्षित और सुखद प्रेगनेंसी के लिए एक्सपर्ट के 5 गोल्डन टिप्स

अगर आप 35 की उम्र पार कर चुकी हैं और मां बनने की राह पर हैं, तो अपनी जीवनशैली में इन बदलावों को तुरंत शामिल करें:

  • पोषक तत्वों से भरपूर डाइट: अपने भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज, दालें और डेयरी प्रोडक्ट्स को शामिल करें। बाहरी जंक फूड और एक्स्ट्रा शुगर से पूरी तरह दूरी बना लें।

  • शारीरिक रूप से एक्टिव रहें: डॉक्टर की सलाह के अनुसार रोजाना हल्की वॉक, प्रेगनेंसी योग या हल्की एक्सरसाइज जरूर करें। इससे नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ती है और शरीर लचीला रहता है।

  • वजन को नियंत्रित रखें: प्रेगनेंसी से पहले और उसके दौरान अपने बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के अनुसार वजन को संतुलित रखना बेहद जरूरी है।

  • बुरी आदतों को कहें अलविदा: सिगरेट, शराब या किसी भी तरह के नशीले पदार्थों के सेवन से पूरी तरह दूर रहें। यहां तक कि चाय और कॉफी (कैफीन) का सेवन भी बेहद सीमित कर दें।

  • नियमित डॉक्टर विजिट: डॉक्टर द्वारा बताए गए समय पर सभी अल्ट्रासाउंड, जेनेटिक स्क्रीनिंग टेस्ट और ब्लड टेस्ट समय पर करवाएं और बिना उनकी सलाह के कोई भी घरेलू नुस्खा या दवा न आजमाएं।

अंततः, सही और एडवांस प्लानिंग, समय पर उचित डॉक्टरी जांच और एक सकारात्मक सोच के साथ 35 या उसके बाद की उम्र में भी प्रेगनेंसी के इस खूबसूरत सफर को पूरी तरह सुरक्षित और यादगार बनाया जा सकता है।

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