झारखंड हाईकोर्ट के फैसले पर छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की बड़ी प्रतिक्रिया, जेपीएससी नियुक्तियों को लेकर कही यह बात

झारखंड हाईकोर्ट के फैसले पर छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की बड़ी प्रतिक्रिया, जेपीएससी नियुक्तियों को लेकर कही यह बात

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विवादित नियुक्तियों और परीक्षाओं को लेकर राज्य में एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जेपीएससी की नियुक्तियों को रद्द करने वाले पूर्व के आदेश पर अंतरिम रोक (Stay Order) लगाए जाने के बाद जहां एक तरफ चयनित अधिकारियों के चेहरे खिल उठे हैं और वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में वापस लौटने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य का छात्र समुदाय इस फैसले से उद्वेलित है। हाईकोर्ट के इस हालिया रुख के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने इस फैसले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया है कि भले ही वर्तमान में कानूनी दांव-पेच के कारण आदेश पर रोक लगी हो, लेकिन भ्रष्टाचार और पेपर लीक के खिलाफ युवाओं का संघर्ष थमेगा नहीं।

हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर से अफसरों को बड़ी राहत, काम पर वापसी का रास्ता साफ

झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा एकल पीठ के उस आदेश पर रोक लगाने के बाद, जिसमें जेपीएससी की विवादित परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने का निर्देश दिया गया था, प्रभावित अफसरों और राज्य सरकार ने राहत की सांस ली है। इस स्टे ऑर्डर के प्रभावी होते ही संबंधित अधिकारियों के पुनः अपने-अपने पदों और विभागों में योगदान देने की कानूनी बाधाएं फिलहाल हट गई हैं। प्रशासनिक महकमे में इस फैसले को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है और कई अधिकारी तुरंत अपने-अपने कार्यालयों में कामकाज संभालने की प्रक्रिया में जुट गए हैं। राज्य सरकार के लिए भी यह एक बड़ी राहत मानी जा रही है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण विभागों में प्रशासनिक अधिकारियों की कमी के कारण कार्य प्रभावित हो रहे थे। हालांकि, यह राहत अंतरिम है और अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।

स्टे ऑर्डर पर भड़के छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो, आंदोलन तेज करने का ऐलान

हाईकोर्ट द्वारा जेपीएससी के आदेश पर स्टे लगाए जाने की खबर आते ही राज्य के अग्रणी छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि यह स्टे ऑर्डर उन लाखों अभ्यर्थियों के गाल पर तमाचा है जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी की थी। देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि जब परीक्षाएं धांधली, भ्रष्टाचार और पेपर लीक के गंभीर साक्ष्यों के आधार पर कटघरे में खड़ी थीं, तब अफसरों को इस तरह राहत मिलना योग्य युवाओं के साथ अन्याय है। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी कि छात्र शक्ति इस फैसले से कमजोर नहीं पड़ी है, बल्कि उनका आक्रोश और बढ़ गया है। यदि पारदर्शी तरीके से पूरे मामले की जांच नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरा झारखंड एक बार फिर बड़े छात्र आंदोलन का गवाह बनेगा।

झारखंड में जेपीएससी धांधली और पेपर लीक: लाखों युवाओं के भविष्य पर संकट

झारखंड में प्रतियोगिता परीक्षाओं में धांधली, अनियमितता और पेपर लीक का मुद्दा कोई नया नहीं है, लेकिन जेपीएससी की इस हालिया परीक्षा ने राज्य के शैक्षणिक माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। देवेंद्र नाथ महतो और उनके समर्थक छात्र संगठनों का आरोप है कि जेपीएससी की परीक्षाओं में व्यापक स्तर पर सेटिंग और गड़बड़ी की गई है, जिससे राज्य के प्रतिभाशाली और गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों का हक मारा गया है। उनका कहना है कि जो अफसर बैकडोर या फर्जीवाड़े के जरिए पदों पर बैठेंगे, वे राज्य के विकास में क्या योगदान देंगे? छात्र नेताओं का मानना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करके पूरी प्रक्रिया को साफ-सुथरा नहीं बनाया जाता, तब तक अफसरों को काम करने की अनुमति देना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है।

कानूनी लड़ाई और सड़क का संग्राम: आगे क्या होगा झारखंड का छात्र आंदोलन?

झारखंड हाईकोर्ट में अब इस मामले पर विस्तृत सुनवाई होनी तय है, जहां एक ओर चयनित अधिकारियों और राज्य सरकार का पक्ष होगा, तो दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं और न्याय की मांग कर रहे अभ्यर्थियों की दलीलें होंगी। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट किया है कि वे कानूनी स्तर पर शीर्ष वकीलों के माध्यम से अदालत में अपनी बात मजबूती से रखेंगे, वहीं दूसरी ओर सड़क पर भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेंगे। उन्होंने राज्य सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार युवाओं के रोजगार और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली को लेकर संजीदा नहीं दिख रही है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के आने वाले अंतिम फैसले और छात्र संगठनों द्वारा घोषित होने वाले आगामी आंदोलन की रणनीतियों पर टिकी हैं।

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