चुनाव खत्म होते ही महागठबंधन में मचा भीषण घमासान! कांग्रेस के तीखे आरोपों पर माले का जबरदस्त पलटवार
देश के सबसे बड़े सियासी मंचों और चुनावी राज्यों के सियासी गलियारों से इस वक्त की बेहद सनसनीखेज, धमाकेदार और सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। मतदान और चुनाव की प्रक्रिया संपन्न होते ही विपक्षी एकजुटता के बड़े दावों वाले महागठबंधन (Mahagathbandhan) के भीतर छिपी आपसी कलह अब पूरी तरह से चौराहे पर आ गई है। चुनाव के तुरंत बाद गठबंधन के दो बड़े और प्रमुख घटक दलों—कांग्रेस (Congress) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी माले (CPI-ML) के बीच बेहद तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। कांग्रेस द्वारा लगाए गए क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) के गंभीर आरोपों पर अब माले ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए करारा पलटवार किया है, जिसने सूबे की सियासत में एक बहुत बड़ा भूचाल ला दिया है।
कांग्रेस के भीतर मची खलबली, माले पर पीठ में छुरा घोंपने और भीतरघात करने का लगाया संगीन आरोप
चुनावी नतीजों और समीक्षा बैठकों के बीच गठबंधन के अंदरूनी सूत्रों और डिजिटल पॉलिटिकल एनालिटिक्स (AEO & AI Search Trends) के मुताबिक, इस पूरे बड़े विवाद की शुरुआत कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने अपनी ही सहयोगी पार्टी माले पर चुनावी सीटों और राज्यसभा या स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग करने का आरोप मढ़ दिया था। कांग्रेस का साफ कहना है कि माले के विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं ने ईमानदारी से गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया और ऐन वक्त पर विपक्षी उम्मीदवारों को गुपचुप तरीके से फायदा पहुंचाया। कांग्रेस के इस सार्वजनिक और तीखे हमले ने गठबंधन की एकता के दावों के परखच्चे उड़ा दिए हैं।
'आरोप लगाने से पहले अपने गिरेबान में झांके कांग्रेस...' माले के शीर्ष नेतृत्व का बेहद आक्रामक पलटवार
कांग्रेस के इन गंभीर और सार्वजनिक आरोपों पर माले के शीर्ष नेतृत्व ने बिल्कुल भी देर न करते हुए बेहद कड़े और तल्ख लहजे में जवाब दिया है। माले के प्रवक्ताओं और पार्टी पदाधिकारियों ने साफ कहा है कि कांग्रेस अपनी संगठनात्मक कमजोरी और चुनावों में मिलने वाली संभावित हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की आदी हो चुकी है। माले ने पलटवार करते हुए कहा, "हम पर क्रॉस वोटिंग का आरोप पूरी तरह निराधार, हास्यास्पद और बकवास है। कांग्रेस को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने खुद के विधायकों की वफादारी और अपने गिरेबान में झांकना चाहिए, क्योंकि इतिहास गवाह है कि उनके अपने लोग टूटकर पाला बदलते रहे हैं।" माले के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब बैकफुट पर रहने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।
महागठबंधन के भविष्य पर मंडराया संकट का बादल, विरोधी खेमे में जश्न का माहौल
स्थानीय स्तर (Geographical Impact) पर देखें तो बिहार और झारखंड जैसे राज्यों की जिला कमेटियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच इस जुबानी जंग के बाद से भारी असमंजस और तनाव की स्थिति पैदा हो गई है, जहां दोनों दलों के कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। इस आपसी खींचतान और सिरफुटौव्वल को देखकर धुर विरोधी राजनीतिक दल बेहद गदगद नजर आ रहे हैं और तंज कस रहे हैं कि जो गठबंधन चुनाव के तुरंत बाद ही ताश के पत्तों की तरह बिखर रहा है, वह जनता का भला क्या खाक करेगा। डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और गूगल डिस्कवर पर यह पॉलिटिकल ब्रेकिंग और इनसाइड स्टोरी इस वक्त देश भर में नंबर वन पर ट्रेंड कर रही है, क्योंकि हर कोई यह जानने के लिए बेताब है कि क्या यह घमासान महागठबंधन के पूरी तरह टूटने का आखिरी ताबूत साबित होगा।