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डेस्क जॉब में 'बवासीर' का खतरा: 60% बढ़ गए हैं मामले, दिनभर बैठने वाले सावधान

आधुनिक कार्यशैली और डेस्क जॉब ने हमारे काम को आसान तो बना दिया है, लेकिन स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौतियां भी पैदा कर दी हैं। ताजा रिपोर्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी के मुताबिक, आईटी सेक्टर और कॉर्पोरेट जगत में काम करने वाले युवा पेशेवरों में बवासीर (हेमोरोइड्स) के मामलों में 60% तक की भारी वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञ इसे 'गतिहीन जीवनशैली' (Sedentary Lifestyle) का सीधा परिणाम मान रहे हैं।

क्यों बढ़ रहा है कार्यालय कर्मचारियों में खतरा?

अपोलो स्पेक्ट्रा पुणे के जनरल सर्जन डॉ. किरण कुमार जाधव के अनुसार, रोजाना 8 से 10 घंटे तक एक ही जगह बैठकर काम करने से गुदा क्षेत्र की नसों पर लगातार दबाव बना रहता है। यह दबाव ही बवासीर की समस्या को जन्म देता है। इसके साथ ही पानी की कमी (निर्जलीकरण), डाइट में फाइबर की कमी और जंक फूड का अधिक सेवन इस जोखिम को और कई गुना बढ़ा देता है। चौंकाने वाली बात यह है कि 30 से 45 वर्ष की आयु के हर 10 में से 6 कर्मचारी मलाशय में असहजता और दर्द जैसी शिकायतों के साथ डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं।

ये लक्षण हैं तो रहें सतर्क

अक्सर लोग बवासीर के शुरुआती संकेतों को मामूली मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर एनीमिया या गंभीर दर्द का कारण बन सकते हैं। इन लक्षणों को कभी भी हल्के में न लें:

  • मलाशय में लगातार खुजली और बेचैनी होना।

  • मल त्याग के दौरान दर्द या बहुत अधिक असुविधा महसूस होना।

  • मल के साथ चमकीले लाल रंग का रक्त आना।

  • शौचालय जाने के बाद भी पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास (अपूर्ण मल त्याग)।

बचाव के लिए जीवनशैली में करें ये बदलाव

डॉक्टरों का मानना है कि बवासीर जैसी स्थिति को केवल अपनी आदतों में थोड़ा सुधार करके रोका जा सकता है:

  • फाइबर युक्त आहार: अपनी डाइट में अधिक से अधिक फल, सब्जियां, साबुत अनाज और सलाद को शामिल करें। मसालेदार और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं।

  • पानी का भरपूर सेवन: दिनभर में पर्याप्त पानी पिएं, जो कब्ज को दूर रखने में सबसे बड़ा हथियार है।

  • बीच-बीच में ब्रेक लें: हर घंटे अपनी कुर्सी से उठें, थोड़ा टहलें या स्ट्रेचिंग करें। इससे रक्त परिसंचरण (Blood Circulation) बेहतर होता है और नसों पर दबाव कम होता है।

  • सही समय पर प्रतिक्रिया: जब भी मल त्याग की इच्छा हो, उसे टालें नहीं।

इलाज में देरी पड़ सकती है भारी

डॉ. जाधव चेतावनी देते हैं कि लक्षणों को नजरअंदाज करने से समस्या बढ़ सकती है, लेकिन घबराएं नहीं। वर्तमान में चिकित्सा विज्ञान में काफी प्रगति हुई है और कई 'न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रियाएं' (Minimally Invasive Procedures) उपलब्ध हैं, जिससे मरीज को बहुत जल्दी रिकवरी मिल जाती है। यदि आपको ऊपर दिए गए कोई भी शुरुआती लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ से परामर्श लें। याद रखें, छोटी सी सावधानी आपको बड़ी जटिलताओं से बचा सकती है।

 

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