भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफर शुरू: PM मोदी ने जींद से दिखाई हरी झंडी, जानें कैसे पानी की भाप से चलेगी यह ट्रेन
जींद/सोनीपत: भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर का सफर तय करेगी। पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त यह ट्रेन देश के 'नेशनल हाइड्रोजन मिशन' का एक बेहद अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत को क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
डीजल के धुएं की जगह निकलेगी पानी की भाप
पारंपरिक डीजल इंजनों की तरह जहरीला धुआं और प्रदूषण फैलाने के बजाय, यह हाइड्रोजन ट्रेन चलने पर सिर्फ पानी की भाप (वॉटर वेपर) छोड़ेगी। इस ट्रेन में लगे हाइड्रोजन फ्यूल सेल के जरिए बिजली पैदा की जाती है, जिससे ट्रेन को गति मिलती है। सरकार ने साल 2030 तक देश में 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का बड़ा लक्ष्य रखा है, जिसके लिए भारत के पास पर्याप्त मात्रा में सौर ऊर्जा और पानी जैसे प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं।
आखिर ट्रेन में कौन सा हाइड्रोजन हो रहा है इस्तेमाल?
यूं तो उत्पादन की प्रक्रिया के आधार पर हाइड्रोजन ईंधन कई प्रकार के होते हैं—जैसे प्राकृतिक गैस से बनने वाला ब्लू और ग्रे हाइड्रोजन, कोयले से बनने वाला ब्लैक और ब्राउन हाइड्रोजन, तथा न्यूक्लियर पावर से बनने वाला पिंक हाइड्रोजन। लेकिन भारत की इस पहली हाइड्रोजन ट्रेन में पूरी तरह से सुरक्षित और शून्य कार्बन उत्सर्जन वाले 'ग्रीन हाइड्रोजन' का इस्तेमाल किया गया है। ग्रीन हाइड्रोजन को रिन्यूएबल एनर्जी (सौर या पवन ऊर्जा) की मदद से पानी का इलेक्ट्रोलिसिस करके तैयार किया जाता है।
'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' योजना और भविष्य का प्लान
भारतीय रेलवे आगामी समय में “हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज” योजना के अंतर्गत देश के विभिन्न रूटों पर कुल 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की तैयारी कर रहा है। रेल मंत्रालय के मुताबिक, एक हाइड्रोजन ट्रेन के निर्माण में करीब 80 करोड़ रुपये की लागत आती है, जबकि इसके लिए ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर और जमीनी सुविधाएं विकसित करने में प्रति रूट 70 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस तकनीक के विस्तार से भारतीय रेल का पूरा ढांचा पूरी तरह ग्रीन और इको-फ्रेंडली हो जाएगा।