पञ्चकूला में एचकेआरएन कर्मियों को पक्का करने की मांग को लेकर कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन, पार्टी प्रभारी भी हुए शामिल
हरियाणा के पंचकूला शहर में इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक हलचल काफी तेज हो गई है। हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के तहत काम करने वाले कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और उनकी नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर कांग्रेस पार्टी ने सड़कों पर उतरकर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया है। इस प्रदर्शन के दौरान राज्यभर से आए हजारों कर्मचारी और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एकत्र हुए। खास बात यह रही कि इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी प्रभारी भी विशेष तौर पर पहुंचे, जिससे इस आंदोलन को राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर एक नई राजनीतिक गति मिल गई है। पंचकूला के स्थानीय प्रशासन और पुलिस को भी इस बड़े प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े, क्योंकि कर्मचारियों का गुस्सा सरकार की नीतियों के खिलाफ सातवें आसमान पर दिखाई दे रहा था।
हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) के कर्मचारियों का दर्द और मुख्य मांगें
पिछले कुछ वर्षों से हरियाणा में सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों में अनुबंध आधार पर काम करने वाले लाखों युवाओं के लिए एचकेआरएन एक बड़ा माध्यम बना है। हालांकि, इन कर्मचारियों का मुख्य दर्द यह है कि उन्हें न तो समय पर नौकरी की स्थिरता मिलती है और न ही समान काम के लिए समान वेतन या अन्य सरकारी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का साफ कहना है कि उन्होंने वर्षों तक पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दी हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके भविष्य पर हमेशा तलवार लटकी रहती है। कांग्रेस पार्टी ने इन कर्मचारियों के इस मुद्दे को अपने हाथ में लेते हुए राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला है और मांग की है कि बिना किसी देरी के सभी अनुबंध कर्मियों को सेवा सुरक्षा दी जाए और उन्हें नियमित किया जाए।
कांग्रेस प्रभारी की मौजूदगी से गरमाई राजनीति
पंचकूला में हुए इस प्रदर्शन का सबसे बड़ा आकर्षण कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ प्रभारी का इस मार्च में शामिल होना रहा। उनके आने से न सिर्फ पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी जोश देखने को मिला, बल्कि सरकार के खिलाफ उठ रही आवाज को एक राष्ट्रीय मंच भी मिल गया। प्रभारी ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए राज्य की मौजूदा सरकार पर तीखे हमले किए और आरोप लगाया कि युवाओं को रोजगार देने के नाम पर केवल छलावा किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि कांग्रेस पार्टी सदन से लेकर सड़क तक इन कच्चे कर्मचारियों की लड़ाई पूरी ताकत के साथ लड़ेगी और जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। स्थानीय स्तर पर इस रैली ने पंचकूला की राजनीति का तापमान काफी बढ़ा दिया है।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस की चौकसी
पंचकूला जिला प्रशासन के लिए यह प्रदर्शन एक बड़ी चुनौती साबित हुआ। कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए शहर के प्रमुख मार्गों और प्रदर्शन स्थल के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। बेरिकेट्स लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिशें भी की गईं, जिसके चलते पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हल्की झड़पें भी देखने को मिलीं। स्थानीय निवासियों और राहगीरों को भी ट्रैफिक डायवर्जन के कारण कुछ समय के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, प्रशासन की मुस्तैदी के चलते स्थिति नियंत्रण में रही, लेकिन इस बड़े आंदोलन ने यह साबित कर दिया है कि रोजगार और कर्मचारियों का यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति का एक सबसे बड़ा केंद्र बनने वाला है।
चुनाव और राजनीतिक भविष्य पर पड़ने वाला असर
हरियाणा की राजनीति में कच्चे कर्मचारियों का यह मुद्दा हमेशा से एक गेम-चेंजर साबित होता रहा है। राज्य की एक बहुत बड़ी आबादी और उनके परिवार सीधे तौर पर इस नीति से प्रभावित हैं। कांग्रेस पार्टी द्वारा इस मुद्दे को इतनी प्रमुखता से उठाना यह दर्शाता है कि विपक्षी दल सरकार की कमजोरियों को भुनाने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते। पंचकूला से उठी यह आवाज अब पूरे हरियाणा में गूंजने लगी है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इन कर्मचारियों के दबाव के आगे झुकते हुए कोई सकारात्मक नीतिगत बदलाव करती है या फिर यह राजनीतिक टकराव और अधिक उग्र रूप लेता है।