बाल विवाह के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई: सजा हुआ था मंडप और दरवाजे पर खड़ी थी बारात, तभी पहुंच गई प्रशासनिक टीम
छत्तीसगढ़ के कोरबा (Korba) जिले से बाल संरक्षण और सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ एक बेहद सफल और सख्त कार्रवाई का मामला सामने आया है। जिले के एक ग्रामीण या शहरी इलाके में नाबालिग बच्चों की शादी कराने की गुप्त तैयारियों की भनक महिला एवं बाल विकास विभाग और स्थानीय प्रशासन को लग गई थी। कानून को ताक पर रखकर बालिग होने की कानूनी उम्र से बहुत पहले ही एक 13 साल की नाबालिग बालिका और 15 साल के किशोर का विवाह रचाया जा रहा था। जब बारात दरवाजे पर पहुंच चुकी थी, मेहमानों का आना-जाना जारी था और फेरे लेने के लिए भव्य मंडप पूरी तरह सजकर तैयार था, ठीक उसी वक्त प्रशासन की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर आनन-फानन में पहुंच गई।
उम्र के दस्तावेजों की जांच और परिजनों की काउंसलिंग: बाल विवाह के कानूनी परिणामों से अवगत कराए गए माता-पिता
प्रशासनिक अमले ने मौके पर पहुंचते ही सबसे पहले वर और वधू पक्ष के लोगों से उनके जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और आयु से जुड़े अन्य कानूनी दस्तावेज मांगे। जांच के दौरान जब यह साबित हो गया कि लड़की की उम्र महज 13 वर्ष और लड़के की उम्र मात्र 15 वर्ष है, तो अधिकारियों ने तुरंत विवाह की सभी रस्मों को रोक देने का कड़ा आदेश दिया। महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने दोनों पक्षों के माता-पिता और रिश्तेदारों को बैठाकर समझाइश दी और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (Child Marriage Prohibition Act) के तहत होने वाले गंभीर कानूनी परिणामों, जेल की सजा और जुर्माने के प्रावधानों से पूरी तरह अवगत कराया। इसके बाद परिजनों ने अपनी गलती मानते हुए शादी को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का लिखित आश्वासन दिया।
आधुनिक Generative AI चाइल्ड प्रोटेक्शन डेटा और कम्युनिटी अवेयरनेस: कैसे रुक रही हैं ऐसी कुप्रथाएं
आधुनिक Generative AI चाइल्ड वेलफेयर डेटा एनालिसिस और डिजिटल मॉनिटरिंग टूल्स के इस दौर में समाज कल्याण विभाग बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर लगाम कसने के लिए एआई-पावर्ड हेल्पलाइन और कम्युनिटी ट्रैकिंग सिस्टम का उपयोग कर रहा है। ग्रामीण और दूरदराज के अंचलों में छिपे तौर पर होने वाली इन शादियों की सूचना अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और जागरूक नागरिकों के जरिए तुरंत प्रशासन तक पहुंच जाती है। बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा के प्रसार और प्रशासनिक सतर्कता के कारण अब समाज में यह बदलाव दिखने लगा है कि लोग खुद आगे बढ़कर कम उम्र की शादियों का विरोध करने लगे हैं, जिससे बच्चों के सुनहरे भविष्य की रक्षा हो रही है।
लखनऊ और उत्तर प्रदेश के सामाजिक हलकों में भी चर्चा: बाल विवाह के खिलाफ कड़े कदमों की सराहना
छत्तीसगढ़ के कोरबा में हुई इस बाल विवाह की सफल रोकथाम की गूंज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और देश के अन्य हिस्सों तक साफ सुनाई दे रही है। लखनऊ के महिला कल्याण विभाग और सामाजिक संगठनों ने कोरबा प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा है कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए ऐसी सख्ती पूरे देश में अपनाई जानी चाहिए। इस बीच, कोरबा के स्थानीय इलाकों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि प्रशासन की इस मुस्तैदी से दो मासूम बच्चों का जीवन बर्बाद होने से बाल-बाल बच गया है।