छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड का नया फरमान: गैर-मुस्लिम से निकाह करने से पहले लेनी होगी वक्फ की NOC
छत्तीसगढ़ में अंतरधार्मिक विवाह (इंटरफेथ शादी) और मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने निकाह की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और कानूनी दांव-पेंच से बचने के नाम पर एक नया दिशा-निर्देश जारी किया है। इस नए आदेश के मुताबिक, अब मुस्लिम समुदाय के किसी भी व्यक्ति को गैर-मुस्लिम से निकाह करने से पहले वक्फ बोर्ड से औपचारिक अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी (No Objection Certificate) लेना अनिवार्य होगा।
क्या है वक्फ बोर्ड का नया निकाह नियम?
छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के चेयरमैन और आला अधिकारियों द्वारा जारी किए गए इस नए फरमान के तहत राज्य के सभी शहर काजियों, मस्जिदों के इमामों और निकाह कराने वाले मौलवियों को सख्त हिदायत दी गई है। आदेश में साफ कहा गया है कि यदि दूल्हा या दुल्हन में से कोई भी एक पक्ष गैर-मुस्लिम है और वे मुस्लिम रीति-रिवाज से निकाह करना चाहते हैं, तो वक्फ बोर्ड की एनओसी के बिना उनका निकाह नहीं पढ़ाया जाएगा। बिना एनओसी के निकाह कराने वाले काजियों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही जा रही है।
आखिर क्यों पड़ी इस कड़े फरमान की जरूरत?
वक्फ बोर्ड के सूत्रों और पदाधिकारियों के अनुसार, इस फैसले के पीछे का मुख्य उद्देश्य अंतरधार्मिक विवाहों के बाद पैदा होने वाले कानूनी विवादों, धर्म परिवर्तन से जुड़े विवादों और वक्फ संपत्तियों के उत्तराधिकार से जुड़े मामलों को सुलझाना है। अक्सर देखा गया है कि शादियों के बाद अदालती विवाद खड़े होते हैं, जिससे बचने के लिए बोर्ड पहले ही दोनों पक्षों के दस्तावेजों और रजामंदी की गहन जांच करना चाहता है। बोर्ड का मानना है कि इस कदम से भविष्य में होने वाली कानूनी पेचीदगियों से मुस्लिम परिवारों को बचाया जा सकेगा।
सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
छत्तीसगढ़ में आए इस नए फरमान के बाद सामाजिक और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे नागरिक अधिकारों और पर्सनल लॉ के बीच का टकराव मान रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर बोर्ड अपने इस फैसले को वक्फ एक्ट के तहत पूरी तरह वैध और न्यायसंगत ठहरा रहा है। आने वाले दिनों में इस फैसले पर राज्य की सियासत और सामाजिक संगठनों का क्या रुख रहता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।