सेडान कारों में क्यों नहीं होता रियर वाइपर? पैसे बचाने की तरकीब या कोई बड़ा वैज्ञानिक कारण; जानिए इसके पीछे का असली लॉजिक

सेडान कारों में क्यों नहीं होता रियर वाइपर? पैसे बचाने की तरकीब या कोई बड़ा वैज्ञानिक कारण; जानिए इसके पीछे का असली लॉजिक

अगर आपने कभी सड़कों पर दौड़ती अलग-अलग गाड़ियों को ध्यान से देखा हो, तो एक बात जरूर आपके दिमाग में आई होगी। ज्यादातर हैचबैक (Hatchback) और एसयूवी (SUV) कारों के पीछे वाले शीशे (Windscreen) पर वाइपर लगा होता है, लेकिन लग्जरी और प्रीमियम दिखने वाली सेडान (Sedan) कारों में यह फीचर गायब रहता है। ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि शायद कंपनियां पैसे बचाने या लागत कम करने के लिए सेडान में रियर वाइपर नहीं देतीं। लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग है। इसके पीछे ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग का एक बहुत बड़ा तकनीकी और वैज्ञानिक कारण छिपा है। आइए इसे बेहद आसान भाषा में समझते हैं।

1. एयरोडायनामिक्स (Aerodynamics) और कार का डिजाइन

सेडान कारों में रियर वाइपर न होने की सबसे मुख्य वजह उसका एयरोडायनामिक डिजाइन है। सेडान कारों की बनावट 'थ्री-बॉक्स' (Three-Box) स्टाइल में होती है, जिसमें इंजन, पैसेंजर केबिन और बूट स्पेस (डिक्की) अलग-अलग झुकाव में होते हैं। इन कारों का पिछला शीशा एक सुचारू ढलान (Sloping Roofline) की तरह नीचे की ओर जाता है।

जब कार तेज रफ्तार में सड़क पर दौड़ती है, तो सामने से आने वाली हवा गाड़ी की छत से होती हुई पिछले शीशे के ऊपर से बेहद तेजी और सीधे प्रवाह में निकल जाती है। हवा का यह तेज बहाव अपने साथ शीशे पर पड़ने वाली हल्की धूल, मिट्टी और बारिश की बूंदों को खुद-ब-खुद उड़ा ले जाता है। यानी कुदरती हवा ही सेडान के पिछले शीशे को साफ रखने का काम कर देती है।

2. SUV और हैचबैक में क्यों जरूरी है रियर वाइपर?

एसयूवी और हैचबैक कारों का पिछला हिस्सा (रियर प्रोफाइल) बिल्कुल सीधा या फ्लैट (Flat Vertical Back) होता है। जब ये गाड़ियां तेज रफ्तार में चलती हैं, तो इनके सीधे डिजाइन के कारण गाड़ी के ठीक पीछे हवा का दबाव अचानक बहुत कम हो जाता है, जिससे वहां एक लो-प्रेशर वैक्यूम जोन (Low-Pressure Vacuum Zone) बन जाता है।

इस वैक्यूम के कारण कार के नीचे और पहियों से उड़ने वाली धूल, कीचड़, गंदगी और बारिश का पानी पीछे की तरफ गोल घूमते हुए सीधे रियर शीशे पर जाकर चिपक जाता है। इसके चलते ड्राइवर को रियर व्यू मिरर (IRVM) से पीछे का ट्रैफिक दिखना बंद हो जाता है। इसी गंदगी को साफ करने के लिए हैचबैक और एसयूवी में रियर वाइपर और वॉशर देना तकनीकी रूप से अनिवार्य हो जाता है।

3. बूट स्पेस (डिक्की) और वाइपर मोटर की जगह

एक व्यावहारिक कारण यह भी है कि सेडान कारों की डिक्की (Boot Space) पिछले शीशे के ठीक नीचे से शुरू होती है। रियर वाइपर को चलाने के लिए एक भारी-भरकम इलेक्ट्रिकल मोटर लगानी पड़ती है। हैचबैक और एसयूवी में इस मोटर को पिछले दरवाजे (Tailgate) के अंदर आसानी से फिट कर दिया जाता है। लेकिन सेडान में शीशे के ठीक नीचे डिक्की का ढक्कन होने के कारण वाइपर मैकेनिज्म और मोटर को इंस्टॉल करने के लिए पर्याप्त और सही जगह नहीं मिल पाती है।

क्या पैसे बचाना है कंपनियों का मकसद?

यह पूरी तरह एक मिथक (अफ़वाह) है कि कंपनियां पैसे बचाने के लिए ऐसा करती हैं। ऑटोमोबाइल कंपनियां गाड़ियों को डिजाइन करते समय एयरोडायनामिक्स, वजन संतुलन और ईंधन दक्षता (Fuel Efficiency) को प्राथमिकता देती हैं। जब कार का डिजाइन खुद ही शीशे को साफ रखने में सक्षम है, तो वहां बिना वजह रियर वाइपर लगाना कार की लागत, वजन और तकनीकी जटिलता को बढ़ाना होगा। यही वजह है कि लाखों रुपये की लग्जरी सेडान कारों में भी रियर वाइपर नहीं दिया जाता।

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