post-slider

क्या भारत की रफ्तार पर लगने वाला है ब्रेक? 7.7% से घटकर 6% पर आ सकती है जीडीपी ग्रोथ, जानें क्या है वजह

भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार को लेकर वैश्विक मोर्चे पर एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। पिछले कुछ समय से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शुमार भारत की जीडीपी विकास दर (GDP Growth Rate) को लेकर नया अनुमान जारी किया गया है। इस ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश की आर्थिक विकास दर में आने वाले समय में एक बड़ी गिरावट देखी जा सकती है, जिससे यह रफ्तार 7.7 प्रतिशत के उच्च स्तर से फिसलकर सीधे 6 प्रतिशत तक आ सकती है। इस नए आंकड़े ने नीति निर्माताओं से लेकर बाजार विशेषज्ञों तक की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

विकास दर घटने की आखिर क्या है मुख्य वजह आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू और वैश्विक स्तर पर बदल रहे समीकरणों का असर भारत की रफ्तार पर साफ दिखाई दे रहा है। वैश्विक मंदी की आशंका, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में की गई बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग में कमी आई है। इसके अलावा, घरेलू बाजार में भी ऊंची महंगाई दर और बढ़ती ब्याज दरों के कारण आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ा है, जिससे निजी खपत और मांग में सुस्ती दर्ज की जा रही है। यही वजह है कि आने वाली तिमाहियों में आर्थिक गतिविधियों की गति थोड़ी धीमी पड़ सकती है।

क्या देश के सामने कोई बड़ा आर्थिक संकट आने वाला है विकास दर में इस अनुमानित गिरावट को देखकर आम लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या देश किसी मुश्किल दौर या आर्थिक संकट की तरफ बढ़ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो भले ही विकास दर 7.7 फीसदी से घटकर 6 फीसदी के स्तर पर आ जाए, लेकिन इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा। इसे पूरी तरह से मंदी या संकट कहना गलत होगा, बल्कि यह एक तरह का आर्थिक ठहराव या कंसॉलिडेशन फेज है, जिससे दुनिया के कई अन्य देश भी गुजर रहे हैं। हालांकि, रोजगार के मोर्चे पर और नए निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार को कुछ कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।

आने वाले समय में क्या होगी सरकार की रणनीति इस संभावित सुस्ती से निपटने के लिए अब सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कदमों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। आर्थिक गति को दोबारा तेज करने के लिए बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर सरकारी खर्च को बढ़ाना बेहद जरूरी होगा। इसके साथ ही, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आम जनता की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को बढ़ाने के लिए नीतिगत राहत देने की जरूरत महसूस की जा रही है। यदि आने वाले समय में घरेलू मांग में दोबारा तेजी आती है, तो विकास दर के इन अनुमानों में फिर से सुधार देखने को मिल सकता है।

Tags:

Latest Posts