सावधान! क्रेडिट कार्ड से हाउस रेंट चुकाने पर कहीं लग न जाए चपत, भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां; बिगड़ सकता है सिबिल स्कोर
मेट्रो शहरों से लेकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में किराए के मकान में रहने वाले करोड़ों नौकरीपेशा और पेशेवर लोग हर महीने हाउस रेंट का भुगतान करते हैं। पिछले कुछ सालों में थर्ड-पार्टी ऐप्स और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के जरिए क्रेडिट कार्ड से मकान का किराया चुकाने का चलन काफी तेजी से बढ़ा है। महीने के अंत में नकदी की तंगी से निपटने, 45 से 50 दिनों का ब्याज-मुक्त क्रेडिट पीरियड पाने और रिवॉर्ड प्वाइंट्स या कैशबैक कमाने के चक्कर में लोग कार्ड स्वाइप कर देते हैं। लेकिन वित्तीय नियमों में आए बदलावों और बैंकों की सख्त नीतियों के चलते यह सुविधा अब पहले जैसी फायदेमंद नहीं रही। यदि आप भी क्रेडिट कार्ड से रेंट पेमेंट करते हैं, तो पांच बड़ी गलतियां आपकी आर्थिक सेहत बिगाड़ सकती हैं।
1. भारी प्रोसेसिंग फीस और 18% जीएसटी को नजरअंदाज करना
पहले क्रेडिट कार्ड से किराया चुकाना लगभग मुफ्त या बेहद मामूली चार्ज पर होता था, लेकिन अब अधिकांश प्रमुख बैंकों जैसे एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, एसबीआई कार्ड और एक्सिस बैंक ने रेंट ट्रांजैक्शन पर 1% से 2% तक का अतिरिक्त प्रोसेसिंग चार्ज लगाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, थर्ड-पार्टी पेमेंट ऐप्स (जैसे क्रेड, पेटीएम, फोनपे, नोब्रोकर) भी 1% से 1.5% तक का कन्वीनियंस चार्ज वसूलते हैं। इस पूरी फीस पर अलग से 18% जीएसटी जुड़ता है। उदाहरण के लिए, यदि आपका मासिक किराया ₹30,000 है, तो आपको हर महीने ₹400 से ₹600 तक का अतिरिक्त चार्ज सिर्फ फीस के रूप में देना पड़ सकता है, जिससे साल भर में ₹5,000 से ₹7,000 की सीधी चपत लगती है।
2. रिवॉर्ड प्वाइंट्स और माइलस्टोन बेनिफिट्स का गलत भ्रम पालना
कई उपभोक्ता यह सोचकर क्रेडिट कार्ड से किराया भरते हैं कि इससे वे बड़े रिवॉर्ड प्वाइंट्स, एयर माइल्स या सालाना फीस माफी का माइलस्टोन हासिल कर लेंगे। हकीकत यह है कि लगभग सभी शीर्ष बैंकों ने अपने नियम व शर्तों में संशोधन कर रेंट पेमेंट्स को रिवॉर्ड कैटलॉग और माइलस्टोन कैलकुलेशन से बाहर कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि आपको मोटी प्रोसेसिंग फीस तो चुकानी पड़ेगी, लेकिन बदले में मिलने वाले रिवॉर्ड प्वाइंट्स शून्य या बेहद सीमित होंगे। बिना अपने कार्ड के बदले नियमों को जांचे किराया भरना वित्तीय नुकसान का सौदा साबित होता है।
3. क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो (CUR) बढ़ना और सिबिल स्कोर गिरना
हाउस रेंट किसी भी परिवार के मासिक बजट का एक बड़ा हिस्सा होता है। यदि आपकी क्रेडिट कार्ड लिमिट ₹1,00,000 है और आप हर महीने ₹35,000 का किराया कार्ड से भर रहे हैं, तो केवल इस एक ट्रांजैक्शन से आपका क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो 35% के पार चला जाता है। क्रेडिट ब्यूरो (जैसे सिबिल और एक्सपेरियन) के मानकों के अनुसार 30% से अधिक क्रेडिट लिमिट का इस्तेमाल जोखिम भरा माना जाता है। इससे क्रेडिट स्कोर नीचे गिरता है, जिससे भविष्य में होम लोन या पर्सनल लोन मिलने में कठिनाई और ऊंची ब्याज दरों का सामना करना पड़ सकता है।
4. बिल का समय पर पूरा भुगतान न कर पाना और डेट ट्रैप में फंसना
क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तात्कालिक लिक्विडिटी के लिए ठीक है, लेकिन यदि किसी महीने आप बिल का पूरा भुगतान करने के बजाय केवल 'मिनिमम ड्यू' चुकाते हैं, तो रेंट की रकम पर 36% से 42% प्रतिवर्ष की दर से भारी चक्रवृद्दि ब्याज लगना शुरू हो जाता है। मकान का किराया एक आवर्ती (रिकरिंग) खर्च है, जिसे अगले महीने फिर से चुकाना होगा। ऐसे में पिछले महीने का बकाया और नया किराया मिलकर उपभोक्ता को एक गहरे कर्ज के जाल (डेट ट्रैप) में धकेल देता है, जिससे बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है।
5. आईटीआर और टैक्स छूट (HRA) क्लेम में फर्जीवाड़े का जोखिम
इनकम टैक्स विभाग अब उच्च मूल्य वाले वित्तीय लेन-देन पर कड़ी नजर रखता है। यदि कोई व्यक्ति टैक्स बचाने के लिए अपने माता-पिता, रिश्तेदार या जीवनसाथी के खाते में फर्जी रेंट एग्रीमेंट बनाकर क्रेडिट कार्ड से पैसा ट्रांसफर करता है, तो यह आयकर विभाग की जांच के दायरे में आ सकता है। यदि सालाना किराया ₹1 लाख से अधिक है तो मकान मालिक का पैन कार्ड (PAN) देना अनिवार्य होता है। कार्ड के जरिए किए गए हर डिजिटल ट्रांसफर का रिकॉर्ड बैंकों और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में दर्ज होता है। वास्तविक रेंट रसीद और वैध बैंक ट्रेल न होने पर आयकर नोटिस का सामना करना पड़ सकता है।