यूपी चुनाव को लेकर जदयू का बहुत बड़ा एलान, 25 सीटों पर ठोंकेगी ताल; एनडीए गठबंधन पर कही ये बात
उत्तर प्रदेश की सियासी बिसात पर एक और बड़ा धमाका हो गया है। बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने पड़ोसी राज्य यूपी के विधानसभा चुनाव को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला एलान कर दिया है। जदयू ने साफ कर दिया है कि वह इस बार उत्तर प्रदेश में सिर्फ मूकदर्शक बनकर नहीं रहेगी, बल्कि पूरी मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी। पार्टी ने यूपी की 25 विधानसभा सीटों को चिन्हित करते हुए वहां चुनाव लड़ने की मुकम्मल तैयारी शुरू कर दी है। इस एलान के बाद से ही उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक के सियासी गलियारों में भारी सुगबुगाहट शुरू हो गई है और कयासों का दौर तेज हो चुका है।
चुनावी तैयारियों की समीक्षा और 25 सीटों पर मजबूत फोकस
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर लखनऊ में आयोजित एक महत्वपूर्ण सांगठनिक बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया। जदयू के उत्तर प्रदेश प्रभारी ने संगठन की मजबूती और जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ को लेकर एक विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट पेश की। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि पार्टी ने राज्य की उन 25 सीटों को शॉर्टलिस्ट किया है, जहां जदयू का पारंपरिक जनाधार, सामाजिक समीकरण और कार्यकर्ताओं का नेटवर्क बेहद मजबूत स्थिति में है। इन सीटों पर बूथ स्तर की कमेटियों का गठन भी लगभग पूरा हो चुका है। पार्टी का मानना है कि इन क्षेत्रों में पूर्वांचल और बिहार से सटे इलाकों की मजबूत हिस्सेदारी है, जहां नीतीश कुमार के सुशासन मॉडल को काफी पसंद किया जाता है।
एनडीए गठबंधन के भविष्य पर यूपी प्रभारी का बड़ा बयान
इस बड़े एलान के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या जदयू उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस) गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ेगी? इस सस्पेंस से पर्दा उठाते हुए यूपी प्रभारी ने गठबंधन के मोर्चे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जदयू केंद्रीय स्तर पर एनडीए का एक बेहद मजबूत और वफादार हिस्सा है और पार्टी की पहली प्राथमिकता यूपी में भी गठबंधन के तहत मिलकर चुनाव लड़ने की ही है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजनीति में हर दल को अपनी ताकत बढ़ाने और संगठन का विस्तार करने का पूरा अधिकार है। पार्टी इन 25 सीटों पर अपनी मजबूत दावेदारी एनडीए के शीर्ष नेतृत्व के सामने सीट शेयरिंग की बातचीत के दौरान रखेगी, लेकिन भविष्य की किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए संगठन को स्वतंत्र रूप से तैयार किया जा रहा है।