क्या आपके मुखिया जी ने भी की है यह बड़ी गड़बड़ी? बिहार में दागी पंचायतों की तैयार हो रही सीक्रेट लिस्ट

क्या आपके मुखिया जी ने भी की है यह बड़ी गड़बड़ी? बिहार में दागी पंचायतों की तैयार हो रही सीक्रेट लिस्ट

बिहार के ग्रामीण इलाकों और स्थानीय राजनीति में इस वक्त जबरदस्त खलबली मची हुई है। पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर और पूर्णिया समेत सूबे के सभी जिलों के पंचायती राज विभागों से इस वक्त की बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। यदि आपके गांव के मुखिया जी ने भी विकास कार्यों में कोई लापरवाही की है या सरकारी बजट का सही इस्तेमाल नहीं किया है, तो अब उनके लिए मुश्किलें बेहद बढ़ने वाली हैं। राज्य सरकार के सख्त आदेश के बाद अब वैसी पंचायतों की एक 'सीक्रेट लिस्ट' (Secret List) तैयार की जा रही है, जहां सरकारी योजनाओं और फंड में भारी गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की शिकायतें मिली हैं। इस बार केवल मुखिया जी ही नहीं, बल्कि उनके इस खेल में बराबर के साझीदार रहे पंचायत सचिवों (Panchayat Secretaries) पर भी सीधा एक्शन होने जा रहा है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर पंचायती राज विभाग हुआ बेहद सख्त

दरअसल, बिहार में ग्रामीण विकास और पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर साल अरबों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है। लेकिन धरातल पर कई जगहों से नली-गली योजना, सात निश्चय योजना और जल-जीवन-हरियाली जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में भारी बंदरबांट की शिकायतें लगातार सरकार तक पहुंच रही थीं। इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए विभाग ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों (DMs) और जिला पंचायती राज पदाधिकारियों (DPROs) को एक विशेष ऑडिट और जांच का जिम्मा सौंपा है। इस जांच के तहत सभी विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जा रहा है, जिससे मुखिया और सचिवों के पसीने छूट रहे हैं।

मुखिया जी के साथ-साथ पंचायत सचिवों पर भी होगी बड़ी कार्रवाई

अब तक के प्रशासनिक रवैये में अक्सर देखा जाता था कि वित्तीय गड़बड़ी के मामलों में केवल मुखिया पर ही गाज गिरती थी, जबकि पर्दे के पीछे खेल करने वाले सरकारी कर्मचारी यानी पंचायत सचिव बच निकलते थे। लेकिन इस बार सरकार ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है। नए नियम और कड़े दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यदि किसी पंचायत में वित्तीय अनियमितता पाई जाती है, तो उसके लिए मुखिया के साथ-साथ वहां तैनात पंचायत सचिव को भी समान रूप से जिम्मेदार माना जाएगा। विभाग ने साफ कर दिया है कि दोषी पाए जाने वाले सचिवों को न केवल निलंबित (Suspend) किया जाएगा, बल्कि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर एफआईआर (FIR) भी दर्ज कराई जाएगी।

इन जिलों और ब्लॉकों में सबसे पहले शुरू हुई सीक्रेट लिस्टिंग

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच की इस रडार पर सबसे पहले उन पंचायतों को रखा गया है जहां से स्थानीय ग्रामीणों ने जन शिकायत निवारण प्रणाली या सीधे विभाग को लिखित रूप से भ्रष्टाचार की शिकायतें भेजी थीं। पटना, वैशाली, सारण, दरभंगा और आरा जैसे जिलों के कई ब्लॉकों में विशेष जांच दल (SIT) गुप्त रूप से फाइलों की स्क्रूटनी कर रहे हैं। इस लिस्टिंग में योजनाओं के नाम पर बिना काम कराए ही राशि की निकासी कर लेने (Paper Work Fraud) और घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल करने वाले मामलों को सबसे ऊपर रखा गया है।

ग्रामीणों में जागी उम्मीद, भ्रष्ट आचरण पर लगेगा कड़ा लगाम

सरकार की इस ताबड़तोड़ और सख्त कार्रवाई की खबर जैसे ही गांवों तक पहुंची है, वैसे ही आम जनता में खुशी की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि धरातल पर योजनाओं का काम न के बराबर होता है और कागजों पर बड़ी-बड़ी बातें दर्ज कर ली जाती हैं। मुखिया और सचिव की इस साठगांठ के टूटने से अब गांवों में असली विकास होने की उम्मीद जगी है। फिलहाल, सभी जिलों से दागी पंचायतों और उनके जनप्रतिनिधियों व कर्मचारियों की सूची कंपाइल कर सीधे पंचायती राज विभाग के मुख्यालय पटना भेजी जा रही है, जिसके बाद किसी भी वक्त बड़े एक्शन का आधिकारिक आदेश जारी हो सकता है।

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