IND vs SA : बुमराह-सिराज देखते रह गए और दक्षिण अफ्रीका ने कर दिया 17 साल पुराना कमाल मार्करम रिकेलटन ने रचा इतिहास
News India Live, Digital Desk : सेंचुरियन में चल रहा भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका (India vs South Africa) का टेस्ट मैच अब उस मोड़ पर आ गया है जहाँ हर सेशन में खेल बदल रहा है। जहाँ एक तरफ हम भारतीय फैंस उम्मीद कर रहे थे कि बुमराह और सिराज की जोड़ी जल्दी विकेट निकालेगी, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण अफ्रीका के ओपनर्स ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसे देखकर आंकड़े खंगालने वाले भी हैरान रह गए।
दक्षिण अफ्रीकी कप्तान एडेन मार्करम (Aiden Markram) और उनके साथी रयान रिकेलटन (Ryan Rickelton) ने दूसरी पारी में अपनी टीम को वो शुरुआत दी, जिसका इंतजार उनके देश को पिछले 17 सालों से था!
आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर इन दोनों ने कौन सा रिकॉर्ड तोड़ा है और यह भारत के लिए चिंता की बात क्यों है।
17 साल बाद टूटा 'श्राप'
दक्षिण अफ्रीका की पिचें बल्लेबाजों के लिए कब्रगाह मानी जाती हैं। खासकर ओपनर्स के लिए यहाँ नई गेंद को झेलना लोहे के चने चबाने जैसा होता है।
रिकॉर्ड्स बताते हैं कि पिछले 17 सालों में, दक्षिण अफ्रीका की किसी भी ओपनिंग जोड़ी ने अपनी सरजमीं पर चौथी पारी (4th Innings) या मुश्किल हालातों में इतनी मजबूत साझेदारी नहीं की थी।
साल 2008 के दौर में ग्रीम स्मिथ और नील मैकेंज़ी जैसे दिग्गज हुआ करते थे। उनके बाद से साउथ अफ्रीका हमेशा ओपनिंग की समस्या से जूझता रहा। लेकिन आज मार्करम और रिकेलटन ने भारतीय गेंदबाजों के सामने जिस तरह की दीवार खड़ी की, उसने 2008 की यादें ताज़ा कर दीं। वे 17 वर्षों में ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाली पहली दक्षिण अफ्रीकी सलामी जोड़ी बन गए हैं।
भारत के लिए क्यों है खतरे की घंटी?
जब कोई जोड़ी सेट हो जाती है, तो मैच का रुख पलट जाता है।
- गेंद पुरानी हो गई: इन दोनों ने नई गेंद की चमक उतार दी, जिससे आने वाले बल्लेबाजों (मिडिल ऑर्डर) के लिए खेलना आसान हो गया।
- कॉन्फिडेंस: जब ओपनर्स रन बनाते हैं, तो पूरी टीम का मनोबल बढ़ जाता है।
भारतीय गेंदबाज, खासकर जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज ने पूरी जान लगाई, लेकिन इस जोड़ी ने संयम और आक्रामकता का सही तालमेल दिखाया। यह साझेदारी साबित करती है कि यह टेस्ट मैच अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि असली रोमांच तो अब शुरू हुआ है।
क्या अब वापसी करेगी टीम इंडिया?
रिकॉर्ड बनना अपनी जगह है, लेकिन मैच जीतना अलग बात है। मार्करम और रिकेलटन ने अपना काम कर दिया है, लेकिन अब बारी भारतीय गेंदबाजों की है कि वो इस दीवार में सेंध लगाएं। टेस्ट क्रिकेट में एक विकेट गिरते ही गुच्छों में विकेट गिरते हैं, और हमें अपनी 'मेन इन ब्लू' पर पूरा भरोसा है।