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April 02 2026 09:35 pm

Income Tax New Rules: 1 अप्रैल से खत्म हुआ 65 साल पुराना इनकम टैक्स कानून! PAN, HRA और ITR के बदल गए नियम, जानें अपनी जेब पर असर

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नई दिल्ली: अगर आप टैक्स चुकाते हैं या भविष्य में ITR फाइल करने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। 1 अप्रैल 2026 से देश के टैक्स सिस्टम में एक ऐतिहासिक बदलाव लागू हो गया है। सरकार ने 65 साल पुराने 'आयकर अधिनियम 1961' को हमेशा के लिए खत्म करते हुए नया 'इनकम टैक्स एक्ट 2025' लागू कर दिया है। इस नए कानून का सीधा मकसद टैक्स से जुड़ी जटिलताओं को खत्म करना और आम आदमी के लिए नियमों को पारदर्शी बनाना है। आइए जानते हैं पैन कार्ड (PAN), हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ITR फाइलिंग और क्रेडिट कार्ड से जुड़े उन बड़े बदलावों के बारे में जो आज से आपकी वित्तीय जिंदगी पर सीधा असर डालेंगे।

खत्म हुआ 'असेसमेंट ईयर' का झंझट, अब सिर्फ 'टैक्स ईयर'

आम टैक्सपेयर्स हमेशा 'फाइनेंशियल ईयर' (वित्त वर्ष) और 'असेसमेंट ईयर' (निर्धारण वर्ष) के बीच कन्फ्यूज रहते थे। नए कानून ने इस दोहरी व्यवस्था को जड़ से खत्म कर दिया है। 1 अप्रैल से अब सिर्फ 'टैक्स ईयर' (Tax Year) की व्यवस्था लागू होगी। इसका सीधा मतलब है कि जिस साल आप कमाई करेंगे, उसी साल उस पर टैक्स की गणना की जाएगी। इसके अलावा, टैक्स की भाषा को बेहद सरल बना दिया गया है और जो लोग टैक्स के दायरे में नहीं आते, उनके लिए अलग से फॉर्म भरने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है।

ITR फाइलिंग की नई डेडलाइन और फॉर्म हुए जारी

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2026-27 (वित्तीय वर्ष 2025-26) के लिए ITR के सभी फॉर्म (ITR-1 से 7 और ITR-U) जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीखों में भी स्पष्टता ला दी गई है:

नौकरीपेशा (ITR-1 और ITR-2): बिना ऑडिट वाले मामलों में अंतिम तिथि 31 जुलाई ही रहेगी।

अन्य टैक्सपेयर्स: इनके लिए ITR भरने की आखिरी तारीख 31 अगस्त कर दी गई है।

ऑडिट वाले मामले: जिन खातों का ऑडिट होना है, उनके लिए डेडलाइन 31 अक्टूबर तय की गई है।

HRA क्लेम करने वालों के लिए सख्ती, 4 नए शहर 'मेट्रो' में शामिल

अगर आप फर्जी किराये की रसीद लगाकर टैक्स बचाते आए हैं, तो अब सावधान हो जाइए। नए नियमों के तहत HRA क्लेम करने के लिए मकान मालिक का PAN नंबर और किराये का पक्का सबूत देना अनिवार्य कर दिया गया है। कुछ संदिग्ध मामलों में मकान मालिक की पूरी डिटेल भी मांगी जा सकती है।

राहत की खबर: बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को अब 'मेट्रो शहरों' की लिस्ट में शामिल कर लिया गया है। यानी अब इन शहरों में रहने वाले नौकरीपेशा लोग भी दिल्ली, मुंबई की तरह अपनी बेसिक सैलरी का 50% तक HRA छूट के रूप में क्लेम कर सकेंगे (जो पहले 40% था)।

PAN कार्ड और क्रेडिट कार्ड के नियमों में बड़ा फेरबदल

पैन कार्ड: अब पैन कार्ड बनवाने के लिए सिर्फ आधार कार्ड (Aadhaar Card) काफी नहीं होगा। इसके लिए अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से फॉर्म (जैसे आम लोगों के लिए फॉर्म 93, कंपनियों के लिए 94 आदि) भरने होंगे और अतिरिक्त डॉक्यूमेंट्स देने होंगे। बड़े लेन-देन पर पैन देना अब पूरी तरह अनिवार्य है।

क्रेडिट कार्ड: अगर आप क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन 10 लाख रुपये से ज्यादा या नकद 1 लाख रुपये से ज्यादा का लेन-देन करते हैं, तो इसकी सीधी जानकारी सीधे आयकर विभाग (Income Tax Department) के पास जाएगी।

गिफ्ट्स, भत्ते और एक्सीडेंट क्लेम पर मिली जबरदस्त छूट

सरकार ने नए टैक्स एक्ट में नौकरीपेशा और आम लोगों को कई बड़ी राहतें भी दी हैं:

बच्चों का भत्ता: बच्चों के लिए एजुकेशन अलाउंस को 100 रुपये से बढ़ाकर सीधा 3,000 रुपये प्रति महीना कर दिया गया है। वहीं, हॉस्टल अलाउंस 300 रुपये से बढ़कर 9,000 रुपये महीना हो गया है।

गिफ्ट वाउचर छूट: कंपनियों से मिलने वाले गिफ्ट कार्ड, वाउचर या कूपन पर टैक्स छूट की लिमिट 5,000 रुपये सालाना से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई है। यह फायदा पुरानी और नई दोनों टैक्स रिजीम में मिलेगा।

MACT मुआवजा: मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) से मिलने वाले मुआवजे पर जो भी ब्याज मिलेगा, वह अब पूरी तरह से टैक्स फ्री (Tax Free) होगा। इस पर कोई टीडीएस (TDS) नहीं कटेगा।

धार्मिक और सामाजिक ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन हुआ आसान

गैर-लाभकारी संगठनों (NGOs) और ट्रस्ट के लिए टैक्स नियमों को पुराने कानून की सात अलग-अलग धाराओं से निकालकर सिर्फ एक नई धारा '17-B' में समेट दिया गया है। अब अस्थायी रजिस्ट्रेशन एक सेंट्रलाइज्ड सिस्टम से होगा। जो ट्रस्ट टैक्स छूट का लाभ नहीं ले रहे हैं, वे अपनी मर्जी से अपना रजिस्ट्रेशन आसानी से रद्द करा सकेंगे।