यूपी में एलपीजी का भारी संकट, 1.60 लाख पहुंचा बैकलॉग, अब भंडारे के लिए अनाज नहीं सिलेंडर मांग रहे लोग
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में रसोई गैस (LPG) की किल्लत ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि अब यह संकट लोगों की धार्मिक आस्था और परंपराओं पर भी भारी पड़ने लगा है। चैत्र नवरात्र के बाद प्रदेश भर में होने वाले कन्या पूजन और भंडारों (Bhandara) के लिए लोग अब राशन या दान-पुण्य की जगह 'गैस सिलेंडर' की गुहार लगा रहे हैं। आपूर्ति विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अकेले लखनऊ में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का बैकलॉग 1 लाख 60 हजार के पार जा चुका है।
भंडारे पर संकट: 'अनाज है पर आग नहीं'
यूपी में नवरात्र के समापन पर विशाल भंडारों का आयोजन एक पुरानी परंपरा है। लेकिन इस बार आयोजक पशोपेश में हैं। लखनऊ के कई इलाकों में भंडारा समितियों ने बाकायदा अपील जारी की है कि जो लोग दान करना चाहते हैं, वे अनाज के बजाय अपने हिस्से का सिलेंडर दान कर दें। बैकलॉग बढ़ने के कारण बुकिंग के 15 से 20 दिन बाद भी सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो पा रही है। ऐसे में सामूहिक भोज के लिए ईंधन जुटाना आयोजकों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
कंपनियों का गणित फेल, हाहाकार में जनता
गैस आपूर्ति में इस भारी गिरावट का सबसे बड़ा कारण डिलीवरी सिस्टम का चरमराना बताया जा रहा है। कुल 1.60 लाख के बैकलॉग में अकेले इंडेन (Indane) के ही 1 लाख 4 हजार सिलेंडर पेंडिंग हैं। गैस एजेंसियों का तर्क है कि उनके पास हॉकरों की भारी कमी है और मांग अचानक बढ़ने से वे सप्लाई चेन को मैनेज नहीं कर पा रहे हैं। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उन्हें 'सिलेंडर डिलीवर' होने का फर्जी मैसेज आ जाता है, जबकि हकीकत में सिलेंडर उनके घर तक नहीं पहुंचता।
कमर्शियल और ब्लैक मार्केटिंग का खेल?
एक तरफ घरों में चूल्हे ठंडे पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आरोप लग रहे हैं कि घरेलू गैस की कालाबाजारी (Black Marketing) जोरों पर है। कई जिलों में शिकायतें मिली हैं कि घरेलू सिलेंडरों को होटलों और कमर्शियल संस्थानों में डायवर्ट किया जा रहा है। हापुड़ और बांदा जैसे जिलों में आपूर्ति विभाग ने छापेमारी कर अवैध भंडारों का भंडाफोड़ भी किया है, लेकिन इसके बावजूद आम आदमी सुबह 5 बजे से ही गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में लगने को मजबूर है।
चाय वालों ने फिर अपनाया कोयला और लकड़ी
एलपीजी की कमी का सीधा असर पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। लखनऊ और आसपास के शहरों में छोटे चाय विक्रेता और रेहड़ी-पटरी वालों ने मजबूरी में फिर से लकड़ी और कोयले (Coal & Wood) के चूल्हों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इससे न केवल प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि भीषण गर्मी में धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन का दावा है कि स्थिति जल्द सामान्य होगी, लेकिन जमीनी हकीकत फिलहाल राहत के संकेतों से कोसों दूर है।