इधर ट्रंप दे रहे थे पाषाण युग में धकेलने की धमकी, उधर ईरान ने इजरायल पर दाग दीं ताबड़तोड़ मिसाइलें
पश्चिम एशिया में तनाव अब एक खौफनाक युद्ध का रूप लेता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनियों के बावजूद ईरान ने अपने आक्रामक तेवर कम नहीं किए हैं। जिस वक्त ट्रंप अमेरिका की जनता को संबोधित करते हुए ईरान को अपनी 'फाइनल वार्निंग' दे रहे थे, ठीक उसी समय ईरान ने इजरायल को दहलाने की एक बड़ी साजिश रच दी। ईरान की ओर से इजरायल पर एक के बाद एक कई शक्तिशाली मिसाइलें दागी गईं, जिसके बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।
इजरायल में गूंजे सायरन, एयर डिफेंस सिस्टम हुआ एक्टिव ईरान के इस अचानक हुए हमले के बाद इजरायली सेना तुरंत अलर्ट मोड पर आ गई। इजरायली डिफेंस फोर्सेज के मुताबिक, ईरानी मिसाइलों को आसमान में ही नेस्तनाबूद करने के लिए उनका एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया। सेना की 'होम फ्रंट कमांड' ने उत्तरी इजरायल के कई इलाकों में खतरे के सायरन बजा दिए, ताकि लोग सुरक्षित ठिकानों पर छिप सकें। सेना की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि महज तीन घंटे के भीतर इजरायली सीमा की तरफ यह तीसरा बड़ा मिसाइल हमला था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस त्वरित कार्रवाई के कारण फिलहाल किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है और खतरे को टालने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
ट्रंप की खौफनाक धमकी- 'पाषाण युग में पहुंचा देंगे' इस मिसाइल हमले से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अब तक का सबसे कड़ा बयान दिया। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अगर ईरान ने जल्द ही अमेरिका के साथ कोई शांति समझौता नहीं किया, तो इसके अंजाम बेहद भयानक होंगे। उन्होंने ईरान के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर (बिजली संयंत्रों) को तबाह करने की सीधी धमकी देते हुए कहा कि अमेरिका उन्हें 'पाषाण युग' (Stone Age) में धकेल देगा।
'हमारा मकसद सत्ता परिवर्तन नहीं, लेकिन...' अपने संबोधन में ट्रंप ने कूटनीतिक चाल चलते हुए यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन करना कभी नहीं रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के पुराने और कट्टरपंथी नेता पहले ही मारे जा चुके हैं और अब जो नया नेतृत्व वहां आया है, वह थोड़ा समझदार और कम उग्र है। इसके बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अगर बातचीत विफल होती है और समझौता नहीं होता है, तो अमेरिकी सेना ईरान के हर एक बिजली उत्पादन संयंत्र को एक साथ निशाना बनाएगी, जिससे पूरा देश अंधेरे में डूब जाएगा।