बच्चों के दिमाग को कंप्यूटर जैसा तेज बना देंगी ये 5 जादुई मछलियां, भरपूर प्रोटीन के साथ मिलेगा ओमेगा-3 का डबल डोज

बच्चों के दिमाग को कंप्यूटर जैसा तेज बना देंगी ये 5 जादुई मछलियां, भरपूर प्रोटीन के साथ मिलेगा ओमेगा-3 का डबल डोज

बढ़ती उम्र में बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सही पोषण देना हर माता-पिता की सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। बच्चों के दिमाग को तेज करने, उनकी आंखों की रोशनी बढ़ाने और हड्डियों को मजबूत बनाने में नॉन-वेजिटेरियन फूड्स में मछली को सबसे बेहतरीन सुपरफूड माना गया है। हालांकि, छोटे बच्चों को मछली खिलाते समय पेरेंट्स सबसे ज्यादा इस बात से डरते हैं कि कहीं उनके गले में कांटा न फंस जाए। न्यूट्रिशनिस्ट्स और पीडियाट्रिशियन्स (बाल रोग विशेषज्ञों) के अनुसार, सीफूड और मीठे पानी की कुछ ऐसी खास प्रजातियां हैं जिनमें कांटे न के बराबर होते हैं और वे मरकरी (पारा) से पूरी तरह मुक्त होती हैं, जो बच्चों की सेहत के लिए अमृत के समान हैं।

दिमाग को बनाएगा सुपरफास्ट: क्यों जरूरी है बच्चों के लिए ओमेगा-3 और विटामिन डी

मछली में प्रचुर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड (विशेषकर DHA और EPA) पाया जाता है, जो बच्चों के ब्रेन सेल्स और नर्वस सिस्टम के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण न्यूट्रिएंट है। इसके अलावा, इसमें मौजूद हाई-क्वालिटी प्रोटीन बच्चों की मांसपेशियों को मजबूती देता है और विटामिन डी हड्डियों को कैल्शियम सोखने में मदद करता है। जो बच्चे बचपन से ही सही मात्रा में सुरक्षित मछलियों का सेवन करते हैं, उनकी एकाग्रता (कंसंट्रेशन), याददाश्त और सीखने की क्षमता अन्य बच्चों के मुकाबले काफी तेज पाई जाती है। आइए जानते हैं उन 5 बेहतरीन मछलियों के बारे में जिन्हें आप बिना किसी डर के अपने बच्चों की डाइट में शामिल कर सकते हैं।

ये हैं वो 5 सबसे सुरक्षित और बेस्ट मछलियां, जिनमें होते हैं बेहद कम कांटे

बच्चों के लिए मछलियों का चुनाव करते समय सबसे पहले ऐसी वैरायटी चुननी चाहिए जो कांटे रहित हों या जिनमें केवल एक मुख्य रीढ़ की हड्डी हो। सबसे पहली और लोकप्रिय मछली है 'साल्मन' (Salmon), जो ओमेगा-3 का सबसे बड़ा स्रोत है और इसमें कांटे साफ करना बेहद आसान होता है। दूसरी है 'पॉम्पफ्रीट' (Pomfret), जो भारत के तटीय इलाकों के साथ-साथ उत्तर भारत के बाजारों में भी आसानी से मिल जाती है; इसका मांस बहुत नरम होता है और इसमें बारीक कांटे नहीं होते। तीसरी बेहतरीन पसंद 'रोहू' (Rohu) या 'कतला' (Katla) का पेट वाला हिस्सा (पेटी) हो सकता है, जहां बड़े कांटे होते हैं जिन्हें आसानी से निकाला जा सकता है। चौथी मछली है 'सिंघाड़ा' (Singhara/Catfish) जिसमें सिर्फ एक मुख्य कांटा होता है, और पांचवीं 'कोड' (Cod) मछली है जो विटामिन ए और डी से भरपूर होने के साथ बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती है।

लखनऊ सहित उत्तर भारत के बाजारों से खरीदते समय बरतें ये सावधानियां

यदि आप उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, दिल्ली-एनसीआर या अन्य मैदानी इलाकों में रह रहे हैं, तो बच्चों के लिए मछली खरीदते समय कुछ विशेष स्थानीय बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। हमेशा ध्यान रखें कि बच्चों को खिलाने के लिए केवल ताजा मछली ही खरीदें, जिसकी आंखें चमकदार और मांस दबाने पर वापस अपनी शेप में आ जाए। जमी हुई या पुरानी मछली से बच्चों में फूड पॉइजनिंग और पेट इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों को मछली हमेशा अच्छी तरह से पकाकर, स्टीम करके या कम तेल में ग्रिल करके ही दें, कभी भी अत्यधिक तीखी या डीप फ्राई की हुई मछली बच्चों को न खिलाएं ताकि उसके असली पोषक तत्व नष्ट न हों।

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